बिहार विधानसभा के लिए हो रहे उपचुनाव में मुंगेर का तारापुर सीट काफी हॉट बन गया है. किसी दल के लिए यह सीट बचाने की चुनौती है तो किसी दल के लिए हाथ से निकली हुई सीट वापस पाने की चुनौती बनी हुई है. अब कुशेश्वरस्थान और तारापुर सीट का उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंच चुका है. कटाक्ष, आरोप, घात, भीतरघात के तीर चलाये जा रहे हैं. यह सियासी संग्राम चुनाव लड़ रही चारों पार्टियों राजद, जदयू,कांग्रेस और लोजपा (चिराग) के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है.
तारापुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2010 से जदयू चुनाव में जीत दर्ज करती आ रही है. इस बार के चुनाव में इस सीट को बचाना जदयू के लिए बड़ा चैलेंज है. राजद द्वारा वर्ष 2010 में सीट गंवाने के बाद यह सीट राजद के लिये कितना महत्वपूर्ण है यह इस बात से समझा जा सकता है कि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने लगातार तीन दिनों तक चुनावी दौरा किया. दूसरी तरफ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह पांच दिनों के चुनाव प्रचार करने दौरान पर तारापुर में टिके हुए हैं.
जदयू ने राजीव कुमार सिंह, राजद ने अरुण कुमार, कांग्रेस ने राजेश मिश्रा को तारापुर विधानसभा क्षेत्र के ही प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि लोजपा ने जमुई विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताया है. आलम यह है कि एनडीए के सभी घटक दल मिलकर प्रत्याशी को चुनाव जीतने की तैयारी में जुटे हुए हैं तो वहीं महागठबंधन के कांग्रेस और राजद ने अपने-अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतार दिया है. पिछले तीन दशक से कांग्रेस राजद के साथ गठबंधन में है. राजद ने यहां से नए चेहरे को चुनाव मैदान में उतार कर इस सीट को अपने खाते में करने की जी जान कोशिश कर रही है. दिवंगत रामविलास की लोजपा ने भी चुनाव मैदान में अपना प्रत्याशी उतारकर इस चुनाव को रोमांचक बना दिया है.
एक नजर मे मतदाताओं की स्थिति
कुल मतदाता-327229. पुरूष मतदाता-175994. महिला मतदाता-151227. र्थड जेंडर- आठ. अस्सी वर्ष से अधिक के मतदाता-5849. दिव्यांग मतदाता-2507. सर्विस वोटर- 1443. फिलहाल तारापुर विधान सभा के उपचुनाव मैदान में खड़े सभी उम्मीदवारों अपनी अपनी जीत सुनिश्चित होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन तारापुर विधानसभा क्षेत्र की जनता किसके सर पर जीत का सेहरा बांधेगी यह दो नंवबर को मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा.
पार्टियों की सियासी दशा होगी तय
यह चुनाव बतायेगा कि बिना किसी चुनावी लहर में उनकी जमीनी हकीकत कैसी है? दरअसल यह टेस्ट प्रदेश के सियासी समीकरणों का नब्ज साबित होने जा रहा है. वह इसलिए कि इन सभी पार्टियों की सियासी दशा क्या होगी, चुनाव परिणाम तय करेगा.
सभी दलों के लिए परीक्षा
सियासी जानकारों के मुताबिक इस उपचुनाव से साबित हो जायेगा कि सत्ताधारी दल उठान पर हैं अथवा ढलान पर. राजद को पता चल जायेगा कि गठबंधन करके चलने में फायदा है अथवा अकेले चलने में. दूसरी ओर, कांग्रेस को पता चल जायेगा कि उसकी अपनी ताकत क्या है?
चिराग पासवान के लिए भी अहम उपचुनाव
यह चुनाव यह भी बता देगा कि चिराग पासवान ही दिवंगत नेता राम विलास पासवान के असली सियासी वारिस हैं अथवा उनके चाचा केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस. कन्हैया कुमार की हनक का भी पता चल जायेगा. इस उपचुनाव में राजद के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव के सामने सबसे ज्यादा चुनौतियां हैं. दरअसल सारे विरोधियों के टारगेट पर अकेले तेजस्वी यादव हैं.
चुनाव में अकेले तेजस्वी
सत्ताधारी दल के नेता कभी उनकी पढ़ाई, तो कभी राजद के पुराने कार्यकाल के तीखे व्यंग्यवाणों से हमलावर हैं.वे कांग्रेस के स्वार्थी होने के आरोपों को भी झेल रहे हैं. बड़े भाई की अघोषित बगावत झेल रहे तेजस्वी यादव के साथ चुनाव प्रचार में पिता लालू प्रसाद भी नहीं आ सके हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव को कहना पड़ा कि वे चुनाव में अकेले हैं.
सत्ताधारी दल का एजेंडा
सत्ताधारी दल का पूरा एजेंडा लालू-राबड़ी कार्यकाल के पुराने मुद्दों को उछाल कर उसका वोट काटना है. उसके पास भविष्य की सुनहरी घोषणाएं हैं. सत्ताधारी दल द्वारा अपने सबसे बड़े ब्रांड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम से वोट आकर्षित किये जा रहे हैं.
राजद का एजेंडा
राजद नेता तेजस्वी यादव की आक्रामकता और उनकी लोकप्रियता अब धरातल पर दिखने लगी है. प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी होने का आत्मविश्वास साफ दिख रहा है. राजद को पूरा भरोसा है कि पिछले कुछ चुनावों के उपचुनावों में विपक्ष हारा नहीं है. कांग्रेस के पास स्टार प्रचारक के रूप में चर्चित चेहरा कन्हैया कुमार हैं, जो अब चुनाव प्रचार में उतरेंगे.







