स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। यह वार्ता ऐसे समय हुई, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
पहले दौर की वार्ता में क्या रहा हासिल?
- दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार
अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप को मंजूरी दी। इससे आगे की बातचीत के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है।
- उच्चस्तरीय समिति का गठन
वार्ता के दौरान एक हाई लेवल कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। यह समिति एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन और पूरी वार्ता प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
- तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू होगी
दोनों पक्षों ने तय किया कि तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू की जाएगी। यह चर्चा पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में जारी रहेगी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सीधा संचार तंत्र
वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की गलतफहमी और टकराव को रोकने के लिए एक विशेष संचार चैनल बनाने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
- तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता पर चर्चा
वार्ता के दौरान होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी चर्चा हुई। हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है।
- लेबनान में संघर्षविराम लागू रखने पर जोर
बैठक में लेबनान में सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने से जुड़े एमओयू प्रावधानों के पालन पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का फैसला किया गया।
- कतर और पाकिस्तान की अहम भूमिका
कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ के रूप में बातचीत को आगे बढ़ाया। दोनों देशों ने कहा कि वे वार्ता को रचनात्मक माहौल में जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
- ट्रंप और पेजेशकियन ने किया था एमओयू पर हस्ताक्षर
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस्लामाबाद एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते में गारंटर की भूमिका निभाई थी।
- इस्राइल और हिजबुल्ला समझौते का हिस्सा नहीं
हालांकि लेबनान में संघर्षविराम लागू है, लेकिन इस्राइल और हिजबुल्ला अमेरिका-ईरान समझौते का हिस्सा नहीं हैं। इस्राइल ने कहा है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक रहेगी, जब तक सुरक्षा खतरे खत्म नहीं हो जाते।
- शांतिपूर्ण समाधान पर बनी सहमति
सभी पक्षों ने कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मध्यस्थ देशों ने उम्मीद जताई कि वार्ता के अगले दौर में और प्रगति होगी।
60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप क्या?
वार्ता के दौरान एक उच्चस्तरीय समिति के गठन पर सहमति बनी, जो पूरी बातचीत की राजनीतिक निगरानी करेगी। इस समिति को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस समिति को रिपोर्ट देंगे। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे मुद्दों के लिए अलग-अलग कार्य समूह भी बनाए जाएंगे। इससे यह संकेत मिला है कि दोनों पक्ष अब तकनीकी स्तर पर ठोस बातचीत की दिशा में बढ़ रहे हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम करने की कोशिश हुई है?
वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। दोनों पक्षों ने एक सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई है, ताकि बातचीत के दौरान किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचा जा सके। यह तंत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। अमेरिकी चेतावनियों और ईरान के कड़े रुख के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
क्या लेबनान में युद्ध रोकने की दिशा में भी प्रगति हुई है?
वार्ता में लेबनान को लेकर भी अहम प्रगति दर्ज की गई। सभी पक्षों ने लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त कराने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने पर सहमति जताई। इस तंत्र में लेबनान गणराज्य भी शामिल होगा, जबकि कतर और पाकिस्तान सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि लेबनान में युद्धविराम से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन हो। इसके अलावा स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता पूरे सप्ताह जारी रहेगी।
नेतन्याहू बोले- ट्रम्प के इशारों पर काम नहीं करता:लेबनान में इजराइली सेना हटाने से इनकार
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि लोग यह समझते हैं कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कहने पर काम करते हैं, लेकिन यह सच नहीं है।
यरुशलम में आयोजित एक समिट में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “अमेरिका में लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूं। वहीं इजराइल में कुछ लोग सोचते हैं कि मैं वही करता हूं जो ट्रम्प चाहते हैं। लेकिन दोनों ही बातें गलत हैं।”
इजराइली पीएम ने कहा कि इजराइल और अमेरिका करीबी सहयोगी जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती।
नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जरूरत महसूस होगी तब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत: दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों देश 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
2. वेंस बोले- मिलकर शांति के लिए काम करेंगे: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं और ट्रम्प अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदलना चाहते हैं।
