ADVERTISEMENT
Friday, July 3, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

सैन्य शासित म्यांमार चला अस्सी के दशक की और ?

UB India News by UB India News
April 28, 2022
in Lokshbha2024, अन्तर्राष्ट्रीय, ब्लॉग
0
सैन्य शासित म्यांमार चला अस्सी के दशक की और ?
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

सैन्य शासित म्यांमार की एक अदालत ने देश की पूर्व नेता आंग सान सू ची को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल जेल की सजा सुनाई है। सेना द्वारा पिछले साल फरवरी में तख्तापलट के बाद सत्ता से बाहर कर दी गइ सू ची ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था कि उनके एक शीर्ष राजनीतिक सहकर्मी ने घूस के तौर पर सोना और हजारों डॉलर लिए थे। उन्हें अन्य मामलों में पहले ही छह साल की कैद की सजा सुनाई जा चुकी है और अभी सू ची के खिलाफ भ्रष्टाचार के १० और आरोप लगे हैं। इस अपराध के तहत अधिकतम १५ साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अन्य मामलों में भी दोषी ठहराए जाने पर उन्हें कुल १०० साल से अधिक समय की जेल की सजा हो सकती है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सू ची सैन्य शासन की अवहेलना करने के लिए पहले ही कई वर्ष नजरबंदी में बिता चुकी हैं।
एक फरवरी‚ २०२१ को म्यांमार की सेना ने आंग सान सू ची सरकार का तख्तापलट कर देश की बागडोर अपने हाथों में ले ली थी और सू ची तथा म्यांमार के कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया था। सू ची की पार्टी ने पिछले आम चुनाव में भारी जीत हासिल की थी‚ लेकिन सेना ने चुनाव में व्यापक पैमाने की धांधली का आरोप लगाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। आशंका जताई जा रही है कि आंग सान सू ची को मिली नई सजा से म्यांमार में हिंसा व दमन की कार्रवाई तेजी से बढ़ेगी। साल १९८८ का विद्रोह आधुनिक म्यांमार के इतिहास का निर्णायक क्षण था। सैनिक शासन ने देश की अर्थव्यवस्था को जिस तरह से तहस–नहस किया था उसके खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा था। जनरल विन ने साल १९६२ के तख्तापलट में सत्ता पर कब्जा कर लिया था। म्यांमार की सेना को तामदौ कहा जाता है। सेना का मानना था नागरिक शासन में देश को एकजुट रखने की क्षमता नहीं है। जनरल ने विन ने बर्मा का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह से काट दिया था। उस दौरान शीतयुद्ध की वजह से एशिया दो खेमों में बंट चुका था। लेकिन जनरल ने इसका हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। इसकी बजाय उन्होंने सनक भरे फैसले लेने वाली एक पार्टी वाली व्यवस्था शुरू की। पार्टी पर सेना का वर्चस्व था। जल्द ही विन की बर्मा सोशलिस्ट प्रोग्राम पार्टी के फैसलों की वजह से बर्मा दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल हो गया। साल १९८८ के अगस्त और सितम्बर में बर्मा का राजनीतिक आंदोलन चरम पर पहुंच गया था। साल १९८७ में विन ने अचानक देश में नोटबंदी कर दी थी। बैंकों में जमा नोट डी–मोनेटाइजेशन के दायरे में आ गए थे। बर्मा की अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी असर हुए। पिछले साल सैन्य तख्तापलट ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। फिर भी नागरिकों के आंदोलन को कुचलने के लिए सेना की हिंसा अभी १९८८ के स्तर पर नहीं पहुंची है।

लेकिन स्थिति की नाजुकता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जो लोग सेना का विरोध करते हैं‚ और लोकतांत्रिक आंदोलनों में शामिल होते हैं‚ उनके साथ उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों की या तो हत्या कर दी जाती है या फिर हिरासत में ले लिया जाता है। कई बार उन्हें लापता कर दिया जाता है‚ उनके घरों पर रात में छापेमारी की जाती है‚ सुरक्षा बल यौन और लिंग आधारित हिंसा से भी गुरेज नहीं करते। छात्र और शिक्षा कर्मचारी दमन का प्राथमिक लक्ष्य रहे हैं। म्यांमार की सेना विरोधियों के दमन के लिए गांवों पर छापा मार रही है‚ घरों में आग लगा रही है और लोगों की हत्याएं भी कर रही है। आम जनता की परेशानियों को दरकिनार कर चीन और रूस म्यांमार को हथियारों की आपूर्ति कराने वाले देशों में शीर्ष पर हैं। ये दोनों देश सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं‚ और हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने के संयुक्त राष्ट्र के किसी भी प्रयास को विफल करने में जुटे रहते हैं।

