पहले पंजाब उसके बाद हिमाचल प्रदेश में खालिस्तान समर्थकों की हरकत वाकई देश के लिए चिंता का सबब है। अतिसुरक्षित क्षेत्र विधानसभा के गेट पर खालिस्तानी झंडा लगाने और दीवारों पर खालिस्तान समर्थित नारे लिखने की हिमाकत को हल्के में बिल्कुल नहीं लेना होगा। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के अलावा पड़़ोसी राज्य हरियाणा में भी खालिस्तानी झंड़ा फहराने की धमकी देश की शांति में खलल ड़ालने का घिनौना षड़¬ंत्र है। अच्छी बात है कि हिमाचल सरकार ने इस मामले में धर्मशाला के इंटेलिजेंस एंड़ सिक्योरिटी ड़ीआईजी के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई है। जांच टीम में कुल ६ लोग शामिल किए गए हैं। पूरे प्रकरण पर तफ्सील से नजर ड़ालें तो यह विशुद्ध देश के अमन–चैन को बर्बाद करने की साजिश लगती है। पंजाब में कुछ दिनों पहले जिस तरह से हिंसा को अंजाम दिया गया और दो समुदाय आमने–सामने आए; वह इसी ओर इशारा करती है। स्वाभाविक है कि देश के दुश्मन नहीं चाहते हैं कि मुल्क में अमन का बोलबाला हो और हर कोई हंसी–खुशी से रहे। कह सकते हैं कि भाईचारा भंग करने की एक सोची–समझी साजिश रची जा रही है। इस नाते संबंधित राज्यों के साथ ही केंद्र सरकार भी इस मामले में संजीदगी से कारवाई करे। जिस तरह से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है‚ उसके बाद से खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां भी बढ़ी है। हालांकि पंजाब में हुए विवाद को वहां की सरकार ने सही तरीके से संभाला मगर इस मसले पर सियासत बिल्कुल नहीं की जानी चाहिए। जिस तरह से आम आदमी पार्टी‚ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच इतने गंभीर मामले को लेकर सतही राजनीति की जा रही है‚ वह ऐसे अतिवादी संगठनों के लिए खाद–पानी का काम करेगी। चूंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है‚ लिहाजा सरकार–चाहे वह केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार–सभी को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। यह जानते हुए कि इन सबके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। साथ ही विदेश में बैठे कुछ खालिस्तान समर्थक संगठन भी भारत में हंगामा और खूनखराबा करने के लिए हर तरह के संसाधन झोंक रहे हैं। चूंकि खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां एक राज्य से निकलकर दूसरे राज्यों में दायरा बढ़ा रही है‚ इसलिए जितनी जल्दी हो सके‚ देश के दुश्मनों के मंसूबों को ध्वस्त करना होगा।
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