बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है। पटना और दिल्ली में नई सरकार में मंत्रियों की संख्या, दलों को मिलने वाले मंत्री पद वगैरह को लेकर मंथन चल रहा है। गृह मंत्रालय हमेशा नीतीश कुमार अपने पास रखते हैं,लेकिन इस बार यह मंत्रालय बीजेपी मांग रही है।
बिहार मे नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
पटना: बिहार में नई सरकार के गठन की कवायद जारी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( एनडीए ) की नई सरकार में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहेंगे, यह तय है। मंत्रिमंडल में एनडीए की किस पार्टी को कितने मंत्री पद मिलेंगे, इसका एक फॉर्मूला तय किया गया है। एनडीए में 6 विधायकों पर एक मंत्री पद का फॉर्मूला तय किया गया है। प्रत्येक घटक दल की मंत्रिमंडल में कितनी भागीदारी होगी, यह तय है। अब सिर्फ सवाल यह है कि किस पार्टी को कौन-कौन से विभाग मिलेंगे और किस पार्टी के किस नेता को मंत्री पद मिलेगा। हालांकि गृह मंत्रालय के बारे में तय है कि यह नीतीश कुमार हमेशा की तरह अपने पास ही रखेंगे। विधानसभा अध्यक्ष को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है कि यह पद बीजेपी को मिलेगा या जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) को।
कानून-व्यवस्था अपने हाथ में रखना चाहते हैं नीतीश
बिहार में जब से एनडीए या महागठबंधन की बहुदलीय सरकारें बन रही हैं, तब से मंत्री पदों को लेकर बहुत खींचतान कभी नहीं हुई। हर बार गठबंधन के दलों के बीच एक फॉर्मूला बना लिया जाता है और उसके मुताबिक प्रत्येक घटक दल को उसकी सत्ता में हिस्सेदारी के हिसाब से मंत्री पद दे दिए जाते रहे हैं। हालांकि साल 2005 से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं, और हर बार गृह मंत्रालय उन्होंने अपने पास ही रखा है। गृह मंत्रालय सबसे अहम मंत्रालय होता है, जिसका कानून-व्यवस्था सहित राज्य के कई मामलों में दखल होता है। मुख्यमंत्री के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद गृह मंत्री का ही होता है। नीतीश कुमार राज्य की कानून व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ही रखना चाहते हैं, इसलिए वे हमेशा गृह मंत्रालय को अपने पास रखते हैं। इस मंत्रालय को अपने पास रखकर शायद वे भ्रष्टाचार पर अंकुश भी अपने पास रखना चाहते हैं।
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