बिलौटी मौजा की जिस जमीन पर जवइनियां गांव के बाढ़ विस्थापितों को बसाया जा रहा है, वहां विकास के लिए सरकार की ओर से पहले 11 करोड़, फिर 1400 करोड़ का फंड आया था। एसडीएम के घोटाले के सबूत भइया के पास थे, जो उनके मोबाइल में थे। मैंने सोशल मीडिया पर देखा है कि वीडियो में भइया ने एसडीएम का नाम लिया है और कहा था कि इन्होंने धमकी दी है कि तुम्हें और तुम्हारे परिवार वालों को मरवा दिया जाएगा।
गलती से हम लोगों ने FIR में जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार का नाम नहीं डाला है। लेकिन मेरे भाई की हत्या में मुख्य आरोपी एसडीएम ही है। मैं ये कहना चाहूंगा कि उस दिन के सीसीटीवी कैमरे की जांच कराई जाए, जिस दिन मेरे भइया एसडीएम के ऑफिस गए थे।
ऑफिस में मेरे भाई को धक्का मारा गया और गाली देकर भगा दिया गया था। कैमरे की जांच होगी तो सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी। एसडीएम पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।’
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने मिडिया से बातचीत में ये बातें कही है। दरअसल, भरत तिवारी अपने फेसबुक पोस्ट और लाइव के जरिए लगातार जगदीशपुर एसडीएम का जिक्र करता था। कई पोस्ट में उसने सीधे तौर पर जगदीशपुर एसडीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
आखिर भरत तिवारी और जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार के बीच तनातनी का कारण क्या था? जगदीशपुर एसडीएम पर भरत क्या-क्या आरोप लगाता था? जवइनियां गांव के बाढ़ विस्थापितों को कहां बसाया जा रहा है? बाढ़ विस्थापितों को कितना मुआवजा मिला है?
सीनियर वकील ने मुख्य सचिव को जांच के लिए लिखी चिट्ठी
जवइनियां गांव के बाढ़ विस्थापितों के लिए विकास फंड में हेरफेर के आरोपों को लेकर शुक्रवार को सीनियर वकील और ज्ञानवापी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में हिंदू पक्ष के वकील सौरभ तिवारी की ओर से जांच की मांग की गई है। सौरभ तिवारी ने बिहार के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर कथित भ्रष्टाचार में एसडीएम की भूमिका को लेकर जांच की मांग की है।
चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि जवइनियां गांव के विस्थापितों के पुनर्वास योजना में कथित वितीय भ्रष्टाचार मामले में जगदीशपुर एसडीएम के साथ शाहपुर सीओ की भूमिका की जांच अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी से कराई जाए। जांच में किसी तरह की लीपा-पोती न हो, इसलिए जांच पूरी होने तक जगदीशपुर के SDM, शाहपुर के अंचलाधिकारी यानी CO को निलंबित किया जाए या उनका कहीं और ट्रांसफर किया जाए, ताकि सबूतों या फिर डॉक्यूमेंट्स से छेड़छाड़ न हो सके।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बुधवार को बिलौटी गांव में हुई महापंचायत के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि एसडीएम इस पूरे मामले के मुख्य साजिशकर्ता हैं। ये बाढ़ पीड़ित और 2 जगह के फंड से जुड़ा मामला है।
ये सारी चीजें भरत के मोबाइल और कॉल डिटेल से पता चल जाएगी। लेकिन, वो मोबाइल अभी भी पुलिस के पास है। उस मोबाइल के साथ छेड़छाड़ करके डेटा भी खत्म किया गया होगा, ये भी आशंका है।
अब जानिए आखिर भरत और एसडीएम के बीच तनातनी की वजह क्या थी?
