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अयोध्या मंदिर में रामलला की मूर्ति का हुआ चयन, मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा तैयार की मूर्ति होगी स्थापित

UB India News by UB India News
January 3, 2024
in अध्यात्म
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अयोध्या मंदिर में रामलला की मूर्ति का हुआ चयन, मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा तैयार की मूर्ति होगी स्थापित
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रामलला की तीन मूर्तियों में से एक मूर्ति का चयन हो गया है। कर्नाटक के जानेमाने मूर्तिकार अरुण योगीराज की मूर्ति का चयन हुआ है। प्रहलाद जोशी ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी दी है।

केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर लिखी यह बात
प्रह्लाद जोशी ने एक्स पर लिखा, ‘जहां राम हैं, वहां हनुमान हैं। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन हो गया है। हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव अरुण योगीराज के द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी। यह राम और हनुमान के अटूट रिश्ते का एक और उदाहरण है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हनुमान की भूमि कर्नाटक से रामलला के लिए यह एक महत्वपूर्ण सेवा है।’

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अचल मूर्ति के लिए मंगाए गए थे 12 पत्थर
रामलला की अचल मूर्ति निर्माण के लिए नेपाल की गंडकी नदी समेत कर्नाटक, राजस्थान व उड़ीसा के उच्च गुणवत्ता वाले 12 पत्थर ट्रस्ट ने मंगाए थे। इन सभी पत्थरों को परखा गया तो राजस्थान व कर्नाटक की शिला ही मूर्ति निर्माण के लायक मिली।

इसलिए हुआ था कर्नाटक व राजस्थान की शिला का चयन
कर्नाटक की श्याम शिला व राजस्थान के मकराना के संगमरमर शिला को इनकी विशेष खासियतों के चलते चुना गया। मकराना की शिला बहुत कठोर होती है और नक्काशी के लिए सर्वोत्तम होती है। इसकी चमक सदियों तक रहती है। वहीं कर्नाटक की श्याम शिला पर नक्काशी आसानी से होती है। ये शिलाएं जलरोधी होती हैं, इनकी आयु लंबी होती है।

मूर्ति निर्माण के तय हुए थे ये मानक

  • मूर्ति की कुल ऊंचाई 52 इंच हो
  • श्रीराम की भुजाएं घुटनों तक लंबी हों
  • -मस्तक सुंदर, आंखें बड़ी और ललाट भव्य हों
  • कमल दल पर खड़ी मुद्रा में मूर्ति
  • हाथ में तीर व धनुष
  • मूर्ति में पांच साल के बच्चे की बाल सुलभ कोमलता झलके

सोशल मीडिया पर योगीराज की काफी फैन फॉलोइंग

योगीराज एक जाना-माना नाम हैं और सोशल मीडिया पर उनकी काफी फैन फॉलोइंग है। प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे 37 वर्षीय अरुण योगीराज मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए भी कार्य कर चुके हैं। एमबीए की पढ़ाई कर चुके योगीराज पांचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। एमबीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में भी काम किया, लेकिन 2008 में मूर्तिकार बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार सहित कई हस्तियों की मूर्ति बनाई 
केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण के अलावा योगीराज ने मैसूरु में महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार की 14.5 फुट की सफेद संगमरमर की प्रतिमा, महाराजा श्री कृष्णराज वाडियार-IV और स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सफेद संगमरमर की प्रतिमा भी बनाई है। इंडिया गेट पर लगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा भी अरुण ने ही तराशी है।

कौन हैं अरुण योगीराज, जिनकी बनाई रामलला की मूर्ति राम मंदिर के गर्भगृह में होगी स्थापित

 

अरुणराज योगीराज की पत्नी बोलीं- समझ नहीं आ रहा कैसे प्रतिक्रिया दूं
इस पर अरुणराज की पत्नी विजयतरुणी ने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं इस पर कैसे प्रतिक्रिया दूं. मुझे अपने पति से किसी तरह की जानकारी नहीं मिली. उन्हें भी इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. मेरे पति इस खबर के ऐलान का आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं.

