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अब डराने लगा है बिहार का मौसम , नेपाल ने छोड़ा पानी , बाढ़ का खतरा बढ़ा, कोसी-गंडक-महानंदा समेत कई नदियों में प्रचंड उफान

UB India News by UB India News
July 10, 2024
in खास खबर, पटना, पर्यावरण
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अब डराने लगा है बिहार का मौसम , नेपाल ने छोड़ा पानी , बाढ़ का खतरा बढ़ा, कोसी-गंडक-महानंदा समेत कई नदियों में प्रचंड उफान
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बिहार में अब धीरे-धीरे मौसम डराने लगा है. दरअसल बिहार के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगी है. वहीं अधिकांश जिलों में वज्रपात के कारण लोगों की जान जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार बिहार के अलग-अलग जिलों में पिछले 24 घंटे में वज्रपात के कारण 10 लोगों की मौत हो गयी है. वहीं मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए बिहार के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.

मौसम विभाग ने बिहार के अररिया, कटिहार, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मधुबनी समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी और पश्चिम चंपारण जिले के अधिकांश क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया. वहीं मौसम विभाग व  आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मेघगर्जन और बारिश के दौरान घरों से बाहर नहीं निकलें. वहीं बिहार के कई जिलों में दो-तीन दिन से लगातार हो रही बारिश के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. बिहार की कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर हो गई है.

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मधेपुरा, पूर्णिया, भागलपुर में भारी बारिश की संभावना

9 जुलाई को पश्चिम चंपारण, कैमूर और रोहतास में भी बारिश हो सकती है. वहीं 9 से 10 जुलाई के बीच सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर में भारी बारिश की संभावना है. अन्य जिलों में हल्के मध्म दर्जे की बारिश होगी. वहीं मौसम विभाग ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, किशनगंज, अररिया और औरंगाबाद जिले के एक या दो स्थानों और तराई जिले के एक या दो स्थानों में भारी बारिश होने की संभावना व्यक्ति की है.

बिहार में वज्रपात के कारण 10 लोगों की मौत हुई है. बिहार में मुख्यमंत्री कार्यालय ने रविवार को यह जानकारी दी. सीएम नीतीश कुमार ने आकाशीय बिजली की चपेट में आने के कारण हुई मौतों पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है. CMO के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से नालंदा में दो, वैशाली, भागलपुर, सहरसा, रोहतास, सारण, जमुई, भोजपुर और गोपालगंज में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है.

नेपाल में हो रही बारिश से बिहार में त्राहिमाम मचना शुरू हो गया है। आलम ये है कि इंडिया-नेपाल बॉर्डर के मेन रोड पर तीन फीट तक बाढ़ का पानी बह रहा है। खेतों में भी दो से तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। कई गावों में घर से बाहर निकलना मुश्किल है। अधिकारियों की टीम मौजूदा हालात पर नजर बनाई हुई है। अलग-अलग जिलों में हाहाकार मचा हुआ है। नेपाल में भारी बारिश के बाद गोपालगंज के वाल्मीकि नगर बराज से रविवार को साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। अत्यधिक पानी को देखते हुए गोपालगंज डीएम मकसूद आलम ने जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। जिले के सभी बाढ़ संभावित क्षेत्रों के बीडीओ और सीओ को निर्देश दिया है की वे तटबंधों के अंदर बसे गांवों से लोगों को बाहर आने के लिए माइकिंग के माध्यम से सूचित करे।

बिहार में कोसी, गंडक, महानंदा और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं. शनिवार शाम करीब छह बज सुपौल जिला के बीरपुर बराज पर तीन लाख तीन हजार 860 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. यह इस साल का अधिकतम डिस्चार्ज है. अधिक पानी होने के कारण कोसी बराज के 39 फाटक खोल दिये गये हैं. इसके साथ ही वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी से करीब दो लाख 18 हजार क्यूसेक पानी शनिवार दोपहर दो बजे छोड़ा गया. यह इस साल का अधिकतम डिस्चार्ज था. वहीं महानंदा नदी का जलस्तर भी किशनगंज जिले में खतरे के निशान से ऊपर था. इसमें रविवार तक किशनगंज सहित पूर्णिया और कटिहार जिले में बढ़ोतरी की संभावना है.

सुपौल में बाढ़ का संकट गहराया

नेपाल में भारी बारिश के कारण कोसी नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है. इससे सुपौल जिले में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. शनिवार शाम को कोसी बराज स्थित कंट्रोल रूम के अनुसार, कोसी नदी का डिस्चार्ज इस वर्ष पहली बार 02 लाख 82 हजार 680 क्यूसेक पार कर गया. इसके कारण बराज के 36 फाटकों को खोलना पड़ा. बराह क्षेत्र में भी जल स्तर 01 लाख 83 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है. बालू की अधिक मात्रा के कारण दोनों नहरों को बंद कर फ्लशिंग की जा रही है.

बेतिया में भी बाढ़ के हालात बने

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से अधिक समय से भारी बारिश के कारण पश्चिमी चंपारण जिले की अधिकतर पहाड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहते हुए उफान के कगार पर हैं और जिले में बाढ़ के हालात बनने लगे हैं. मौजूदा स्थिति में तो कई नदियों का पानी सरेह के खेतों में फैलना शुरू हुआ है और एक दो दिन और बारिश हुई तो ऐसा माना जा रहा है कि जिले में चारों ओर बाढ़ के हालात बन जायेंगे.