भरत तिवारी ने 6 जून को फेसबुक पोस्ट में लिखा था, ’आप लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि बिलौटी गांव में बसाए जा रहे बाढ़ प्रभावितों के लिए लगाए जा रहे हैंडपंप के काम में लापरवाही, भष्टाचार का मामला सामने आया है। इसके खिलाफ मैंने 5 जून को नल जल विभाग के SDO से बात की, उन्होंने गलती भी स्वीकारी और कहा कि कार्रवाई करते हैं।’
भरत ने भ्रष्टाचार के लिए सीधे जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार को जिम्मेदार बताया था।
भरत तिवारी का आरोप था कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी खासकर जगदीशपुर के एसडीएम और अंचल स्तर के अधिकारी आम जनता के काम में भ्रष्टाचार कर रहे हैं।
भरत बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और जमीन अलॉटमेंट और मुआवजे से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली से नाराज था। वो व्यवस्था को सुधारने की मांग कर रहा था, लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार न होने की वजह से वो फेसबुक पर लाइव आकर उनकी पोल खोल रहा था और जगदीशपुर एसडीएम को चुनौती दे रहा था।
एनकाउंटर से 2 दिन पहले 15 जून 2026 को फेसबुक पर किए गए पोस्ट और लाइव में भरत ने कहा कि वो देश में व्यवस्था परिवर्तन के लिए ‘क्रांतिकारी युद्ध’ शुरू करने जा रहा है। भरत ने जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम को जान से मारने तक की धमकी दी थी। उसने फेसबुक लाइव में अवैध हथियार (पिस्टल) लहराते हुए कहा था कि अगर अधिकारियों ने अपना रवैया नहीं बदला, तो मैं कानून हाथ में ले लूंगा।
17 जून 2026 की सुबह (एनकाउंटर वाले दिन) किए गए अपने आखिरी फेसबुक लाइव में भरत ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि “पुलिस और प्रशासन मुझे मानसिक रूप से विक्षिप्त (पागल) साबित करने की साजिश रच रहे हैं, ताकि मुझे जबरन उठाकर मानसिक अस्पताल भेजा जा सके और मेरी आवाज दबाई जा सके।” भरत ने कहा था कि मैं व्यवस्था के खिलाफ लड़ते रहूंगा, पीछे नहीं हटूंगा।
अब समझिए जवइनियां गांव के बाढ़ प्रभावितों को कितना मुआवजा मिल रहा है
दरअसल, जवइनियां गांव के बाढ़ प्रभावितों के लिए बिहार सरकार की ओर से शाहपुर प्रखंड मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर बिलौटी मौजा में बसाया जा रहा है। करीब 5.5 एकड़ सरकारी जमीन पर हर परिवार को 3-3 डिसमिल जमीन आवंटित की गई है। दावा किया जा रहा है कि जहां विस्थापितों को बसाया जाना है, उसे सरकार मॉडल टाउनशिप के रूप में विकसित करेगी।
फिलहाल, आवंटित जमीन पर 2 हैंडपंप और बिजली का खंभा लगाया गया है, जबकि एक सामुदायिक भवन और एक आंगनवाड़ी निर्माणाधीन है।
भरत का कहना था कि मॉडल टाउनशिप के लिए प्रशासन की ओर से अब तक जवइनियां गांव के 70 परिवारों को चिह्नित किया गया है। इन्हें जमीन का आधिकारिक पर्चा (स्वामित्व) भी सौंप दिया गया है। 70 में से हर बाढ़ प्रभावित परिवार को मात्र 1 लाख 20 हजार रुपए दिए जाने हैं। ये रकम 3 किस्तों में दी जानी है।
70 में से 52 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपए मिल चुके हैं, जबकि 18 परिवार पहली किस्त के लिए प्रक्रिया में हैं।
भरत का कहना था कि ये इसी रकम में बाढ़ प्रभावितों को ईंट भी खरीदनी है, दीवार से लेकर छत तक बनाना है, लेकिन जहां बाढ़ प्रभावितों को बसाया जा रहा है, वो जमीन गड्ढे में है। दो से तीन घंटे की बारिश में घुटनों तक पानी भर जाएगा। इसलिए वहां प्रशासन को अपने पैसों से मिट्टी भरवानी चाहिए।
भरत का दावा था कि प्रशासन ने प्रभावितों से कहा था कि इसी 1 लाख 20 हजार रुपए में से आप लोग मिट्टी भी भरवा लीजिए। प्रशासन के इस निर्देश के खिलाफ भरत गांव वालों से कहता था कि आप लोग अपने पैसे से मिट्टी मत भरवाइए, मैं आप लोगों की लड़ाई लड़ रहा हूं, प्रशासन की टीम ही मिट्टी डलवाएगी।
भरत का कहना था कि कुछ लोगों ने आवंटित जमीन पर रहना भी शुरू कर दिया था, लेकिन उनके लिए शुरुआत में बिजली, पानी की व्यवस्था नहीं की गई थी। भरत ने प्रयासो किया तो बिजली और पानी की व्यवस्था की गई।
आखिर में जानिए आखिर कौन हैं जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार
जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार मूल रूप से मधेपुरा के गम्हरिया गांव के रहने वाले हैं। संजीत ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी 60वीं, 62वीं की परीक्षा पास की थी, जिसका रिजल्ट फरवरी 2019 में आया था। संजीत की 60वीं रैंक थी और उनकी पहली पोस्टिंग बेगूसराय के डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुई थी। शंभू भगत और ललिता देवी की तीन संतानों में संजीत कुमार सबसे बड़े हैं।
17 जून को भरत एनकाउंटर के बाद से जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार की ऑफिस में काफी कम एक्टिविटी दिख रही है। हालांकि वे नियमित रूप से अपने ऑफिस में बैठ रहे हैं और जरूरी कामों को निपटा रहे हैं। लेकिन लोगों से उनका मिलना-जुलना काफी कम हो गया है। हर साल मुहर्रम पर्व को लेकर तत्पर और एक्टिव रहने वाले एसडीएम की शुक्रवार को ताजिया जुलूस के दौरान भी कहीं नहीं दिखे।







