रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) गुरुवार को लेह-लद्दाख (Leh Ladakh) के दौरे पर पहुंचे हैं. वह यहां रेजांग ला (Rezang La) में नए सिरे से बनाए गए वॉर मेमोरियल (War Memorial) का उद्घाटन करेंगे. साथ ही 1962 की जंग में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देंगे. इस जगह भारतीय सैनिकों ने 1962 में चीनी सेना (China) का वीरता से मुकाबला किया था. यह युद्ध स्मारक 13 कुमाऊं रेजीमेंट के उन बहादुर भारतीय सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने रेजांग ला की लड़ाई में चीन को पटखनी देते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी.
वॉर मेमोरियल का उद्घाटन रेजांग ला में हुई जंग की 59वीं वर्षगांठ पर किया जा रहा है. सेना के अफसरों का कहा है कि पूर्वी लद्दाख सेक्टर में स्थित रेजांग ला वॉर मेमोरियल पहले छोटा था. अब इसे काफी बड़ा बनाया गया है. इसे लद्दाख के पर्यटन मैप पर भी लाया जाएगा. उनका कहना है कि अब आम लोग और पर्यटक भी इस वॉर मेमोरियल व सीमा क्षेत्रों में जा सकेंगे. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि स्मारक का उद्घाटन करने के बाद, रक्षा मंत्री क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा भी करेंगे.
लद्दाख क्षेत्र में 19 महीने से चल रहे गतिरोध के बीच भारतीय सेना चीन से लगती सीमा पर कड़ाके की सर्दी में तैनाती के लिए पूरी तरह से तैयार है. भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना द्वारा 15 नवंबर 2021 को एक संयुक्त एयरलिफ्ट अभ्यास, ‘ऑप हरक्यूलिस’ किया गया. इस उच्च तीव्रता वाले एयरलिफ्ट का उद्देश्य उत्तरी क्षेत्र में रसद आपूर्ति को मजबूत करना और परिचालन क्षेत्रों में शीतकालीन भंडार को बढ़ाना था. सेना ने एक बयान में कहा, ‘एयरलिफ्ट में उपयोग के लिए सी-17, आईएल-76 और एएन-32 विमानों का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने पश्चिमी वायु कमान के एक अग्रिम बेस से उड़ान भरी थी.’
वायु सेना ने दिखाया दमखम
सेना ने आगे कहा, ‘यह प्रयास भारतीय वायु सेना की भारी सामान उठाने की क्षमता का आकलन करने के साथ वास्तविक समय का प्रदर्शन करने को लेकर किया गया था, जिसने अतीत के दौरान किसी भी आकस्मिकता का शीघ्रता से जवाब देने की क्षमता सुनिश्चित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है.’ भारतीय सैनिकों को सीमाओं पर लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर तैनात किया जाता है और उन्हें दुर्गम स्थानों और खून जमा देने वाली ठंड के बीच उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर बने रहने के लिए खास चीजों की जरूरत होती है.
सर्दी में तापमान शून्य से 40-50 डिग्री नीचे
सुरक्षा बल को कठोर सर्दियों में टकराव वाले बिंदुओं पर विस्तारित सेना की तैनाती को बनाए रखने के लिए तैयार रहना होगा, जहां तापमान जल्द ही शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरना शुरू हो जाएगा. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘तापमान और सर्द हवाएं सर्दियों के दौरान एक चुनौती होगी, क्योंकि तापमान शून्य से नीचे (माइनस) 40-50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाएगा.’ पिछले साल भारत ने चीन के साथ सैन्य संघर्ष के बीच चरम सर्दियों में विस्तारित की गई सैन्य तैनाती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका से अतिरिक्त ऊंचाई वाले सर्दियों के कपड़ों की तत्काल खरीद की थी. इनमें खासतौर पर डिजाइन किए गए गॉगल्स, फेस मास्क, दस्ताने, बर्फ के जूते, ऊनी मोजे आदि शामिल हैं. पानी को गर्म रखने वाली बोतल के अलावा इस किट में विशेष स्लीपिंग बैग भी शामिल हैं.
जवानों के रहने के पुख्ता इंतजाम
इसके अलावा सर्दियों में तैनात सैनिकों की परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सेना ने अग्रिम स्थानों पर तैनात सभी सैनिकों के लिए आवास सुविधाओं की स्थापना का काम पूरा कर लिया है. रहने की जगह, जो सैनिकों को भीषण ठंड और हवा के झोंकों से बचाएगी, उनमें फास्ट इरेक्टेबल मॉड्यूलर शेल्टर शामिल हैं. वर्षों से निर्मित एकीकृत सुविधाओं के साथ स्मार्ट शिविरों के अलावा हाल ही में सैनिकों के लिए बिजली, पानी, हीटिंग सुविधाओं, स्वास्थ्य और स्वच्छता की एकीकृत व्यवस्था के साथ अतिरिक्त अत्याधुनिक आवास बनाए गए हैं. भारी हिमपात से अग्रिम स्थानों की सड़कों से संपर्क कट जाता हैं, जिससे परिवहन असंभव हो जाता है. इस वजह से आपूर्ति लाइनें टूट जाती हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए कि सब कुछ ठीक है भारतीय वायु सेना खासतौर पर दुर्गम स्थानों पर जवानों की तैनाती की लिए तैयारी कर रही है.







