पाटलिपुत्र जंक्शन पर पुलिस पर हमला, रेलवे ट्रैक पर बवाल प्लांड था। प्लानिंग करने वाले सिपाही भर्ती कैंडिडेट्स के बीच मौजूद थे। वह कैंडिडेट्स को बवाल के लिए उकसा रहे थे। पथराव की शुरुआत जिन लड़कों ने की उनके मुंह ढंके हुए थे। पैरों में चप्पल भी नहीं थी। देखते ही देखते बवाल बढ़ गया और अभ्यर्थियों पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोलियां तक चलानी पड़ीं..। पड़ताल के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि रेलवे स्टेशन टी-स्टॉल से लेकर कैंटीन में सामानों की लूटपाट करने वाले भी कैंडिडेट्स नहीं थे।
पाटलिपुत्र रेल थानाध्यक्ष संतोष ने भी बताया कि मामले में स्टूडेंटस की डिमांड पूरी होने के बाद भी पथराव करना सवाल खड़ा करता है। कोचिंग के कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
रिपोर्टर – कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
संतोष – 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, बाकी को चिन्हित किया जा रहा है।
रिपोर्टर – कैसे आइडेंटिफाई किया जा रहा है?
संतोष – पत्थर चलाने का वीडियो आया है, इसमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो हाफ पैंट में हैं, इन लोगों के पास बैग भी नहीं है और पैरों में चप्पल भी नहीं थी। इन लोगों की जांच की जा रही है।
रिपोर्टर – क्या यह कोई साजिश की आशंका है?
संतोष – पूछताछ की जा रही है, साजिश है तो सामने आ आएगी।
रिपोर्टर – जांच में अब तक क्या मिला है?
संतोष – जांच की जा रही है, बाहरी लोगों का हाथ हो सकता है।
रिपोर्टर – आपको ऐसा कैसे लग रहा है?
संतोष – हो सकता है कि कोई छात्र नेता बनना चाह रहा हो और उसने सभी को उकसाया हो।
रिपोर्टर – पुलिस को कुछ तो इनपुट मिला होगा?
संतोष – ये लोग अपनी मांग लगातार बदल रहे थे। पहले परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए ट्रेन की मांग की गई, यह पूरी हुई तो डिमांड बदल गई। फिर एग्जाम कैंसिल कराने की मांग होने लगी। डिमांड पूरी होने के बाद बवाल करना बड़ा सवाल है।
रिपोर्टर – क्या उनका मकसद बवाल करने का था?
संतोष – हां, यह मान कर चलिए कि उनका मकसद बवाल करने का ही था। पहले इनकी ट्रेन की डिमांड थी, लेकिन कुछ देर के बाद वह बदल गई। उपद्रव करने वाले 2 पक्ष में बंट गए थे। ऐसा लग रहा था कि पूरी तरह से प्लानिंग है। पहले ट्रेन की डिमांड थी। ट्रेन दे दी गई, तो फिर परीक्षा कैंसिल करने की डिमांड होने लगी।
मिडियाइन्वेस्टिगेशन टीम ने घटना की सूचना पर मौके पर पहुंचे सिपाही अनीश से बात की। वह भी शुरुआती जांच के आधार पर इस मामले में किसी बड़ी साजिश की आशंका जता रहे हैं।
उन्होंने साफ कहा कि जिस तरह से वीडियो में लोग दिख रहे हैं, वह कभी छात्र नहीं हो सकते हैं। छात्र अचानक से ऐसा नहीं करेगा, वह भी तब जब उनकी ट्रेन की डिमांड भी मान ली गई हो।
रिपोर्टर – क्या लग रहा है आपको स्टूडेंट्स का आक्रोश था या कोई साजिश?
अनीश – इस घटना के पीछे बड़े-बड़े लोगों का खेल हो सकता है।
रिपोर्टर – क्यों, ऐसा क्या देखा आपने?
अनीश – ऐसी घटना के पीछे बड़े-बड़े लोगों का दिमाग लगा रहता है।
रिपोर्टर – क्या कोई साजिश हो सकती है?
अनीश – किसी ना किसी ने साजिश जरूर की होगी। इसके पीछे किसी का दिमाग जरूर है, तभी यह सब हुआ है।
रिपोर्टर – जांच पड़ताल में तो कुछ इनपुट मिला होगा?
