राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने थोड़ी राहत प्रदान की है. मौसम विभाग इस बारिश को प्री मॉनसून बारिश मानकर चल रहा है. हालांकि अभी भी लोगों को मॉनसून का बेसब्री के साथ इंतजार है. इस बीच मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि मॉनसून बिहार और झारखंड तक पहुंच गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ( IMD ) के अनुसार बिहार में आज यानी मंगलवार को मॉनसूनी बारिश होने की संभावना है. यही नहीं आईएमडी का कहना है कि मॉनसून अगले 2-3 दिनों के अंदर पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है.
राजस्थान में पहली बार मानसून से पहले बाढ़ के हालात हैं। चार दिन में चक्रवात बिपरजॉय कई इलाकों में इतना बरसा कि मानसून सीजन का कोटा पूरा हो गया। बाड़मेर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। बीते 24 घंटे में पाली के मुठाना में 530 मिमी यानी 21.3 इंच बारिश हो चुकी है।
पाली में भी 12 इंच बारिश हुई। बूंदी, अजमेर, भीलवाड़ा के सैकड़ों गावों में बिजली गुल है। अब तक राज्य में 8 लोगों की मौत हो चुकी है। अजमेर और जोधपुर में बारिश का 100 साल का रिकॉर्ड टूटा गया। मौसम विभाग ने कोटा, बारां-सवाई माधेपुर में मंगलवार के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
अजमेर में 105 साल का तो जोधपुर में 12 साल का रिकॉर्ड टूटा
चक्रवात से अजमेर में बारिश का 105 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया। यहां 17 जून 1917 में 119.4 मिमी बरसात एक ही दिन में हुई थी, जो अब तक जून में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड था, जो कल टूट गया। अजमेर में कल (18 जून की सुबह 8:30 से 19 जून 8:30) 24 घंटे के दौरान 131.8 मिमी बरसात दर्ज हुई।
अजमेर में बारिश का दौर यहीं नहीं थमा कल भी सुबह 8:30 बजे से लेकर शाम 6 बजे 100 मिमी बरसात दर्ज हुई है। इसी तरह, जोधपुर में भी 12 साल का रिकॉर्ड टूटा है। यहां 17 जून को 91.3 मिमी पानी गिरा, जबकि इससे पहले 28 जून 2016 में करीब 74 मिमी बरसात हुई थी।
वहीं बिहार के भोजपुर जिले में पिछले 24 घंटों में लू लगने से पांच लोगों की मौत हो गयी है। यह जानकारी भोजपुर जिला प्रशासन ने सोमवार को दी। इस बीच बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार को राज्य भर के जिलों से भीषण गर्मी के कारण हुई किसी भी मौत की सूचना देने को कहा है। वहीं बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री शाहनवाज आलम ने कहा, ‘पूरा राज्य इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सभी जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में तीव्र लू की स्थिति के कारण हुई किसी भी मौत की सूचना दें। हमने जिला अधिकारियों को यह भी सलाह दी है कि वे अपने-अपने जिलों में स्थिति की निगरानी करें।’
वहीं भोजपुर जिला प्रशासन के आपदा प्रकोष्ठ ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, ‘पांच शवों के पोस्टमार्टम में ‘हीट स्ट्रोक’ (लू लगने से) मौत की पुष्टि हुई है। जिले के कुछ हिस्सों में दो और मौतें हुई हैं लेकिन उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।’ इन दिनों पूरा बिहार भीषण गर्मी की चपेट में है जिसने 11 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सोमवार को राज्य के कई स्थानों पर पारा 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। औरंगाबाद जिले में अधिकतम तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने बताया कि झारखंड में 21 से 23 जून के बीच मॉनसूनी बारिश होने की संभावना बन रही है. जबकि बिहार में अभी मॉनसून मालदा और फारबिसगंज के करीब पहुंचा है. मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर पूर्व बिहार के चारों तरफ चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र बना हुआ है. जिसकी वजह से सीमांचल की दिशा में मॉनसूनी गतिविधियां तेज हैं. मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की राजधानी पटना और दक्षिण बिहार में 21, 22 और 23 जून को तेज बारिश होने के आसार हैं. आपको बता दें कि इस बार मॉनसून काफी विलंब से हैं. अमूमन एक जून को केरल तट पर पहुंचने वाले मॉनसून ने इस बार 8 जून की अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. जबकि अरब सागर में उठे चक्रवाती तूफान बिपरजॉय की वजह से भी मॉनसून की रफ्तार धीमी हुई है.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मॉनसून के सामान्यतः 27 जून को पहुंचता है. मौसम विभाग ने बताया कि अगर मॉनसून आज यानी मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो जाता है तो दिल्ली में निर्धारित समय पर उसके पहुंचने की संभावना प्रबल हो जाएगी.
पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने जो पूर्वानुमान जारी किया है उसके मुताबिक अगले 24 घंटे में पूरे बिहार में बारिश शुरू होने की संभावना है। वहीं पटना में मॉनसून के 21 जून तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले सोमवार को राजधानी पटना के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। इस महीने के अंत तक मॉनसून के पूरे राज्य में छा जाने की उम्मीद जताई जा रही है। चक्रवाती तूफान बिपरजॉय के चलते मॉनसून पूर्णिया के आसपास ही ठहर गया था। लेकिन अब इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।







