ट्विटर के पूर्व CEO जैक डोर्सी के एक बयान को लेकर विरोधी दलों ने सरकार के ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया। एक इंटरव्यू में जैक डोर्सी ने दावा किया था कि जब वो ट्विटर के CEO थे, तो भारत सरकार ने उन पर बहुत दबाव डाला था। सरकार की आलोचना करने वालों के ट्विटर एकाउंट्स बंद करने को कहा था, किसान आंदोलन की ख़बरें रोकने को कहा था। जैक डोर्सी का ये बयान जैसे ही ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा, वैसे ही विपक्षी दल मैदान में आ गए। किसी ने प्रधानमंत्री को कायर कहा। किसी ने नरेन्द्र मोदी को डरपोक कहा, किसी ने मोदी को तानाशाह बताया, लेकिन सरकार ने जैक डोर्सी के बयान को सिरे से खारिज कर दिया, इसे सफेद झूठ बताया। हालांकि जैक डोर्सी अब टिवटर के साथ नहीं हैं, वो फिलहाल BLOCK नाम से अपना फाइनैंशियल एप चला रहे हैं, जिसका शायद लोग नाम भी न जानते हों, लेकिन जैक ने अब ये बयान क्यों दिया, इसकी वजह तो जैक डोर्सी ही जानते होंगे। जैक डोर्सी के बयान पर दुनिया के किसी देश में कोई चर्चा भी नहीं हुई, लेकिन हमारे देश में उनके बयान को हाथों-हाथ लिया गया। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, NCP जैसे तमाम दलों ने जैक डोर्सी के बयान का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला किया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत तो हिटलर और मोदी की फोटो लेकर आईं, दोनों तस्वीरें साथ साथ दिखा और कहा, तानाशाह डरपोक है, मोदी कायर है। पहली बात तो ये कि जिन जैक डोर्सी की बात को लेकर इतनी हाय-तौबा मचाई जा रही है, वो कोई दूध के धुले नहीं हैं। 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी भूमिका पक्षपातपूर्ण रही थी। इसको लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी। दूसरी बात, हमारे देश में लोकतान्त्रिक मूल्य जीवित हैं, या उनकी हत्या कर दी गई, ये बताने के लिए हमें किसी अमेरिकन कंपनी के फॉर्मर सीईओ की जरूरत नहीं। अगर किसी की जिद है कि किसी अमेरिकन से ही सर्टिफिकेट लेना है तो जो बाइडेन की बात सुननी चाहिए। बाइडेन ने मोदी को फैमिली डिनर पर बुलाया है। तीसरी बात, ये कमेंट ऐसे वक्त में आए हैं, जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका की राजकीय यात्रा पर जाने वाले हैं। ये कोई सीक्रेट नहीं है कि मोदी की ये अमेरिका यात्रा ऐतिहासिक है। व्हाइट हाउस में भारत के प्रधानमंत्री के सम्मान में डिनर, वॉशिंगटन में हमारे प्रधानमंत्री का अमेरिकी संसद की संयुक्त बैठक में दूसरी बार संबोधन, अमेरिका के साथ रक्षा सौदों की तैयारी, ये सब किसी व्यक्ति से नहीं, हमारे देश के मान सम्मान से जुड़ी बात है। इसलिए ट्विटर के फॉर्मर सीईओ की बातों की परछाईं इस पर न पड़े, ये हम सबको सोचना है। चुनाव के साल में बहुत से लोग बहुत सी बाते कहेंगे, लेकिन अपने झगड़े, अपने मतभेद, हम अपने यहां सुलाझाएं तो बेहतर होगा। भारत की राजनीति को किसी भी तरह से विदेशी ताकतों के हाथ की कठपुतली न बनने दें, ये सबको सुनिश्चित करना होगा। वैसे हमारी आदत है कि कोई अमेरिकन या ब्रिटिश कुछ कह दे तो उसे परम सत्य मान लेते हैं।
एफसीआरए और कुछ गंभीर सवाल…………..
विदेशी अंशदान को लेकर भारत में बहस नई नहीं है। विदेशी धन सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और धार्मिक गतिविधियों...