3. ट्रम्प की ईरान को धमकी: ट्रम्प ने कहा कि ईरान लेबनान में अपने समर्थक हिजबुल्लाह को तुरंत रोके। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा।
4. लेबनान में मौतों का आंकड़ा 4,100 के पार: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत और 12,153 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो सकती है।
5. ईरान का दावा- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर मिलेंगे: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि समझौते की शर्तें तेहरान के पक्ष में हैं।
ईरान की धमकी के बाद होर्मुज से सिर्फ 12 जहाज गुजरे

शिपिंग डेटा फर्म विंडवर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इजराइल के लेबनान पर हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने के ऐलान का असर शिपिंग पर दिखने लगा है।
रविवार को केवल 12 जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 35 थी। कंपनी के मुताबिक, होर्मुज में एंट्री करने वाले 8 में से 5 जहाजों ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) भी बंद कर रखा था, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया।
ईरानी टीम ने मैच के बाद लॉकर रूम में मैसेज छोड़ा

ईरान की फुटबॉल टीम ने रविवार को बेल्जियम के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद विश्व कप मेजबान शहर लॉस एंजिल्स के लिए अपने ड्रेसिंग रूम में एक थैंक्यू मैसेज छोड़ा।
ईरान फुटबॉल महासंघ ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर टीम का मैसेज शेयर किया। इसमें लिखा था-
हजारों साल पुरानी फारसी सभ्यता से लेकर आज के आधुनिक ईरान तक, ईरान की भावना आज भी जीवित और अडिग है। हम गर्व के साथ लॉस एंजिलिस आए, सम्मान के साथ खेले और गरिमा के साथ यहां से जा रहे हैं। लॉस एंजिलिस, आपकी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद।
गौरतलब है कि लॉस एंजिलिस में ही ईरान के पहले दो मैच खेले गए। अब टीम अपना अगला मुकाबला मिस्र के खिलाफ सिएटल में खेलेगी।
यात्रा प्रतिबंधों के कारण ईरानी टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान मेक्सिको के सीमावर्ती शहर तिजुआना में ठहरी हुई है। वहां से खिलाड़ी हर मैच के लिए अमेरिका आ-जा रहे हैं। इस व्यवस्था को लेकर टीम के कोच और खिलाड़ियों ने पहले भी नाराजगी जताई है।
दावा- UAE से निकाले गए इजराइली अधिकारी, ईरानी हमले का डर था

इजराइल की टीवी चैनल चैनल 13 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के पूर्व प्रमुख रोनेन बार और उनकी पत्नी को हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा के दौरान वहां से सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रोनन और उनकी पत्नी को ईरान की ओर से संभावित हमले या नुकसान पहुंचाने की साजिश की चेतावनी मिली थी। रोनन एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने गए थे।
फिलहाल इस मामले पर न तो UAE और न ही ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
रोनेन बार के पद पर रहने के दौरान ही इजराइल में 7 अक्टूबर का हमला हुआ था। बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उस हमले को रोकने में सुरक्षा तंत्र नाकाम रहा। 2025 में उन्होंने शिन बेट प्रमुख का पद छोड़ दिया।
अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले दिन क्या-क्या तय हुआ?
अमेरिका-ईरान के बीच हुई पहली बातचीत को लेकर पाकिस्तान और कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसके मुताबिक-
1. पहली बैठक खत्म हुई, बातचीत आगे बढ़ेगी
अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में पहली बैठक हुई। सभी पक्षों ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही और कुछ प्रगति हुई है।
2. 60 दिन में अंतिम समझौते की कोशिश
दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करने का टारगेट तय किया है। इसके लिए एक रोडमैप तैयार कर ली गई है।
3. अब विशेषज्ञ स्तर की बातचीत शुरू होगी
पहली बैठक में बड़े राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई। अब परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और दूसरे तकनीकी मुद्दों पर विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें विस्तार से बातचीत करेंगी।
4. बातचीत की निगरानी के लिए नई कमेटी बनेगी
एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जो पूरी वार्ता प्रक्रिया पर नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़े। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस कमेटी को जानकारी देंगे।
5. अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संपर्क रहेगा
दोनों देशों के बीच एक सीधा संपर्क तंत्र (हॉटलाइन जैसी व्यवस्था) बनाया जाएगा। अगर कोई तनाव या गलतफहमी पैदा होती है तो दोनों पक्ष सीधे बात कर सकेंगे।
6. होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा पर जोर
हॉटलाइन जैसी व्यवस्था बनाने का एक बड़ा मकसद यह भी है कि होर्मुज से गुजरने वाले तेल और व्यापारिक जहाज सुरक्षित रहें और किसी टकराव का शिकार न हों।
7. लेबनान के लिए अलग निगरानी तंत्र बनेगा
लेबनान में संघर्ष दोबारा न बढ़े, इसके लिए एक डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाया जाएगा। यह व्यवस्था युद्धविराम के पालन पर नजर रखेगी और किसी भी तनाव को बढ़ने से रोकने की कोशिश करेगी।
8. इस हफ्ते भी बातचीत जारी रहेगी
बयान में साफ कहा गया है कि पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहेंगी।
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। यह वार्ता ऐसे समय हुई, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
पहले दौर की वार्ता में क्या रहा हासिल?
- दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार
अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप को मंजूरी दी। इससे आगे की बातचीत के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो गई है।
- उच्चस्तरीय समिति का गठन
वार्ता के दौरान एक हाई लेवल कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। यह समिति एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन और पूरी वार्ता प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
- तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू होगी
दोनों पक्षों ने तय किया कि तकनीकी स्तर की बातचीत तुरंत शुरू की जाएगी। यह चर्चा पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में जारी रहेगी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए सीधा संचार तंत्र
वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की गलतफहमी और टकराव को रोकने के लिए एक विशेष संचार चैनल बनाने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
- तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता पर चर्चा
वार्ता के दौरान होर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी चर्चा हुई। हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है।
- लेबनान में संघर्षविराम लागू रखने पर जोर
बैठक में लेबनान में सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने से जुड़े एमओयू प्रावधानों के पालन पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का फैसला किया गया।
- कतर और पाकिस्तान की अहम भूमिका
कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ के रूप में बातचीत को आगे बढ़ाया। दोनों देशों ने कहा कि वे वार्ता को रचनात्मक माहौल में जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
- ट्रंप और पेजेशकियन ने किया था एमओयू पर हस्ताक्षर
पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस्लामाबाद एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते में गारंटर की भूमिका निभाई थी।
- इस्राइल और हिजबुल्ला समझौते का हिस्सा नहीं
हालांकि लेबनान में संघर्षविराम लागू है, लेकिन इस्राइल और हिजबुल्ला अमेरिका-ईरान समझौते का हिस्सा नहीं हैं। इस्राइल ने कहा है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक रहेगी, जब तक सुरक्षा खतरे खत्म नहीं हो जाते।
- शांतिपूर्ण समाधान पर बनी सहमति
सभी पक्षों ने कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मध्यस्थ देशों ने उम्मीद जताई कि वार्ता के अगले दौर में और प्रगति होगी।
60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप क्या?
वार्ता के दौरान एक उच्चस्तरीय समिति के गठन पर सहमति बनी, जो पूरी बातचीत की राजनीतिक निगरानी करेगी। इस समिति को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस समिति को रिपोर्ट देंगे। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे मुद्दों के लिए अलग-अलग कार्य समूह भी बनाए जाएंगे। इससे यह संकेत मिला है कि दोनों पक्ष अब तकनीकी स्तर पर ठोस बातचीत की दिशा में बढ़ रहे हैं।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम करने की कोशिश हुई है?
वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। दोनों पक्षों ने एक सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई है, ताकि बातचीत के दौरान किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचा जा सके। यह तंत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। अमेरिकी चेतावनियों और ईरान के कड़े रुख के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
क्या लेबनान में युद्ध रोकने की दिशा में भी प्रगति हुई है?
वार्ता में लेबनान को लेकर भी अहम प्रगति दर्ज की गई। सभी पक्षों ने लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त कराने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने पर सहमति जताई। इस तंत्र में लेबनान गणराज्य भी शामिल होगा, जबकि कतर और पाकिस्तान सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि लेबनान में युद्धविराम से जुड़े सभी प्रावधानों का पालन हो। इसके अलावा स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता पूरे सप्ताह जारी रहेगी।
नेतन्याहू बोले- ट्रम्प के इशारों पर काम नहीं करता:लेबनान में इजराइली सेना हटाने से इनकार
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि लोग यह समझते हैं कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कहने पर काम करते हैं, लेकिन यह सच नहीं है।
यरुशलम में आयोजित एक समिट में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “अमेरिका में लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प वही करते हैं जो मैं उनसे कहता हूं। वहीं इजराइल में कुछ लोग सोचते हैं कि मैं वही करता हूं जो ट्रम्प चाहते हैं। लेकिन दोनों ही बातें गलत हैं।”
इजराइली पीएम ने कहा कि इजराइल और अमेरिका करीबी सहयोगी जरूर हैं, लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती।
नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जरूरत महसूस होगी तब तक इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत: दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों देश 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
2. वेंस बोले- मिलकर शांति के लिए काम करेंगे: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं और ट्रम्प अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदलना चाहते हैं।
