विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका की दादागिरी और चीन की चालबाजी का नकाब उतार दिया है. कोलकाता में जयशंकर ने कहा कि अमेरिका और चीन ने खेल के नियम बदल दिए हैं. अमेरिका अब देशों के साथ वन-टू-वन डील कर रहा है. वहीं चीन अपने खुद के बनाए नियमों पर चल रहा है. इस वजह से पूरी दुनिया में कन्फ्यूजन का माहौल है. जयशंकर ने साफ किया कि भारत इस हालात में चुप नहीं बैठेगा. हम अपनी नेशनल पावर को बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. भारत अपनी कमजोरियों को कम कर रहा है. अब हम दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. 2014 से पहले ऐसी सोच नहीं थी. लेकिन अब ‘मेक इन इंडिया’ हमारी प्राथमिकता है.
अमेरिका ने बदले नियम, चीन कर रहा अपनी मनमानी
जयशंकर ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से सिस्टम चला रहा था. अब उसने अचानक एंगेजमेंट की शर्तें बदल दी हैं. वह अब ग्रुप्स की जगह देशों से सीधे बात कर रहा है. दूसरी तरफ चीन भी अपनी पुरानी चाल चल रहा है. वह अपने नियमों को और सख्ती से लागू कर रहा है. ऐसे में बाकी देशों को समझ नहीं आ रहा क्या करें. ग्लोबलाइजेशन पर अब दबाव बढ़ गया है. सप्लाई चेन को लेकर भी दुनिया में डर का माहौल है. हर देश अब अपने लिए सेफ रास्ता खोज रहा है. वे अमेरिका और चीन से भी डील कर रहे हैं. साथ ही आपस में भी नए रास्ते तलाश रहे हैं. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का बढ़ता चलन इसी का संकेत है.
भारत का मास्टरप्लान, किसी के दबाव में नहीं आएंगे
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत इन चुनौतियों का सामना कैसे करेगा. हम ऐसी पॉलिसी अपना रहे हैं जिससे देश की ताकत बढ़े. डिप्लोमेसी का मुख्य काम देश का प्रभाव बढ़ाना है. भारत की इकोनॉमी तेजी से ऊपर जा रही है. हम दुनिया में बड़ी जिम्मेदारियां उठाने को तैयार हैं. एक बड़े देश के पास मजबूत इंडस्ट्रियल बेस होना चाहिए. 2014 से पहले पॉलिसी मेकर्स ऐसा नहीं सोचते थे. अब इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा देना हमारी प्रायोरिटी है. हमें अपनी कमजोरियों को हर हाल में कम करना होगा.
मेक इन इंडिया से बदलेगी तस्वीर, इंडस्ट्री को सलाह
पिछले दस सालों में ‘मेक इन इंडिया’ पर बहुत जोर दिया गया है. यह एक नई सोच और बड़े एम्बिशन को दिखाता है. जयशंकर ने कहा कि इंडस्ट्री को भी पूरा साथ देना होगा. उन्हें छोटे फायदों से आगे बढ़कर सोचना चाहिए. हमें डोमेस्टिक सप्लाई चेन को मजबूत करना है. इसके साथ ही ग्लोबल मार्केट में भी अपनी जगह बनानी है. ‘मेक इन इंडिया’ तभी सफल होगा जब हम रिसर्च भी यहां करें. इनोवेशन और डिजाइन भी भारत में ही होना चाहिए. इंडस्ट्री को पार्टनरशिप के लिए आगे आना होगा.
चीन का दबदबा और सप्लाई चेन का संकट
जयशंकर ने ग्लोबल प्रोडक्शन पर भी चिंता जताई है. दुनिया का एक तिहाई प्रोडक्शन अभी चीन में होता है. इससे सप्लाई चेन की रिलायबिलिटी पर सवाल उठते हैं. क्लाइमेट इवेंट्स और युद्ध ने खतरा और बढ़ा दिया है. एनर्जी के मामले में अमेरिका अब बड़ा एक्सपोर्टर बन गया है. वहीं रिन्यूएबल्स की दुनिया में चीन का कब्जा है. ट्रेड में डिमांड और सप्लाई दोनों साइड रिस्क हैं. अब फाइनेंस की दुनिया में भी नए चैलेंज आ गए हैं. ब्लॉकचेन और सैंक्शंस ने हालात पूरी तरह बदल दिए हैं. टैरिफ रेट्स ने मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है.