जानें कौन हैं अरुण योगीराज
अरुण योगीराज कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं
उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से MBA किया है
वे सुप्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज के बेटे हैं
उनका पांच पीढ़ियों से मूर्ति बनाने का काम है.
उन्होंने सुभाष चंद्र बोस की 30 फ़ीट ऊंची प्रतिमा बनाई है
नेताजी की ये प्रतिमा अमर जवान ज्योति पर मौजूद है.
केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा बनाई है
आदि शंकराचार्य की ये प्रतिमा 12 फ़ीट ऊंची है
उन्होंने रामकृष्ण परमहंस की प्रतिमा का भी निर्माण किया था

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जानकारी देने के लिए आज से घर-घर अक्षत निमंत्रण देने का काम शुरू
उधर, राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जानकारी देने के लिए आज से घर-घर अक्षत निमंत्रण देने का काम शुरू हुआ है. ये अभियान VHP ने पूरे देशभर में शुरू किया. महाराष्ट्र में भी “सबके राम” से इस अभियान की शुरुआत हुई. ये अभियान अगले 15 दिन तक चलेगा. क्या आम और क्या खास हर समाज को निमंत्रण दिया जा रहा है. बता दें कि पीएम मोदी ने भी कुछ दिनों पहले लोगों से अपील की थी कि वे 22 जनवरी को राम मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह के दिन दीपावली के रूप में अपने घरों में विशेष दीये जलाएं.

कौन थे राजा इक्क्षवाकु, जिनके नाम पर शुरू हुआ भगवान राम का वंश

अयोध्या सज रही है. राम मंदिर में आखिरी चरण के कामों को पूरा किया जा रहा है. ये नगरी राम की नगरी कहलाती है. इसी नगरी में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने जा रही है. क्या आपको मालूम है कि राम जिस इक्ष्वाकु वंश के ताल्लुक रखते थे, उस वंश की शुरुआत किसने की थी. कौन इस वंश के पहले राजा थे.

इक्ष्वाकु प्राचीन भारत के इक्ष्वाकु वंश के पहले राजा थे. ‘इक्ष्वाकु’ शब्द ‘इक्षु’ से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ ‘ईख’ होता है. माना जाता है कि ईख पैदा करने वाली धरती पर इस वंश की शुरुआत हुई, लिहाजा इसे इक्ष्वाकु कहा जाने लगा.

मनु की 10 संतानों में एक
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इक्ष्वाकु मनु के पुत्र थे. कश्यप और आदिति से विवश्वान पैदा हुए और फिर उनके पुत्र के रूप में मनु का जन्म हुआ. मनु और श्रृद्धा की 10 संतानें थीं, जिसमें एक इक्ष्वाकु थे.

इक्ष्वाकु ने बसाई अयोध्या
इक्ष्वाकु राजा बने. उन्हें महात्मा और तपस्वी महाराज कहा गया. इक्ष्वाकु के बाद उनके राजवंश के सम्राटों को सूर्यवंशी भी कहा गया. इक्ष्वाकु कोसल राज्य के महाराजा थे. इस राज्य की राजधानी अयोध्या थी. उनके 100 पुत्र बताए जाते हैं. इक्ष्वाकु के एक दूसरे पुत्र निमि ने मिथिला राजकुल स्थापित किया

किन ग्रंथों में आता है उनका नाम
प्राचीन ग्रंथ महाभारत के भीष्म पर्व के नौंवें अध्याय में महाराज इक्ष्वाकु का नाम आता है. ऋगवेद में भी उनका नाम आया है. चूंकि इस राजवंश से निकले वशंज देशभर में फैल गए, लिहाजा इनका रिश्ता देश के कई राजवंशों से लिया जाता है. दक्षिण भारत का “आंध्र इक्ष्वाकु राजवंश” (300-400 ई.) भी अपने राजवंश को महाराजा इक्ष्वाकु से संयोजित करता था.

ये रघुवंश भी कहलाता है
इक्ष्वाकु वंश को रघुवंश भी कहा जाता है जिसके वंशज रघुवंशी हैं जो मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में मुख्यतौर पर पाए जाते हैं. इक्ष्वाकु वंश के राजा पृथु, मांधाता, दिलीप, सगर, भगीरथ, रघु, हरिश्चंद्र जैसे प्रतापी लोग हुए.

एक कहानी ये भी
विष्णु पुराण में कहा गया है कि जब मनु को छींक आई तो इक्ष्वाकु उनकी नासिका से निकले. उनके 100 पुत्र थे, जिनमें से तीन सबसे प्रतिष्ठित थे विकुक्षि, निमि और दण्ड. उनके पचास बेटे उत्तरी देशों के राजा थे, जबकि उनमें 48 दक्षिण के राजकुमार थे.

राम 81वें वंशज
दशरथ उनके 80वीं पीढ़ी में पैदा हुए थे तो राम 81वें वंशज थे. उत्तर भारत के तमाम हिस्सों में जैसे कोशल, कपिलवस्तु, वैशाली और मिथिला आदि में अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश के शासकों ने ही राज्य कायम किए थे. जहां तक मनु द्वारा स्थापित अयोध्या का प्रश्न है, हमें वाल्मीकि कृत रामायण के बालकाण्ड में उल्लेख मिलता है कि वह 12 योजन-लम्बी और 3 योजन चौड़ी थी.

 

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