अल नीनो का आरंभिक असर दिखने लगा है। मानसून का करंट 27 जिलों में विस्तार पाकर भी स्वाभाविक रूप से नहीं बरस रहा है। सूबे के 36 जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। 18 जिलों में तो 50% या इससे भी ज्यादा कमी है। बारिश की सर्वाधिक कमी पटना जिले में दर्ज की गई है। यहां 22 जून तक 72.7 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन मात्र 12.3 मिमी हुई है। यानी कुल 83% की कमी है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक राज्यभर में मानक से अबतक 42 % कम बारिश हुई है। मानसून अवधि में 22 जून तक 94.4 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन मात्र 54.4% हुई है। मानसून के तेवर के गड़बड़ होने से जहां यह पहुंच गया है, वहां भी बारिश की भारी किल्लत बनी हुई है। सुपौल और किशनगंज में ही सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।
सीमांचल के अन्य जिले भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
मानसून की स्थिति कुछ बेहतर होगी। यह दस दिनों के बाद राज्य के कुछ जिलो में प्रसार पा सका है। आशा है अब बारिश की गतिविधियां पहले से बेहतर रहेंगी। बारिश के आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है। जून के अंतिम हफ्ते में राज्य में बारिश की गतिविधियां बढ़ने वाली है।
-आशीष कुमार, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र पटना
राज्य में मानसून की बारिश को बंगाल की खाड़ी से बल मिलता है। मानसून अवधि में अल नीनो का आरंभिक असर दिखने लगा है। यह मौसम के पूर्वानुमान की अनिश्चितता बढ़ाएगा। लेकिन जून में बारिश की कमी के बावजूद जुलाई में बेहतरी के आसार हैं। इसलिए बिहार में सूखे के आसार बेहद कम हैं।
-प्रो (डा.) प्रधान पार्थसारथी, सीयूएसबी
पटना और गया की भी स्थिति खराब
पटना में 83%, बांका में 80%, औरंगाबाद में 57% , गोपालगंज में 73%, नालंदा में 71%, सहरसा में 71%, समस्तीपुर में 72%, सारण और शेखपुरा में 69%, मुजफ्फरपुर में 67%, वैशाली में 66%, भागलपुर में 64%, गया में 65%, मधेपुरा में 57% , जहानाबाद में 54% , खगड़िया में 51%, मुंगेर और जमुई में 50% बारिश की कमी है।
30 से 50 प्रतिशत बारिश की कमी वाले जिले
रोहतास 39, सीवान 38, पूर्णिया 40, पूर्वी चंपारण 44, दरभंगा 46, बक्सर 40, भोजपुर 45, भभुआ 37, बेगूसराय 42, पश्चिमी चंपारण में 47 प्रतिशत, शिवहर 40% और अरवल में 35 प्रतिशत बारिश की कमी है।
यहां सामान्य से अधिक बारिश सुपौल में 11 प्रतिशत और किशनगंज में 21 प्रतिशत अधिक बारिश।
सूर्य नेआर्द्रा नक्षत्र में किया प्रवेश, बारिश के बन रहे योग
ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि (22 जून) को दोपहर 12.31 बजे वारियान योग में मिथुन राशि में स्थित सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए। ज्योतिषियों के अनुसार आर्द्रा राहु का नक्षत्र है। राहु को सूर्य का शत्रु माना जाता है, इसलिए इस नक्षत्र में सूर्य का प्रभाव अपेक्षाकृत मंद पड़ता है और वर्षा के अनुकूल परिस्थितियां बनने लगती हैं। आर्द्रा नक्षत्र 6 जुलाई तक प्रभावी रहेगा।
रोहिणी नक्षत्र में किसान खेतों की तैयारी करते हैं, जबकि आर्द्रा नक्षत्र से बीजरोपण सहित कृषि कार्यों की शुरुआत होती है। ‘आर्द्रा ’ का अर्थ ही नमी है और इसे मानसून आगमन का संकेत माना जाता है। विश्व ज्योतिष महासंघ के सभापति ज्योतिष आचार्य अशोक मिश्र के अनुसार सूर्य का यह गोचर 4 चरणों में पूरा होगा। पहला 22 से 26 जून तक रहेगा, जिसमें भूमि की जुताई जैसे कार्य वर्जित माने गए हैं। दूसरे व तीसरे चरण (26 जून से 3 जुलाई) में रुक-रुक कर वर्षा और खेतों में नमी की संभावना रहती है। चौथे (3 से 6 जुलाई) में वर्षा की तीव्रता बढ़ने के संकेत हैं।
6 जुलाई को सूर्य राहु के आद्रा नक्षत्र से निकलकर वृहस्पति के पुनर्वसु नक्षत्र में सौभाग्य योग में प्रवेश करेंगे। वहीं 15 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में जाएंगे, जिससे गर्मी में कमी और वर्षा की संभावना प्रबल मानी गई है। आद्रा नक्षत्र भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को समर्पित है तथा इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है।