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‘संघर्ष’ या ‘संकट’ जैसी शब्दावली का इस्तेमाल……..

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March 1, 2023
in अन्तर्राष्ट्रीय, कारोबार, खास खबर
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‘संघर्ष’ या ‘संकट’ जैसी शब्दावली का इस्तेमाल……..

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भारत की अध्यक्षता में हो रही जी–20 की शिखर वार्ता में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था वाले देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेद गहरे होते जा रहे हैं। २४–२५ फरवरी को बेंगलुरू में जी–20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गर्वनरों की बैठक हुई थी। जी–20 की भारत में होने वाली इस पहली बैठक के अंत में संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं हो सका। जी–20 का अध्यक्ष होने के नाते भारत की ओर से केवल एक अध्यक्षीय बयान ही जारी हो सका। अमेरिका‚ फ्रांस और जर्मनी सहित करीब 18 देशों के वित्त मंत्री इस बात पर अड़े़ रहे कि बैठक के अंत में जारी होने वाले संयुक्त वक्तव्य में यूक्रेन पर आक्रमण करने के लिए रूस की निंदा की जाए। लेकिन रूस और चीन के प्रतिनिधिमंड़ल इस बात के लिए राजी नहीं हुए और अंततः इस मसले पर जी–20 समूह के देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई। हालांकि भारत ने बीच का रास्ता निकालते हुए सुझाव दिया था कि संयुक्त वक्तव्य में यूक्रेन पर आक्रमण की बजाय यूक्रेन ‘संघर्ष’ या ‘संकट’ जैसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाए‚ लेकिन रूस और चीन के प्रतिनिधिमंड़ल ने भारत के इस सुझाव को भी खारिज कर दिया। कहा जा सकता है कि भारत के लिए जी–20 की बैठकों के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़़ सकता है। दूसरे शब्दों में मार्च के पहले सप्ताह में नई दिल्ली में जी–२० की विदेश मंत्रियों की होने वाली बैठक में भी यूक्रेन युद्ध की काली छाया पड़़ने की आशंकाओं को खारिज नहीं किया जा सकता। रूस ने आरोप लगाया है कि उसके प्रति पश्चिमी देशों के टकरावपूर्ण रुख के चलते वित्त मंत्रियों की बैठक में संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं हो सका। रूस के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए भारत की अध्यक्षता की रचनात्मक भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी देशों के हितों एवं रुखों पर निष्पक्षता से विचार करने की कोशिश की गई। बेंगलुरू में आयोजित इस बैठक में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय व्यवस्था और क्रिप्टो करेंसी को नियमित करने पर भी चर्चा हुई। भारत ने बैठक में विचार करने के लिए जो एजेंड़ा बनाया था‚ उस पर जी–२० समूह के सदस्य देशों ने पूरा समर्थन दिया। वित्त मंत्रियों की इस बैठक का मुख्य एजेंड़ा विश्व में आर्थिक संकट से निपटने‚ विशेषकर कर्ज की समस्या पर केंद्रित थी। अच्छी बात यह रही कि घाना‚ इथोपिया‚ जांबिया और श्रीलंका जैसे गरीब देशों को कर्ज देने पर समूह के सभी देश तैयार हो गए।

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