अनीश – हम लोगों को यह नहीं पता, किसने कराया है, लेकिन इसके पीछे बड़ा दिमाग लगा हुआ है।
रिपोर्टर – वो लोग क्या मांग कर रहे थे?
अनीश – कह रहे थे स्पेशल गाड़ी से हमें एग्जाम सेंटर तक भेजिए।
रिपोर्टर – फिर क्या हुआ?
अनीश – मांग पूरी हुई इसके बाद भी फिर पथराव शुरू हो गया।
रिपोर्टर – आक्रोशित कैंडिडेट्स और उग्र हुए होते तो आम पैसेंजर्स को भी नुकसान होता?
अनीश – अगर शांत नहीं कराया जाता तो बड़ी घटना हो जाती, ट्रेन भी जला सकते थे, इससे आम यात्री भी चपेट में आ जाते।
रिपोर्टर – मामला कैसे शांत कराया गया?
अनीश – पहले तो फोर्स ही नहीं थी, हम लोग आए तो लड़कों को दौड़ाकर दीघा स्टेशन तक खदेड़ा गया, फिर यहां से बवाल शांत हुआ है।
हमने बवाल के दौरान रेलवे स्टेशन पर मौजूद ऑटो ड्राइवर से बात कर घटना के बारे में जानने की कोशिश की। उनका कहना था कि मामला शांत हो गया नहीं तो बड़ा बवाल हो सकता था। स्टेशन पर उस वक्त 2 पैसेंजर ट्रेनें खड़ी थीं।
रिपोर्टर – क्या हो गया था यहां पर?
सोहन – बहुत बड़ा बवाल हो गया था, मामल शांत नहीं होता तो बर्निंग ट्रेन हो जाती।
रिपोर्टर – कब से शुरू हुआ?
सोहन – रात को 10 बजे से बवाल चल रहा था, मामला शांत था अचानक पथराव हो गया।
रिपोर्टर – शुरू कहां से हुआ?
सोहन – परीक्षा देने वाले लड़के सीमांचल एक्सप्रेस पकड़ने आए थे। उन लोगों ने स्टेशन पर ट्रेन को रोक लिया, पूरी रात ट्रेन खड़ी रही। उसके बाद अधिकारी पहुंचे, फिर पथराव शुरू हो गया। बहुत बच्चों की परीक्षा भी छूट गई। बच्चे अररिया, कटिहार, भागलपुर में एग्जाम देने वाले थे।
रिपोर्टर – बाहर के भी लोग थे क्या?
सोहन – अब पता नहीं चल रहा था, कौन परीक्षा देने वाला है और कौन बाहर जाने वाला या लोकल वो लोकल की भीड़ थी।
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम मामले को शांत कराने वाली टीम में शामिल पुलिस कर्मियों से भी बात की है। हमारी सिपाही राधेश्याम सिंह से भी बात हुई।
रिपोर्टर – पुलिस वालों से बवाल किस प्लेटफॉर्म पर हुआ था?
राधेश्याम – एक नंबर प्लेटफॉर्म पर बवाल हुआ। एक दम आगे की तरफ, जैसे पहले से प्लानिंग थी।
रिपोर्टर – बवाल कैसे हो गया?
राधेश्याम – देखिए, लड़के हैं बेगूसराय के और एग्जाम सेंटर दूर पड़ गया। भभुआ का लड़का है तो उसका सेंटर पूर्णिया पड़ गया है। बस आने-जाने के चक्कर में बवाल हो गया।
रिपोर्टर – हां, सेंटर दूर-दूर पड़ गए होंगे इसलिए?
राधेश्याम – बहुत बच्चे तो एग्जाम नहीं जे पाए होंगे, जो चालाक हैं, वह पहले ही निकल गए।
रिपोर्टर – किसी गाड़ी पर कब्जा किया था क्या?
राधेश्याम – हां, पत्थर भी चला रहे थे।
रिपोर्टर – फायरिंग भी हुई है?
राधेश्याम – हां, आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे।
इन्वेस्टिगेशन टीम ने पाटलिपुत्र जंक्शन पर स्टॉल के वेंडर रुपेश से भी बात की है। वह घटना के समय स्टॉल पर थे। बवाल हुआ तो जान बचाकर वहां से भागे।
रिपोर्टर – इतना बड़ा मामला आखिर कैसे हुआ?
