कार्तिक शुक्ल नवमी‚ बुधवार को अक्षय नवमी का पर्व मनाया जाएगा। नवमी तिथि रात्रि 11.04 बजे तक है। इसलिए बुधवार को पूरे दिन श्रीहरि व आंवला पूजन होगा। आंवला के वृक्ष की जड में भगवान नारायण का वास होता है। इसीलिए उत्तम स्वास्थ्य और सुख–समृद्धि व शांति की कामना से आंवला वृक्ष का पूजन किया जाएगा।
अक्षय नवमी पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ शुभकारी रवियोग का संयोग बन रहा है। संतान की कामना करने वाले श्रद्धालु विधि–विधान से श्रीहरि विष्णु की पूजा आंवला के पेड के नीचे करेंगे। इस दिन आंवला के वृक्ष की पूजा–अर्चना कर दान–पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अन्य दिनों की तुलना में नवमी पर किया गया दान–पुण्य कई गुना अधिक लाभ दिलाता है।
आंवला के वृक्ष को अक्षय शुभदायक‚ सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। अक्षय नवमी से कार्तिक पूर्णिमा तक इस पेड की जड में देवताओं का वास होने से अक्षय नवमी पर पूजन तथा दुग्धाभिषेक के बाद संध्या काल में घी का दीपक जलाने से भक्तों को सभी पापों से मुक्ति‚ आरोग्यता‚ सौभाग्य व सुख–समृद्धि का लाभ मिलता है। कार्तिक माह में वैसे तो स्नान का अपना ही महत्व होता है‚ लेकिन इस दिन गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। आंवला के पेड में कई औषधीय गुण विद्यमान हैं। आंवला को आयु और आरोग्य वर्धक भी माना जाता है। अक्षय नवमी की तिथि के दो दिन बाद यानि कार्तिक शुक्ल एकादशी को सृष्टि का पालनहार श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा से जागृत होंगे।
विष्णु पुराण में आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और शिव का वास बताया गया है जिनकी कुंडली में सूर्य ग्रह पीडित है अथवा सूर्य कमजोर या सूर्य शत्रु राशि में रहता है उन जातकों को आंवले के पेड के नीचे दस दिन तक भगवान विष्णु को दीपक जलाना चाहिए। इससे दोषों से मुक्ति मिलती है। आज के दिन आंवला के पूजन का पुण्यफल इस जन्म के साथ अगले जन्म में भी मिलता है। आंवला नवमी को भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक दैत्य का अंत किया था। इसलिए इस दिन कुष्मांड या भतुआ में स्वर्ण‚ धातु या द्रव्य डालकर गुप्त रूप से दान किया जाता है। अक्षय नवमी के दिन स्नान‚ पूजन‚ तर्पण‚ अन्न तथा वस्त्र दान करने से हर मनोकामना पूरी होती है। अक्षय नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा करने का नियम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवला का वृक्ष भगवान विष्णु को अतिप्रिय है‚ क्योंकि इसमें लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन व्रत करने से विवाहित महिलाओं की सभी मनोकामना पूरी होती है। जिन दंपतियों का वैवाहिक जीवन कष्टपूर्ण चल रहा हो‚ वह इस दिन प्रभु श्री कृष्ण को माखन–मिश्री का भोग लगाएं। इससे मधुरता आती है। आर्थिक संकटों और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु को हलवे का भोग लगाना चाहिए।
आज के दिन गुप्त दान करना शुभ माना जाता है। आंवला के पेड के नीचे १० दिनों तक भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। परिक्रमा कर उसमें रक्षा सूत्र बांधकर एवं दीप जलाकर मनोकामना मांगी जाती है। इसी पेड के नीचे बैठकर व्रती खाना भी खाती हैं। यह तिथि बहुत ही शुभ होती है। इसलिए इस दिन से कई शुभ काम शुरू किए जाते हैं। नवमी के दिन जगद्धात्री पूजा होती है। इस दिन जल में आंवला का रस मिला कर नहाने से जातक के ईद–गिर्द जितनी भी नकारात्मक ऊर्जा होगी वह स्वतः नष्ट हो जाती है। सकारात्मकता ऊर्जा और पवित्रता में वृद्धि होती है।






