चीन में कोरोना के कहर से भारत सहित दुनिया सकते हैं। चीन में कोरोना के मामले बेकाबू हो गए हैं। महामारी विशेषज्ञों के अनुसार अगले तीन महीनों में चीन की ६० प्रतिशत से ज्यादा आबादी कोरोना संक्रमित हो चुकी होगी। चीन के बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर से कोरोना विस्फोट होने की संभावना जताई जा रही है। बीजिंग में कोरोना से सबसे ज्यादा हालत खराब है। गंभीर बीमारियों वाले बहुत से लोग अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकते‚ क्योंकि वहां मरीजों के लि पर्याप्त बिस्तर और आईसीयू की सुविधा नहीं है।
आईएचएमई के निदेशक क्रिस्टोफर मरे के अनुसार चीन की जीरो कोविड नीति वायरस के पहले के वेरिएंट में प्रभावी हो सकती है‚ लेकिन ओमिक्रोन वेरिएंट की उच्च संप्रेषणीयता में इसे बनाए रखना असंभव है। मरे ने कहा‚ ‘चीन ने वुहान में प्रकोप के बाद से बमुश्किल किसी मौत की सूचना दी है। इसलिए हमने संक्रमण की मृत्यु दर का अंदाजा लगाने के लिए हांगकांग की ओर देखा।’ कोरोना से जुडी बहुत सारी जानकारियां चीन ने छिपाई इसलिए अब हालत उसके काबू से बाहर हो गए हैं और वह बेबस नजर आ रहा है। कोविड के ओमीक्रोन वैरिएंट ने पिछले साल से कहर बरपा रखा है। इसके कई रूपों ने भारत समेत दुनियाभर में करोड़ों को संक्रमित किया।
चीन में अभी ओमीक्रोन का सब वैरिएंट फैल रहा है। बीएफ.७ ओमीक्रोन वैरिएंट बीएफ.५ की सब–लीनिएज बीएफ.५.२.१.७ का शॉर्ट फॉर्म है। रिपोर्ट्स के मुताबिक‚ इसकी संक्रामकता ओमीक्रोन के बाकी सभी सबवैरिएंट्स से कहीं ज्यादा है। बीएफ.७ का इनक्यूतबेशन पीरियड (संक्रमण से लक्षण दिखने के बीच का वक्त) कम है और पहले से कोविड संक्रमित/ वैक्सीनेटेड लोगों को भी आसानी से संक्रमित कर सकता है। बीएफ.७ से संक्रमित एक व्यक्ति औसत १० से १८.६ लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसके लक्षण वगैरह ओमीक्रोन के बाकी वैरिएंट्स जैसे ही हैं। चीन में जितनी बुजुर्ग आबादी का वैक्सीनेशन होना चाहिए था‚ उतना नहीं हुआ। बुजुर्गों को कोविड से सबसे ज्यादा खतरा है। चीन में बूस्टर डोज लगवाने वालों की संख्या भी कम है। यहां ६० साल से ज्यादा उम्र के करीब ५० प्रतिशत लोगों को ही बूस्टर डोज लगी है। चीन का फोकस बड़े पैमाने पर क्वारंटीन और सख्त यात्रा नियमों पर रहा। करीब तीन साल बाद भारी जनिवरोध के बाद‚ चीन ने हाल ही में पाबंदियां हटाई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार‚ चीन में कोविड के मामले कुछ घंटों में दोगुने होते जा रहे हैं। मौतों के सही आंकड़े बाहर नहीं आ पा रहे। भयावह माहौल की जितनी जानकारी मिली है‚ हालात उससे कहीं ज्यादा खराब हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक महज ७ दिनों में दुनियाभर में ३६ लाख लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं‚ १० हजार लोगों की मौत की खबर सामने आई है। कोरोना को लेकर बीजिंग में इमरजेंसी हॉटलाइन पर रोजाना ३० हजार से ज्यादा कॉल आ रही हैं‚ जोकि आम दिनों के मुकाबले छह गुना ज्यादा हैं। स्वास्थ्य सेवालों की पूरी तरह से कमी होने लगी है।