रूपेश – देखिए, यहां काफी हंगामा हुआ। लूटपाट भी की गई। जहां-जहां लोग पहुंचे, वहां तोड़फोड़ की गई। हमारी दुकान को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
रिपोर्टर – कुछ लोग बाहरी भी लग रहे थे क्या?
रुपेश – अब स्टेशन है तो सभी लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
रिपोर्टर – यानी आपको लग रहा है कि बाहरी लोग भी शामिल थे?
रूपेश – हां, कुछ लोग बाहरी लग रहे थे। लेकिन पूरी गलती स्टूडेंट्स की नहीं है।
रिपोर्टर – लूटपाट कौन किसने की है, बाहरी लोग या स्टूडेंट्स?
रूपेश – मैं तो स्टॉल छोड़कर भाग गया था, अगर यहां रहता तो सब मार डालते।
रिपोर्टर – इसमें गलती किसकी है?
रूपेश – स्टूडेंट्स की गलती नहीं, बहाली नहीं निकल रही, नौकरी है ही नहीं, अभी जाने की व्यवस्था नहीं थी इसलिए गुस्सा हो गए। लेकिन इस तरह हंगामा करना भी ठीक नहीं है।
रिपोर्टर – पुलिस ने भी कार्रवाई की?
रूपेश – हां, पुलिस आई थी, काफी भगदड़ मची। अगर समय पर काबू नहीं होता तो कुछ भी हो सकता था। स्टेशन का माहौल बहुत खराब हो गया था।
रिपोर्टर – शुरुआत आखिर कहां से हुई? रूपेश – उधर आगे की तरफ से शुरू हुआ। पहले से ही रेलवे ट्रैक पर पत्थर जमा थे। उसके बाद अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। प्लेटफॉर्म पर पत्थर ही पत्थर हो गए थे।
रिपोर्टर – दुकानों को भी नुकसान पहुंचा? रूपेश – हां, कई दुकानों में तोड़फोड़ हुई। बाहर की दुकानों को ज्यादा नुकसान पहुंचा। हम लोग डर से दुकान छोड़कर जान बचाने के लिए भाग गए।
न्वेस्टिगेशन में यह इनपुट मिला कि पथराव के दौरान जब पुलिस एक्शन में आई तो भगदड़ मच गई। इस दौरान स्टूडेंटस तेजी से नहर की तरफ भागने लगे। बाहरी स्टूडेंट्स को पता नहीं था कि वहां नहर है, जिसमें पानी काफी अधिक है।
अंधेरे में स्टूडेंट्स भागे और नहर में जाकर डूबने लगे। रेलवे लाइन के किनारे जुग्गी झोपड़ी में रहने वालों को जब उनकी चीख सुनाई पड़ी तो वह उन्हें नाले से निकालकर उनकी जान बचाई। कई लड़के और लड़कियों की जान बचाने वाली सुनैना को भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने ढूंढ निकाला।
रिपोर्टर – जब बवाल हुआ था, तो आप वहां थीं?
सुनैना – हां, जब हल्ला हुआ तो हम लोग यहीं थे, अगर हम लोग नहीं होते तो बड़ी घटना हो जाती।
रिपोर्टर – कैसे हुआ था?
सुनैना – मैं सोई हुई थी, तभी हल्ला हुआ। जब मैं उठी तो देखा कि भगदड़ मची हुई है। सभी पानी में कूद रहे थे।
रिपोर्टर – कौन लोग थे जो नाले में कूद रहे थे?
सुनैना – पब्लिक थी और परीक्षा देने वाले बच्चे थे, बहुत बच्चे डूबने लगे थे।
रिपोर्टर – फिर आपने उन्हें कैसे निकाला?
सुनैना – इधर कुछ तैरने वाले लोग तैयार हुए और उन्हें नाले से बाहर निकाला।
रिपोर्टर – आपने भी मदद की किसी को बचाने में क्या?
सुनैना – दो लड़कों और एक लड़की को तो मैंने ही बचाया है।
रिपोर्टर – नाले का पानी बहुत गहरा है क्या?
सुनैना – हां, डूबने लायक बहुत है, थोड़ा सा भी अंदर जाते तो फिर डूब ही जाते। नदी की तरह गहरा नाला है।
रिपोर्टर – कोई डूब तो नहीं गया इसमें?
सुनैना – नहीं, सबको बचा लिया गया, कुछ लोगों का बैग नाले में डूब गया, मिला ही नहीं।
रिपोर्टर – और कौन लोग थे जिन्होंने लोगों की जान बचाई?
