पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने पटना में बड़ा बयान दिया है. दरअसल पटना पहुंचे सचिन पायलट ने अपने बयान से न सिर्फ आरजेडी बल्कि तेजस्वी यादव को भी बड़ा झटका दिया है. सचिन पायलट ने बिहार में महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कौन किस पद पर बैठेगा यह चुनाव में जीत के बाद तय होगा. वहीं बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने सचिन पायलट के इस बयान का समर्थन किया है. सचिन पायलट ने कहा कि जब हमारी सरकार बनेगी तब नौजवानों को बड़े पैमाने पर नौकरी दी जाएगी, निवेश पर ध्यान दिया जाएगा.
बता दें, दो दिन पहले ही पटना में ‘मुसहर-भुइयां महारैली सह संवाद कार्यक्रम’ में साफ तौर पर खुद को सीएम उम्मदीवार बताया था. तेजस्वी यादव ने कहा कि जब राजद की सरकार बनेगी और जिस दिन सीएम बनेंगे. तेजस्वी आपको बसाने का काम करेगा. आपको रोजगार देने का काम करेगा. अब ऐसे में तेजस्वी यादव और आरजेडी को कांग्रेस के रूख से बड़ा झटका लग सकता है. बता दें, इससे पहले भी भागलपुर विधायक अजीत शर्मा बिहार कांग्रेस के कई नेता बोल चुके हैं कि बिहार में महागठबंधन का सीएम उम्मीदवार कौन होगा यह बाद में तय किया जाएगा.
वहीं इस मामले को लेकर आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि 2020 में सबके चेहरे तेजस्वी यादव थे. 2025 में तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री का चेहरा हैं कहीं किसी को कन्फ्यूजन में नहीं रहना चाहिए. कांग्रेस में क्या बोल रहा है नहीं बोल रहा है ? आलाकमान और शीर्ष नेतृत्व सबको पता है तेजस्वी यादव ड्राइविंग सीट पर है. तेजस्वी यादव ड्राइविंग सीट पर बैठेंगे, क्या कौन बोल रहा है कोई फर्क नहीं पड़ता.
वहीं पटना पहुंचे में सचिन पायलट ने ‘पलायन रोको नौकरी दो’ यात्रा को लेकर कहा कि एक मुद्दे को लेकर 26 दिनों तक यात्रा हुई. बिहार के युवाओं को पलायन करने के लिए जो मजबूर किया जा रहा है, उसको रोकने के लिए यात्रा हुई. ऐसा नहीं है कि दूसरे प्रदेशों से लोग दिल्ली मुंबई नहीं जाते हैं. लेकिन, बिहार से लोग पलायन क्यों करते हैं, इस पर हमें ध्यान देना होगा. पूरे देश में आज बिहार के लोग जाकर मजदूरी का काम करते हैं, लेबर का काम करते हैं, छोटे-मोटे रोजगार ढूंढते हैं. यह स्थिति एक दिन में नहीं बनी, सालों-साल की परिस्थितियां इसके लिए जिम्मेदार हैं. जो लोग सत्ता में बैठे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में अगर नीतीश कुमार को मोदी जी को समर्थन देना ही था, तो बिहार के नौजवानों के लिए 10-20 लाख नौकरियां मांग लेते.