RELATED POSTS

खामेनेई के जनाजे में शामिल होने भारत-पाकिस्तान से कौन-कौन पहुंचा………

जब सत्ता के दो मंत्री आमने-सामने हों, तो सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है………………

म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों की समस्या गंभीर समस्या है। चुनाव में अल्पसंख्यक रोहिंग्या को मताधिकार से वंचित रखा गया था। तख्तापलट करने वाले सेना प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग अपनी क्रूरता के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात हैं। २०१२ में रखाइन प्रांत में गृह युद्ध जैसे हालात बन गए। सेना पर रोहिंग्याओं के अत्याचार के आरोप लगे। म्यांमार की सेना ने अगस्त २०१७ में रखाइन प्रांत में खूनी अभियान चलाया था और इसमें हजारों रोहिंग्या मुस्लिम मारे गए थे। पांच लाख रोहिंग्या मुस्लिमों को देश छोड़कर पड़ोसी बांग्लादेश और अन्य देशों में भागना पड़ा था। रखाइन प्रांत में हालात संभालने के लिए सरकार कोई ठोस कदम उठा नहीं पाई। इसका फायदा सेना को मिला और वह सरकार के मुकाबले मजबूत होती गई। रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार के दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सांग सू की ने चुप्पी साधे रखी‚ जिससे उनकी दुनियाभर में आलोचना हुई थी।

लगातार हो रही रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या और उनके खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए आर्कबिशप डेसमंड टूटू से लेकर नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई तक आंग सान सू ची से अपील करते रहे। लेकिन शांति की अपीलों को दरकिनार करते हुए पूरे मामले पर सू ची ने बड़े ही रहस्यमय ढंग से चुप्पी साध रखी। रोहिंग्या के मामले पर सू ची अपने पिता आंग सान जैसा रवैया ही अपनाती दिखीं। दूसरे विश्व युद्ध के समय रखाइन प्रांत दक्षिण पूर्व एशिया में चल रही लड़ाई के दौरान सबसे आगे था। रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने ब्रिटेन और उसके सहयोगियों की तरफ से जापानी फौजों को टक्कर दी। रखाइन प्रांत में बर्मी समुदाय और रखाइन के बौद्धों ने लड़ाई में जापान का साथ दिया। १९४२ से १९४३ के बीच दोनों तरफ से काफी लोगों की जानें गइ। म्यांमार के सैन्य शासक पर दुनियाभर के देश अगर दवाब बनाने में नाकाम रहते हैं‚ तो वहां भयंकर जानमाल का नुकसान उठाना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र से लेकर सभी मानवधिकार संगठन इस मामले में बेहतर पहल कर सकते हैं।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

खामेनेई के जनाजे में शामिल होने भारत-पाकिस्तान से कौन-कौन पहुंचा………

खामेनेई के जनाजे में शामिल होने भारत-पाकिस्तान से कौन-कौन पहुंचा………

by UB India News
July 3, 2026
0

हर किसी की तमन्ना होती है कि जब उसकी मौत हो तो जनाजा धूम से निकले. उसके चाहने वाले उसे...

जब सत्ता के दो मंत्री आमने-सामने हों, तो सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है………………

जब सत्ता के दो मंत्री आमने-सामने हों, तो सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है………………

by UB India News
July 3, 2026
0

बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है।...

शशि थरूर ने 12 साल में मोदी के कार्यकाल का किया आकलन…………….

शशि थरूर ने 12 साल में मोदी के कार्यकाल का किया आकलन…………….

by UB India News
July 2, 2026
0

कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ. शशि थरूर ने एक लेख लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। केरल के...

अब समय आ गया है कि दुनिया पीओके की सच्चाई पर नजर डाले…………..

अब समय आ गया है कि दुनिया पीओके की सच्चाई पर नजर डाले…………..

by UB India News
July 2, 2026
0

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जिस तरह सेना और सरकार के खिलाफ हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं...

पेट्रोल में इथेनॉल: हर तरफ़ हंगामा, लेकिन असली सवालों के जवाब कौन देगा?

पेट्रोल में इथेनॉल: हर तरफ़ हंगामा, लेकिन असली सवालों के जवाब कौन देगा?

by UB India News
July 3, 2026
0

श में इन दिनों पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। यह बहस केवल सोशल...

Next Post
बच्चों को कोरोना–रोधी टीके

बच्चों को कोरोना–रोधी टीके

जानिए‚ और अपने हित बचाइए

जानिए‚ और अपने हित बचाइए

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend