कोई कहता है कि भारत कृषि प्रधान देश है‚ कोई कहता है कि भारत नेता प्रधान देश है‚ पर असल बात यह है कि भारत फुरसत प्रधान देश है। इस कदर फुरसत है इस मुल्क में कि नोएडा में दो टावरों को गिराने की बात थी‚ सारे टीवी चैनल रिपोर्टर पहुंचे हुए थे। तमाम लोग घर पर अपना सारा काम धाम रोककर देखने में जुटे थे कि हाय कैसे गिरते हैं टावर। फुरसतप्रधान मुल्क कर राखा‚ विश्व–गुरु का यह है खाका–मैं कभी डरता हूं कि ऐसी ऐसी बातों में टाइम खर्च कर रहे हैं हम लोग‚ विश्व गुरु कैसे बनेंगे। जेसीबी की खुदाई हो रही थी उस ठिकाने पर‚ सैकड़ों लोग जमा थे–क्या कर रहे थे– जेसीबी की खुदाई देख रहे थे। कई–कई घंटे सिर्फ जेसीबी की खुदाई देख रहे थे‚ ना खुदने वाली जगह अपनी‚ न जेसीबी अपनी‚ पर घंटों घंटों जेसीबी की खुदाई ही देख रहे हैं। एक जापानी इंजीनियर ने मुझे बताया कि उसने ऐसा आविष्कार किया है‚ जिससे मोबाइल की प्रोसेसर की गति में प्रति घंटा छह सेकेंड का सुधार आ जाएगा‚ प्रोसेसर की गति छह सेकेंड तेज हो जाएगी।
बस मोबाइल थोड़ा महंगा हो जाएगा। मैंने कहा–हम भारतीय लोग हैं‚ पांच घंटे जेसीबी की खुदाई को देखने में लगा सकते हैं और कई दिन नोएडा टावरों के ब्लास्ट को देखने में लगा सकते हैं‚ छह सेकेंड क्या औकात रखते हैं हमारे लिए। करना क्या है दुनिया जीतकर‚ बहुत धन–दौलत कमा कर‚ बहुत पद नाम कमा कर‚ जो आनंद निर्मल भाव से जेसीबी की खुदाई देखने में आता है‚ वह अद्भुत है।
एक तस्वीर उभर रही है–सिकंदर विश्व विजय के लिए निकला है। एक जगह एक फकीर लेटा हुआ है रास्ते में। सिकंदर कह रहा है–मुझे जगह दो आगे निकलना है। दुनिया जीतने जाना है। फकीर ने कहा–क्या करेगा दुनिया जीतकर। सिकंदर ने कहा–दुनिया जीतकर फिर आराम करुंगा‚ आनंद लूंगा। फकीर ने बताया–बगल में बैठ जा और जेसीबी खुदाई देखने का आनंद ले फिर टावरों के ब्लास्ट को देखने का आनंद ले यही असल आनंद है। सिकंदर को समझ में आ गया है कि उसकी एंट्री अब भारत में हो गई है।







