रूस–यूक्रेन युद्ध को एक साल से ज्यादा हो गया है। कुछ युद्ध कथाएं– कथा नंबर एक–भिखारी को भीख मिले‚ तब नार्मल हालात युद्ध शुरू हो जाए‚ तो परेशानी बहुत हो जाती है। नेता परेशान हो जाते हैं और भिखारी भी। नेता और भिखारी हालांकि कई मामलों में एक से ही होते हैं‚ दोनों ही बिना कुछ किए धरे ही खाना चाहते हैं। पर यूक्रेन के युद्ध ने हालत यह कर दी कि महाराष्ट्र में कुछ नेता अंदर कर दिए गए थे‚ उनकी खबरें रुक गयीं‚ क्योंकि हमारे टीवी चैनल एकैदम ग्लोबल टाइप हो गए। इंटरनेशनल भिखारी मुल्क पाकिस्तान के पीएम ने कहा रूस से–दे दे अल्लाह के नाम पर‚ सब दे रहे हैं। अब रूस ने कह दिया कि लड़ाई लड़ लें‚ फिर ले जाना भीख।
पाक पीएम से पाकिस्तान–पत्रकारों ने पूछा–क्या हालत हैं वहां के।
पाक पीएम ने बताया कि नार्मल नहीं हैं।
पत्रकारों ने पूछा–नार्मल कब होंगे।
पाक पीएम ने बताया कि नार्मल तब माने जाएंगे‚ जब भिखारियों को भीख मिलना शुरू हो जाएगी। भिखारियों को नार्मल हालात तब नजर आते हैं‚ जब दुनिया भर में उन्हें भीख मिलना शुरु हो जाएं‚ पाकिस्तान की कसम।
कथा नंबर दो–तेरे पेट में या मेरे मेरे पेट में रूसो नामक शार्क से छोटी मछली यूक्रेना ने कहा–मैं बहुत छोटी मछली‚ काहे परेशान कर रही हो मुझे शार्क। रूसो शार्क ने कहा–तेरी सेफ्टी की चिंता है मुझे। छोटी मछली बोली–अरे मेरी सेफ्टी की चिंता है तो मुझे खा क्यों रही हो शार्क। शार्क ने बताया–सबसे ज्यादा सेफ तो तू मेरे पेट में ही रहेगी ना। तब ही वहां से विशालकाय मगरमच्छ एमरिको आया और बोला–तेरे ही पेट में क्यों सेफ रहेगी‚ सेफ तो मेरे भी पेट में रह सकती है। छोटी मछलियां सेफ तो किसी के पेट में जाकर ही रह सकती हैं ना। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि छोटी मछलियों की सेफ्टी की चिंता मगरमच्छ या शार्क करें‚ तो समझ लेना चाहिए कि वो गड़प होने वाली हैं। और हमें यह समझना चाहिए कि दुनिया में असल लडाई तो शार्क और मगरमच्छ के बीच ही है‚ मछलियों को बस यह चुनने की स्वतंत्रता है कि वह शार्क के पेट बेहतर महसूस करेंगी या मगरमच्छ के पेट में।