3. ट्रम्प की ईरान को धमकी: ट्रम्प ने कहा कि ईरान लेबनान में अपने समर्थक हिजबुल्लाह को तुरंत रोके। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा।
4. लेबनान में मौतों का आंकड़ा 4,100 के पार: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत और 12,153 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो सकती है।
5. ईरान का दावा- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर मिलेंगे: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि समझौते की शर्तें तेहरान के पक्ष में हैं।
ईरान की धमकी के बाद होर्मुज से सिर्फ 12 जहाज गुजरे

शिपिंग डेटा फर्म विंडवर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इजराइल के लेबनान पर हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने के ऐलान का असर शिपिंग पर दिखने लगा है।
रविवार को केवल 12 जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या 35 थी। कंपनी के मुताबिक, होर्मुज में एंट्री करने वाले 8 में से 5 जहाजों ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) भी बंद कर रखा था, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया।
ईरानी टीम ने मैच के बाद लॉकर रूम में मैसेज छोड़ा

ईरान की फुटबॉल टीम ने रविवार को बेल्जियम के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद विश्व कप मेजबान शहर लॉस एंजिल्स के लिए अपने ड्रेसिंग रूम में एक थैंक्यू मैसेज छोड़ा।
ईरान फुटबॉल महासंघ ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर टीम का मैसेज शेयर किया। इसमें लिखा था-
हजारों साल पुरानी फारसी सभ्यता से लेकर आज के आधुनिक ईरान तक, ईरान की भावना आज भी जीवित और अडिग है। हम गर्व के साथ लॉस एंजिलिस आए, सम्मान के साथ खेले और गरिमा के साथ यहां से जा रहे हैं। लॉस एंजिलिस, आपकी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद।
गौरतलब है कि लॉस एंजिलिस में ही ईरान के पहले दो मैच खेले गए। अब टीम अपना अगला मुकाबला मिस्र के खिलाफ सिएटल में खेलेगी।
यात्रा प्रतिबंधों के कारण ईरानी टीम पूरे टूर्नामेंट के दौरान मेक्सिको के सीमावर्ती शहर तिजुआना में ठहरी हुई है। वहां से खिलाड़ी हर मैच के लिए अमेरिका आ-जा रहे हैं। इस व्यवस्था को लेकर टीम के कोच और खिलाड़ियों ने पहले भी नाराजगी जताई है।
दावा- UAE से निकाले गए इजराइली अधिकारी, ईरानी हमले का डर था

इजराइल की टीवी चैनल चैनल 13 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के पूर्व प्रमुख रोनेन बार और उनकी पत्नी को हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा के दौरान वहां से सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रोनन और उनकी पत्नी को ईरान की ओर से संभावित हमले या नुकसान पहुंचाने की साजिश की चेतावनी मिली थी। रोनन एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने गए थे।
फिलहाल इस मामले पर न तो UAE और न ही ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
रोनेन बार के पद पर रहने के दौरान ही इजराइल में 7 अक्टूबर का हमला हुआ था। बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उस हमले को रोकने में सुरक्षा तंत्र नाकाम रहा। 2025 में उन्होंने शिन बेट प्रमुख का पद छोड़ दिया।
अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले दिन क्या-क्या तय हुआ?
अमेरिका-ईरान के बीच हुई पहली बातचीत को लेकर पाकिस्तान और कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसके मुताबिक-
1. पहली बैठक खत्म हुई, बातचीत आगे बढ़ेगी
अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में पहली बैठक हुई। सभी पक्षों ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही और कुछ प्रगति हुई है।
2. 60 दिन में अंतिम समझौते की कोशिश
दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करने का टारगेट तय किया है। इसके लिए एक रोडमैप तैयार कर ली गई है।
3. अब विशेषज्ञ स्तर की बातचीत शुरू होगी
पहली बैठक में बड़े राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हुई। अब परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और दूसरे तकनीकी मुद्दों पर विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें विस्तार से बातचीत करेंगी।
4. बातचीत की निगरानी के लिए नई कमेटी बनेगी
एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जो पूरी वार्ता प्रक्रिया पर नजर रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़े। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार नियमित रूप से इस कमेटी को जानकारी देंगे।
5. अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संपर्क रहेगा
दोनों देशों के बीच एक सीधा संपर्क तंत्र (हॉटलाइन जैसी व्यवस्था) बनाया जाएगा। अगर कोई तनाव या गलतफहमी पैदा होती है तो दोनों पक्ष सीधे बात कर सकेंगे।
6. होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा पर जोर
हॉटलाइन जैसी व्यवस्था बनाने का एक बड़ा मकसद यह भी है कि होर्मुज से गुजरने वाले तेल और व्यापारिक जहाज सुरक्षित रहें और किसी टकराव का शिकार न हों।
7. लेबनान के लिए अलग निगरानी तंत्र बनेगा
लेबनान में संघर्ष दोबारा न बढ़े, इसके लिए एक डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाया जाएगा। यह व्यवस्था युद्धविराम के पालन पर नजर रखेगी और किसी भी तनाव को बढ़ने से रोकने की कोशिश करेगी।
8. इस हफ्ते भी बातचीत जारी रहेगी
बयान में साफ कहा गया है कि पूरे सप्ताह बर्गेनस्टॉक में तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहेंगी।







