प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान सीतामढ़ी में विशाल जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान को विपक्ष के लिए बड़ा झटका बताया. पीएम मोदी ने कहा कि जंगलराज वालों को 65 वोल्ट का झटका लगा है. पीएम मोदी ने सीतामढ़ी की सभा में कहा, पहले चरण में बिहार ने कमाल कर दिया. जंगलराज वालों को 65 वोल्ट का झटका लग गया. चारों तरफ चर्चा है कि युवाओं ने विकास चुना, एनडीए चुना. बहनों-बेटियों ने एनडीए की रिकॉर्ड जीत पक्की कर दी.” प्रधानमंत्री ने यह संख्या पहले चरण के मतदान प्रतिशत से जोड़ी.
वो विशेष संदेश जो नारे से ज्यादा है!
बता दें कि बीते 6 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर लगभग 65 प्रतिशत मतदान हुआ. इनमें खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों के 61 प्रतिशत मतदान से अधिक लगभग 69 प्रतिशत रही. राजनीति के जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी का ’65 वोल्ट’ वाला बयान इसी मतदान प्रतिशत से जुड़ा है. प्रधानमंत्री ने 65 प्रतिशत मतदान को अपने पक्ष में बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया और विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि ‘उन्हें अब 65 वोल्ट का झटका लग गया है.’
महिला वर्ग पर केंद्रित सियासी संदेश
बिहार में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं और पहले चरण 6 नवंबर को खत्म हुआ. चुनाव आयोग के मुताबिक, 121 सीटों पर 65.08 प्रतिशत वोट पड़े. यह बिहार के इतिहास में सबसे ज्यादा मतदान है. 2020 में पहले चरण में 57.29 प्रतिशत और 2024 लोकसभा चुनाव में 56.28 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. इस बार महिलाओं की भागीदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर रही. एनडीए का मानना है कि महिला और लाभार्थी वर्ग (जिन्होंने उज्ज्वला, आवास, जनधन और जीविका जैसी योजनाओं का लाभ पाया) का वोट बैंक इस बार भी उनके पक्ष में गया है.
हाल में ही 1 करोड़ 41 लाख जीविका दीदियों के खातों में 10 हजार रुपये की रकम दिए जाने के बाद महिला मतदाताओं के मत प्रतिशत में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी को नीतीश सरकार के इस कदम जोड़ा गया है. भाजपा की चुनावी टीम ने पहले चरण के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि सीमांचल, तिरहुत और मगध के कुछ जिलों में एनडीए की पकड़ मजबूत हुई है. इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘विपक्ष को झटका लगा है’, ताकि यह संदेश पहले ही जनता तक पहुंच जाए कि हवा एनडीए के पक्ष में बह रही है. पीएम मोदी का यह संदेश उस धारणा को मजबूत करने की कोशिश है कि पहले चरण में एनडीए की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है और जनता ने सरकार के कामकाज पर भरोसा जताया है.
मतदान प्रतिशत का राजनीतिक संकेत
बिहार के चुनावी इतिहास में मतदान प्रतिशत को लेकर हमेशा राजनीतिक व्याख्या होती रही है.बिहार चुनाव में महिला मतदाता हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे हैं. 2010 और 2020 के चुनाव में भी महिलाओं का समर्थन नीतीश कुमार के पक्ष में निर्णायक साबित हुआ था. 2015 में भी जब 57 प्रतिशत वोट पड़े थे तो कहा गया था कि महागठबंधन को इसका लाभ मिला. इस बार भी पहले चरण में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही. इस बार जब 65 प्रतिशत मतदान हुआ तो भाजपा और जदयू इसे जनता की ‘विकास के प्रति आस्था’ के रूप में देख रही हैं. पीएम मोदी का यह बयान इसी रणनीति का हिस्सा है है और मतदान प्रतिशत को राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश है.





