इस वक्त गुजरात पर तूफान की तबाही का खतरा मंडरा रहा है। ये तूफान अरब सागर से गुजरात तट की तरफ बढ़ रहा है और गुरुवार शाम तक तट से होकर गुज़रेगा। इसके कारण पूरे गुजरात के समुद्री तट, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक से लेकर केरल तक सभी राज्यों में तैयारियां ज़ोरों पर है। सरकार इस खतरे से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ NDRF, SDRF, नौसेना, वायु सेना, तटरक्षक दल, थल सेना को भी सतर्क रखा गया है। गुजरात के तटवर्ती इलाकों में सागर से 10 किलोमीटर तक के इलाके को खाली करवा लिया गया है। 34 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है। कांडला, मुंद्रा, ओखा, जखुआ बंदरगाहों पर हजारों कंटेनर्स को फिक्स कर दिया गया है, जिससे तूफानी हवाओं के कारण उन्हें कोई नुकसान न हो। इसी तरह जो बड़े जहाज तट पर थे, उन्हें समुद्र में भेजा गया है जिससे तूफान की वजह से जहाजों को तट से टकराने का खतरा न हो। मौसम विभाग का कहना है कि बिपरजॉय नाम का तूफान जब तट तक पहुंचेगा, तो 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। गुजरात के तटवर्ती जिलों में अभी से तेज बारिश शुरु हो गई है। पच्चीस साल पहले 1998 में गुजरात के इसी इलाके में भयानक तूफान आया था, सौ से ज्यादा लोगों की जानें गई थी, भारी तबाही हुई थी, और अब जिस बिपरजॉय तूफान का डर है, वह 25 साल पहले आए तूफान से ज्यादा खतरनाक है। गृह मंत्री अमित शाह ने भविष्य की तरफ जो इशारा किया, वो वाकई डराने वाला है। अब प्राकृतिक आपदाओं की संख्या बढ़ रही है, और उसकी तीव्रता भी बढ़ रही है। अब से पहले तक जितने तूफान आते थे, उनका असर दो से पांच दिन तक रहता था। बिपरजॉय तूफान अरब सागर से 6 दिन पहले उठा था और इसका असर 10 दिनों तक रह सकता है। ये सबसे लंबे समय तक रहने वाला तूफान है। IIT मद्रास की स्टडी में ये सामने आया है कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव में अरब सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान लगातार और गंभीर होते जा रहे हैं। पिछले चार दशकों में अरब सागर में तूफान के ड्यूरेशन में 260% का इजाफा देखा गया। सिर्फ तूफान के मामलों में नहीं, बेमौसम बारिश, बेमौसम बर्फबारी, तेज़ गर्मी, सूखा, इस तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि विशाखापट्टनम में सौ साल में पहली बार तापमान 43 डिग्री से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में इस बार बर्फ की चादर 45 फीट तक जम चुकी है, जबकि जून के महीने में आम तौर पर सिर्फ तीस फीट तक बर्फ रहती थी। तीसरी बात, जब तटवर्ती इलाकों में तूफान की आशंका है, उसी वक्त दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, आन्ध्र, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ और उड़ीसा में हीटवेव का एलर्ट जारी किया गया है, जबकि हिमाचल और उत्तरखंड के कई इलाकों में बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। यानी जून के महीने में देश में बारिश, बर्फवारी और हीटवेव सब साथ साथ हो रहे हैं। ये ग्लोबल वॉर्मिंग का असर है। इसीलिए वैज्ञानिक बार-बार प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी दे रहे हैं और सरकार उसी के हिसाब से रणनीति बना रही है।
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