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नीतीश-मुलायम का रिश्ता काफी पुराना रहा था ……..

UB India News by UB India News
October 13, 2022
in खास खबर, ब्लॉग, मुख्यमंत्री
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को सैफई पहुंचे और समाजवादी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन पर यादव परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। नीतीश कुमार ने करीब आधा घंटा सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ बिताया और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मुलायम सिंह का निधन देश के लिए एक बड़ी क्षति है। हम सभी एक साथ काम करना चाहते थे, लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था। इसी बीच यादव परिवार ने बुधवार को ‘शुद्धि संस्कार’ किया, जिसमें परिवार के लोगों ने अपना सिर मुंडवाया। अखिलेश यादव के साथ सीएम नीतीश जिस अंदाज में बैठे हैं वह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। इस वायरल तस्वीर में नीतीश कुमार बेहद गमगीन मुद्रा में जमीन पर बैठे हैं। उनके सामने अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव और अन्य नेता भी हैं। आइए नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव के रिश्तों की कहानी जानने समझने की कोशिश करते हैं।

विशेष विमान से सैफई पहुंचे नीतीश कुमार ने सबसे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और रक्षामंत्री रह चुके मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव के पुत्र और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ परिजनों से मुलाकात की। नीतीश कुमार के सैफई दौरे के दौरान बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री संजय झा और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी दिवंगत मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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लंबे समय से बीमार चल रहे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का सोमवार को निधन हो गया था। बीमारी की वजह से मुलायम सिंह यादव को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज पिछले कई दिनों से जारी था। डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और सोमवार को मुलायम सिंह यादव ने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

नीतीश-मुलायम का रिश्ता है काफी पुराना
दिवंगत मुलायम सिंह यादव से नीतीश कुमार का रिश्ता वर्षों पुराना रहा है। मुलायम सिंह यादव और नीतीश कुमार जब जनता पार्टी में थे तब तक साथ काम किया करते थे। इसके बाद जनता पार्टी को तोड़कर जब लोकदल बनाया गया उस वक्त भी नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव एक साथ राजनीति कर रहे थे। उस जमाने में न सिर्फ मुलायम सिंह यादव और नीतीश कुमार साथ थे, बल्कि लालू प्रसाद यादव जैसे नेता भी उनके साथ रहे।

1989 में जब जनता दल का गठन किया गया तब मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, जार्ज फर्नांडीस, शरद यादव जैसे नेता एक बैनर के तले नजर आते थे। लेकिन 1991 में जनता दल दो फाड़ हो गया। उस वक्त मुलायम सिंह यादव, चंद्रशेखर के साथ उनके खेमे में चले गए और जॉर्ज फर्नांडिस, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, शरद यादव जैसे नेताओं ने दूसरा खेमा बना लिया।

1994 में जनता दल एक बार फिर विभाजित हुआ और जॉर्ज फर्नांडिस ने जनता दल को तोड़कर जनता दल (जॉर्ज) का गठन किया। नीतीश कुमार जॉर्ज फर्नांडिस के जनता दल में चले गए और लालू प्रसाद यादव शरद यादव की ओर से बनाए गए जनता दल में ही बने रहे। 1994 में ही नीतीश कुमार ने जनता दल को फिर तोड़ा और समता पार्टी का गठन करने के साथ जनता दल जॉर्ज का समता पार्टी में विलय करा दिया।

1996 में शरद यादव गुट के जनता दल में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लालू प्रसाद यादव और शरद यादव के बीच मतभेद पैदा हो गया। इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने शरद यादव से अलग हो गए और जनता दल को फिर से तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया। इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार ने भी जनता दल को फिर तोड़ा और अपनी पार्टी ‘समता पार्टी’ को 2003 में ‘जनता दल यूनाइटेड’ का नाम दिया।

दूसरी तरफ चंद्रशेखर वाले जनता दल को तोड़कर मुलायम सिंह यादव ने भी समाजवादी पार्टी बना ली थी। हालांकि जनता दल के गठन और उसके टुकड़े टुकड़े होने तक नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव के बीच राजनीतिक रिश्ते नहीं रहे। लेकिन पुराने साथी होने की वजह से चुनाव के दौरान एक दूसरे की मदद करते रहे। नीतीश कुमार और मुलायम सिंह की निकटता तब फिर से बढ़ी जब, बिहार विधान सभा चुनाव 2015 में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार एक साथ मिलकर BJP के खिलाफ लड़ाई लड़ने उतरे थे।

आपको बता दें कि 2024 लोकसभा चुनाव में विपक्ष के दलों को एकजुट करने का प्रयास नीतीश कुमार की ओर से किया जा रहा है। बीजेपी से अलग होने के बाद से ही नीतीश कुमार ने यह कहना शुरू किया है कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते, लेकिन 2024 में केंद्र की सत्ता से बीजेपी को बाहर करना उनका लक्ष्य है। इसलिए नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद में मुलायम सिंह यादव से भी मुलाकात की थी। यानी बीजेपी को हटाने के लिए नीतीश कुमार, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ फिर से राजनीतिक रिश्ता जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।

बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि नीतीश कुमार भले ही 2024 में बीजेपी को केंद्र की सत्ता से बाहर करने का ख्वाब देख रहे हो। इसके लिए नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एक साथ लाने के लिए मुलायम सिंह यादव का साथ चाहते थे। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह भूल जाते हैं कि 2019 लोकसभा चुनाव के पहले मुलायम सिंह यादव ने ही यह कहा था कि वह यह चाहते हैं कि 2019 में भी नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने। यानी सदन के अंदर खुद मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया था। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जब रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने बड़े बड़े फैसले लिए थे। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कुर्सी की चाहत में नीतीश कुमार ने जिस राह पर अपनी कदम बढ़ाई है वह रास्ता उन्हें, उनके राजनीतिक अंत की तरफ ले जा रहा है।

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