मधुबनी में भी हालत खराब
बता दें कि नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश से कोसी नदी उफना गई है। जिससे पूर्वी और कोसी तटबंध के इलाके में रह रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। कोसी नदी का जलस्तर इस साल का सबसे अधिक डिस्चार्ज रिकॉर्ड किया गया है। रविवार की सुबह 6:00 बजे 3 लाख 42 हजार 65 क्यूसेक पानी कोसी बराज पर डिस्चार्ज किया गया। वहीं सुबह 8 बजे 3 लाख 49 हजार 400 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। इधर, कोसी तटबंध में बढ़े जलस्तर से मधुबनी जिले के तटबंध मे भीतर रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है। यहां महिपतिया, गढ़गांव, ड़ाराह, द्वालख पंचायत के दर्जनों गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है।

सीतामढ़ी में भी हालत खराब
सीतामढ़ी और शिवहर जिले में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश की वजह से जिले की नदियों का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। इससे जिले में बाढ़ की आशंका बन गई है। बागमती नदी का जलस्तर सोनाखान में खतरे के निशान 68.80 मी से 89 सेमी ऊपर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से सुप्पी के जमला गांव के निकट नदी सरेह की जमीन का कटाव कर रही है। बागमती नदी में वृद्धि के बावजूद सभी जगह खतरे के निशान से नीचे है। सोनाखान में बागमती स्थिर बनी हुई है। वहीं, ढेंग में बागमती 29 सेमी ऊपर बह रही है। डूबाधार में बागमती 37 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं चंदौली में 11 सेमी ऊपर तो कटौझा में 50 मीटर ऊपर बह रही है। इसके अलावा ढेंग में बागमती नदी का जलस्तर घट रहा है। वहीं, डूबाघाट, चंदौली और कतौझा बागमती में जलस्तर बढ़ रहा है। बागमती के जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

बेतिया के योगापटट्टी प्रखंड में गंडक में आई बाढ़ से 6 से ज्यादा गांव के लोग बाढ़ में घिरे हैं। करीब 300 से ज्यादा परिवार हैं, जो फंसे हैं। हालांकि प्रशासन ने 450 परिवारों का रेस्क्यू किया है।

इधर बगहा में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित SSB (सशस्त्र सीमा बल) के झंडू टोला ओपी कैंप जलमग्न है। नदी का पानी एसएसबी कैंप के साथ यहां के गांव में घुस गया है, जिससे पूरे इलाके में पानी भर गया है।

मुंगेर के सदर प्रखंड में गंगा की तेज धार के कारण टिकारमपुर और खगड़िया के बीच गंगा पर बना चचरी पुल टूट गया। इससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। नाव के सहारे लोग आना-जाना कर रहे हैं।

अगले 7 दिनों तक कई जिलों में बारिश की संभावना

मौसम विज्ञान केंद्र ने आज प्रदेश के 31 जिलों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि मानसून टर्फ लाइन बिहार और उत्तर प्रदेश के ऊपर से गुजर रहा है। इसके कारण प्रदेश में अगले 7 दिनों तक कई जिलों में बारिश होने की संभावना है।

CM ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में नदियों के बढ़ते जलस्तर का हवाई सर्वे किया था। उन्होंने गंडक बराज का भी निरीक्षण किया। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सीएम नीतीश ने सभी विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया है।

24 घंटे अलर्ट पर हैं अधिकारी

जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति बन गई है। गंडक नदी में उफान है। 2004 के बाद गंडक बराज से पानी छोड़ा गया है। इसलिए तटबंध के आस-पास वाले गांव में पानी घुस गया है। बिहार के इंजीनियर और अधिकारी चौबीस घंटे के अलर्ट पर हैं। किसी भी आकस्मिक घटना से निपटने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से नेपाल में भारी बारिश हो रही है। इससे गंडक के तटबंध और कोसी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। तीन-चार दिनों में जलस्तर इतनी बढ़ी है, जो पिछले 15 से 20 सालों में नहीं बढ़ी थी।

बाढ़ के बढ़ते खतरा को देखते हुए सीएम नीतीश कुमार सोमवार को गंडक बराज का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
बाढ़ के बढ़ते खतरा को देखते हुए सीएम नीतीश कुमार सोमवार को गंडक बराज का निरीक्षण करने पहुंचे थे।

बेतिया में 300 परिवार बाढ़ में फंसे, 450 को निकाला गया

पश्चिम चंपारण जिले के योगापटट्टी प्रखंड के दियारा इलाके में शनिवार की रात आई बाढ़ में जलरपुल खुटवनिया और सिसवा मंगलपुर पंचायत के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के लोग फंसे गए। प्रशासन की ओर से 450 से ज्यादा परिवारों का रेस्क्यू किया गया है।

हालांकि अभी जरलपुर-खुटवनिया पंचायत के गजना, बैसिया, साहीबाजार,सुरेश चौधरी के टोला आदि गांव के 300 से ज्यादा परिवार बाढ़ के पानी में फंसे हुए है। 48 घंटे से उनके घर के चूल्हे नहीं जले हैं। बिना खाए-पीए वे अपने परिवार के साथ अपने-अपने घरों की छप्पर पर रह रहे हैं।

अंचल अधिकारी प्रज्ञा नयनम का कहना है कि फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए नाव जाने का रास्ता नहीं है। जिसके कारण लोग नहीं निकाल पा रहे है।

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