सीएम नीतीश कुमार और पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की मुलाकात के बाद बिहार की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. दरअसल, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात करने बुधवार को सीएम नीतीश कुमार पहुंचे हुए थे. इस दौरान राज्यपाल हाउस बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी भी पहुंच गए. इस मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति को लेकर कई तरह के कयास भी लगाने शुरू हो गए हैं. इसे 2024 लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. वहीं, इससे सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या नीतीश कुमार फिर से नई खिचड़ी बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को अचानक राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलने राजभवन पहुंच गए। हालांकि यह सूचना नहीं मिल पाई है कि नीतीश कुमार राज्यपाल से मिलने क्यों गए हैं। सूत्रों का कहना है कि बिहार विधान मंडल का मानसून सत्र को लेकर सीएम राज्यपाल से मिलने पहुंचे हैं। बता दें कि बिहार में 10 जुलाई से बिहार विधान मडल का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इस बार का मानसून सत्र केवल 5 दिनों का चलाने का प्रस्ताव है। बताया जा रहा है कि इन्हीं पांच दिनों में राज्यपाल का अभिभाषण भी होना है। संभवत: राज्यपाल सदन के पहले दिन अभिभाषण दे सकते हैं।
हाल ही में महागठबंधन से अलग होने की चिट्ठी सौंपने के लिए पूर्व सीएम जीतन राम मांझी राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान मांझी और राज्यपाल के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई थी।
कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें
सीएम नीतीश के राजभवन जाने पर यह भी अटकलें हैं कि क्या वह जल्द ही कैबिनेट का विस्तार करने वाले हैं। पिछले दिनों विपक्षी एकता की बैठक के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार कैबिनेट में कांग्रेस के दो नेताओं को शामिल करने की बात कही थी।
बताया जा रहा है कि राजभवन पहुंचने पर सीएम नीतीश ने यहां राजेंद्र मंडपम में हो रहे निर्माण कार्य का भी जायजा लिया है। राजभवन में निर्माण कार्य का जिम्मा राज्य सरकार के हिस्से होता है इस लिहाजा सीएम खुद इसका जायजा लेने पहुंचे हैं।
सुशील मोदी ने बताया औपचारिक मुलाकात
इस मुलाकात को लेकर सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्यपाल हाउस संयोग है कि मुख्यमंत्री के आने के बाद मैं पहुंचा. एक औपचारिक मुलाकात थी. बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से पुरानी जान पहचान है. कॉलेज के समय एक साथ हम लोगों ने विद्यार्थी परिषद में काम किया. आगे उन्होंने राज्यपाल की तारीफ करते हुए कहा कि वो बहुत ही बेहतरीन तरीके से विश्वविद्यालय को चला रहे हैं. हायर एजुकेशन पर ध्यान दे रहे हैं. हायर एजुकेशन में लगातार वो सुधार करने में लगे हुए हैं. उनको इसलिए बधाई भी देनी थी.
‘यह मुलाकात एकमात्र संयोग था’
पूर्व डिप्टी सीएम ने सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात पर कहा कि यह एकमात्र संयोग था कि मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद मैं पहुंचा, लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं निकालना चाहिए. वही, शिक्षक भर्ती में आवासीय नीति खत्म करने पर उन्होंने कहा कि यह सब बिहारियों का अपमान है. शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि भौतिकी, रसायन और गणित के अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं तो फिर बिना परीक्षा दिए यह कैसे पता चल गया? बाहर के लोग यहां आकर पढ़ाएंगे तो बिहार के लोग कहां जाएंगे?
सरकार की नीयत नियुक्ति करने की नहीं है- सुशील मोदी
बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए. इसे तुरंत वापस लेना चाहिए. शिक्षक तो तृतीय श्रेणी के कर्मी माने जाते हैं तो वर्ग तीन और चार में भी बाहर के अभ्यर्थी लाएंगे तब तो बेकार ही बिहार के अंदर इतने कॉलेज चल रहे हैं. सरकार की मंशा बहाली करने की नहीं है. इस बहाली से सरकार को 11 हजार करोड़ अतिरिक्त भार आएगा. सरकार के पास तो वेतन देने के लिए पैसे नहीं है. सरकार चाहती है कि यह मामला कोर्ट में जाए और फंस जाए. सरकार की नीयत नियुक्ति करने की नहीं है.







