भारतीय जनता पार्टी भले इस बात को ले कर अपनी पीठ थपथपा रही है कि 20 साल के संघर्ष के बाद ही पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गृह विभाग हासिल कर ली। पर जल्दबाजी में एक चूक हो गई कि गृह के साथ सामान्य प्रशासन भी अगर बीजेपी ले लेती तो इन दोनों विभाग के मंत्री होने पर सम्राट चौधरी और भी शक्तिशाली हो कर निखर सकते थे। यह सच है कि सीएम नीतीश कुमार के कद से वो बड़े तो नहीं होते। लेकिन इतना जरूर होता कि गृह विभाग के द्वारा किए गए हर फैसले पर सामान्य प्रशासन की नकेल का भय नहीं होता। गृह के साथ सामान्य प्रशासन भी बीजेपी के पास होता तो यह एक और एक ग्यारह की तरह दिखता। पर फिलहाल सामान्य प्रशासन के बिना गृह मंत्री सम्राट चौधरी की निर्भरता सीएम के प्रति कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। गृह विभाग लेने के बाद भी बीजेपी अपने को कहां पिछड़ती पा रही है,
यह नीतीश का होमियोपैथिक इलाज है !
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी को सामान्य प्रशासन विभाग न देकर नियंत्रण की चाबी अपने पास रख ली है। सचिव से हर विभाग को अपने नियंत्रण में रखने की रणनीति सीएम नीतीश कुमार की चाणक्य नीति का एक उदाहरण है। बीजेपी या साथी दल के मंत्री यहां तक कि जदयू के भी मंत्री अगर ज्यादा ‘फड़फड़ाने’ लगें तो सीएम नीतीश कुमार सबका होमियोपैथिक इलाज करते रहे हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग की वैल्यू समझिए
अब गृह विभाग को ही लें तो नीतीश कुमार सीधे सीधे गृह विभाग में हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं होंगे। पर जब गृह मंत्री और गृह सचिव में गृह विभाग या कानून व्यवस्था से जुड़े किसी मसले पर विवाद होगा तो ये कहां जायेगा? बेशक यह मुख्यमंत्री के पास ही आएगा। ऐसे में सामान्य प्रशासन विभाग का प्रमुख होने के नाते वो सीधे मुख्य सचिव यानी उस अफसर को बुला लेंगे, जिसे सूबे के सभी IAS एक तरह से रिपोर्ट करते हैं।
सामान्य प्रशासन और अधिकारियों की नकेल
सामान्य प्रशासन अपने पास रख कर नीतीश कुमार ने आईएएस लॉबी को साध लिया। ऐसे में गृह या अन्य विभाग के काम के प्रति भी मुख्यमंत्री के पास कुछ शिकायत होती है और वो इस शिकायत से जब संतुष्ट हो जाते हैं तो नियंत्रण का एक सूत्र वाक्य होता है ‘सचिव महोदय आप रिपोर्ट करेंगे।’ न जाने कितनी ऐसी घटनाएं हैं जब नीतीश सचिव के माध्यम से विभाग के स्थानांतरण की फाइल पर नजर रखते और काफी गड़बड़ी होने पर फाइल ही मंगा लेते। इसलिए गृह मंत्री रहते डीएसपी या दरोगा आदि का ट्रांसफर गृह मंत्री कर सकते हैं पर अगर कोई विवाद आया या फिर कोई इंटेंशन की बात उठी तो पूरे ट्रांसफर पर ही सीएम रोक लगा सकते हैं, क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग के साथ ये अधिकार स्वतः जुड़ जाता है। कुल मिलाकर सम्राट चौधरी इस दफे भी सम्राट न बन पाए। किंग नीतीश ही रहे।