चीन के बीजिंग‚ शंघाई‚ वुहान‚ झेंगझोउ और चेंगदू में हालात बेकाबू हो गए हैं। यहां पिछले एक हफ्ते में इतनी मौतें हुई हैं कि शव रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज भी कम पड़ गए हैं। भारत समेत पूरी दुनिया की नजर चीन के मौजूदा हालातों पर हैं। डर है कि चीन के रास्ते एक बार फिर कोविड पूरी दुनिया पर छा सकता है। अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) के नये अनुमानों के अनुसार‚ चीन द्वारा कोविड–१९ के कड़े प्रतिबंधों को अचानक हटाने से २०२३ तक मामलों में विस्फोट हो सकता है और दस लाख से अधिक मौतें हो सकती हैं। आईएचएमई के अनुमानों के अनुसार‚ चीन में मामले १ अप्रैल २०२३ के आसपास चरम पर होंगे‚ जब मौतें ३‚२२‚००० तक पहुंच जाएंगी। चीन कोरोना के आंकड़ों को लगातार छिपा रहा है। असल में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कोविड प्रतिबंध हटाने के बाद से किसी भी आधिकारिक कोविड मौत की सूचना नहीं दी है। चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक महामारी से होने वाली कुल मौतें ५‚२३५ हैं‚ जबकि आखिरी आधिकारिक मौत ३ दिसम्बर को दर्ज की गई थी।
चीन ने अभूतपूर्व सार्वजनिक विरोध के बाद हाल में ही अपने यहां लागू दुनिया के कुछ सबसे कठिन कोविड प्रतिबंधों को हटा लिया और अब संक्रमण में वृद्धि का सामना कर रहा है। चीन के मुकाबले भारत में कोविड की स्थिति खासी बेहतर है। भारत ने अबतक कोरोना वायरस की तीन लहरें झेली हैं। डेल्टा वैरिएंट के चलते आई दूसरी लहर सबसे ज्यादा घातक साबित हुई। पिछले कुछ महीनों से देश में कोविड की स्थिति नियंत्रण में है। २० दिसम्बर २०२२ को सक्रिय कोविड मामलों की संख्या ३‚५५९ बताई गई। बीएफ.७ समेत चीन में ओमीक्रोन के जो भी वैरिएंट्स फैल रहे हैं‚ वे भारत के लिए नये नहीं। भारत की आबादी में इम्युनिटी का लेवल कहीं ज्यादा है। ऊपर से मजबूत वैक्सीनेशन प्रोग्राम ने इम्युनिटी को बेहतर किया है। चीन में जो कुछ हो रहा है‚ उसका भारत पर ज्यादा असर नहीं होगा। क्योंकि भारत में ज्यादातर लोगों में हर्ड इम्युनिटी है‚ भले ही हमारा बूस्टयर डोज काउंट कम है।
चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत भी सतर्क हो गया है। केंद्र सरकार कोरोना के मामलों पर नजर रख रही है। कोविड–१९ पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांड़विया की बैठक में कोरोना पर हर हफ्ते स्वास्थ्य मंत्रालय की समीक्षा बैठक करने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने लोगों को भीड़ में मास्क लगाने की सलाह दी है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सभी कोविड पॉजिटिव मामलों के नमूने प्रतिदिन इंसाकॉग जीनोम सीक्वेंसिंग लैब में भेजने का निर्देश दिया है‚ ताकि वहां इस सैंपल का जिनोम सीक्वेंसिंग हो सके और अगर कोरोना का कोई नया वैरिएंट पनपता है तो उसे ट्रैक किया जा सके। इंसाकॉग भारत में कोविड के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन और निगरानी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक मंच है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लोग पहले से सावधानी बरतें और जिन्होंने अब तक बूस्टर डोज नहीं लिया‚ वह डोज जरूर लें। कुल मिलाकर चीन में कोरोना के केस को बढ़ते हुए देखकर भारत को भी सचेत होने की जरूरत है।
ख्याति नदी की भांति अपने उद्गम स्थल पर क्षीण ही रहती है किंतु दूर जाकर विस्तृत हो जाती है भवभूति॥







