प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दिन सुभाषितम शेयर करते हैं। बुधवार को भी उन्होंने एक सुभाषितम शेयर किया, जो बड़ा अर्थ रखता है। पीएम मोदी इस वक्त जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन में हैं। यहां उनकी मुलाकात आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी हो सकती है। ओमान की खाड़ी में तीन भारतीयों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते तल्ख हो गए हैं। ऐसे में पीएम मोदी का ट्रंप से मुलाकता से पहले यह संदेश काफी मायने रखता है। इसका मतलब समझते हैं।
पीएम मोदी ने ट्रंप से मुलाकात से पहले शेयर किया बड़ा मैसेज
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर सुभाषितम शेयर किया। यह संस्कृत का एक श्लोक है।
त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम् ।
प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दिन सुभाषितम शेयर करते हैं। बुधवार को भी उन्होंने एक सुभाषितम शेयर किया, जो बड़ा अर्थ रखता है। पीएम मोदी इस वक्त जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन में हैं। यहां उनकी मुलाकात आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी हो सकती है। ओमान की खाड़ी में तीन भारतीयों की मौत के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते तल्ख हो गए हैं। ऐसे में पीएम मोदी का ट्रंप से मुलाकता से पहले यह संदेश काफी मायने रखता है। इसका मतलब समझते हैं।
पीएम मोदी ने ट्रंप से मुलाकात से पहले शेयर किया बड़ा मैसेज
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर सुभाषितम शेयर किया। यह संस्कृत का एक श्लोक है।
त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम् ।
प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः।।
मोदी-ट्रंप मुलाकात से क्या रीसेट होंगे भारत-अमेरिका रिश्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को G-7 समिट में राष्ट्रपति ट्रंप से मिल सकते हैं। यह मुलाकात कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के ठीक एक हफ्ते बाद हो रही है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख के अनुसार, हो सकता है कि मोदी रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश करें। हालांकि, उनका काम मुश्किल है। अगर वह कोई शिकायत करते हैं, तो वह एक ऐसे देश से होगी जो ईरान युद्ध से कमजोर हो गया है और उस देश से होगी जिसने यह संघर्ष शुरू किया और भारत पर इसके असर को लेकर बेपरवाह रहा।
अगस्त में रूस से तेल खरीदने पर ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने के बाद भारत पहले से ही तेल सप्लाई को लेकर मुश्किलों का सामना कर रहा था। अब खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की सप्लाई पर और पाबंदियां लगने से तेल आयात करने वाला यह देश ईंधन संकट की कगार पर आ गया है। ट्रेड डील अभी भी नहीं हो पाई है।
भारत अमेरिका दोनों देशों की सरकारों को अंतहीन बातचीत में उलझकर अंतिम व्यापार समझौते में देरी करने के बजाय, डिजिटल अर्थव्यवस्था और परमाणु ऊर्जा जैसे साझा हितों को मज़बूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
अतुल केशप, यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल के प्रेसिडेंट
भारतीय नाविकों की मौत से तनावपूर्ण रिश्ते
ओमान की खाड़ी में नाविकों की मौत से रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की उम्मीदों को झटका लगा है। यह संभावित मुलाकात फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने की बातचीत होगी, जब मोदी ने ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत पर बधाई देने के लिए वॉशिंगटन की यात्रा की थी। तब दोनों के बीच काफी दोस्ताना माहौल दिखा था।
मिस्टर ट्रंप की वजह से उलटे-पुलटे हुए रिश्ते
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी, 2025 के बाद 16 महीनों में भारत ने देखा है कि अमेरिका के साथ उसके करीबी रिश्ते, अप्रत्याशित और कभी-कभी आक्रामक व्यवहार वाले मिस्टर ट्रंप की वजह से उलट-पुलट हो गए हैं।
साथ ही, ट्रंप प्रशासन भारत के बाजार खोलने और ऐसी इमिग्रेशन नीतियां लागू करने पर अड़ा हुआ है, जिनका अमेरिका में भारतीय छात्रों और कामगारों पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कई कदमों ने उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई है, उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई है और नेताओं के बीच आपसी तालमेल की अहमियत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
25 साल के तालमेल के बाद क्या अलग होंगे रास्ते
यूएस-इंडिया बिज़नेस काउंसिल के प्रेसिडेंट और भारत में अमेरिकी दूतावास में पूर्व ‘चार्ज डी अफेयर्स’ (कार्यवाहक राजदूत) अतुल केशप ने कहा-‘यह चिंता वाजिब है कि पिछले 25 वर्षों में दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच जो तालमेल बना था, वह अब ढीला पड़ रहा है और हो सकता है कि दोनों के रास्ते अलग-अलग होने लगें।’
पिछले साल जब मिस्टर ट्रंप ने कई देशों पर कई तरह के टैरिफ लगाए, तो भारत ने अमेरिका के साथ नए ट्रेड डील पर बातचीत में कड़ा रुख अपनाया, जिससे अमेरिकी अधिकारी लंबी बातचीत से परेशान हो गए। लेकिन हाल के समझौतों जैसे कि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान हुए क्रिटिकल मिनरल्स के समझौते से रिश्ते सुधारने की कुछ कोशिशें दिख रही हैं।
बातचीत के दौरान उस ट्रेड डील पर भी चर्चा हो सकती है जिस पर दोनों देश पिछले एक साल से काम कर रहे हैं।