सुनैना – सब इस समय कमाने के लिए घर से बाहर काम पर गए हैं।
रिपोर्टर – कितने लोगों ने इसमें छलांग लगाई थी?
सुनैना – 20-25 लोग इसमें कूदे थे, जिनको हम लोगों ने बचाया है।
इन्वेस्टिगेशन टीम ने RPF के दरोगा के बी सिंह से भी बात की। वह भी घटना के समय से ही मामले की छानबीन में जुटे हैं। वह इस मामले में कई सवाल का जवाब नहीं ढूंढ पा रहे हैं।
के बी सिंह ने बताया कि यहां से अररिया, किशनगंज और कटिहार जाने वाले परीक्षार्थी आए थे। इन लोगों की परीक्षा पहली पाली में सुबह 8 बजे से थी। इनका प्लान था कि सीमांचल ट्रेन पकड़कर सुबह 4 बजे तक स्टेशन पहुंच जाएंगे।
सीमांचल एक्सप्रेस जब आई तो कुछ लोग ट्रेन में चढ़ गए, जबकि कुछ लोग नहीं चढ़ पाए। इसके बाद जो छात्र ट्रेन में नहीं चढ़ सके, वे दूसरी ट्रेन की मांग करने लगे। इसी के बाद मामला धीरे-धीरे बिगड़ता चला गया।
बच्चों का माइंडसेट था कि जब उनका एग्जाम छूट गया है तो अब कोई दूसरा भी परीक्षा देने नहीं जाए। स्थिति को देखते हुए एक परीक्षा स्पेशल ट्रेन मंगाई गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी
आगे ट्रैक और प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर प्रदर्शन करने लगे। पांच लोगों को पकड़ा गया है, जो भीड़ का हिस्सा थे। फिलहाल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है।
5000 स्टूडेंट्स, 500 पुलिस वाले, 6 की गिरफ्तारी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्टेशन पर 5 हजार से अधिक स्टूडेंट्स की भीड़ थी। घटना के बाद लगभग 500 पुलिस वालों की फोर्स बुला ली गई। रेल और पुलिस के अफसरों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
इसके बाद भी महज 6 स्टूडेंट्स को उपद्रवी बताकर गिरफ्तार किया गया। सवाल यह है कि क्या यही स्टूडेंट्स पूरे बवाल की जड़ हैं। इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए उन स्टूडेंट्स से मिलने की कोशिश की जिन्हें पुलिस ने दंगाई बताकर गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए पांचों स्टूडेंट्स को पुलिस ने थाने में रखा था। काफी इंतजार के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टी स्टूडेंट्स तक पहुंची जिन्होंने अलग कहानी सुनाई..।
पुलिस ने जिन्हें पत्थरबाज बताकर गिरफ्तर किया उनकी सुनिए..
जब स्टूडेंट्स के पास पहुंची तो पुलिस वाले अलर्ट हो गए। वह मना करने लगे कि स्टूडेंट्स से कोई बात नहीं करनी है क्योंकि वह झूठी कहानी सुना रहे हैं। लेकिन हमें स्टूडेंटस के मुंह से सुनना था कि उनकी क्या कहानी है…
रिपोर्टर – आप लोग कहां के रहने वाले हैं?
स्टूडेंट्स – हम लोग आरा के रहने वाले हैं। परीक्षा देने के लिए निकले थे। हमें मुजफ्फरपुर पहुंचना था, वहीं से आगे की ट्रेन पकड़नी थी। लेकिन यहां अचानक प्रदर्शन और हंगामा शुरू हो गया। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हम लोग कुछ समझ पाते पुलिस ने हमें ही दबोच लिया। हम लोगों ने कोई गलती नहीं की थी, इसलिए हम तो वहां से भागे भी नहीं।
रिपोर्टर – फिर क्या हुआ?
स्टूडेंट्स – हम लोग तो थाने के पास खड़े होकर माहौल देख रहे थे। इतने में पुलिस ने हमें भी पकड़ लिया। असली उपद्रव करने वाले करीब 500 लोग थे, जो पत्थरबाजी और हंगामा कर रहे थे। लेकिन जैसे ही पुलिस पहुंची, वो लोग मौके से भाग निकले। हम लोग भागे नहीं, इसलिए हमें ही पकड़कर अंदर कर दिया गया। अगर हम लोग भी हंगामा कर रहे होते, तो बाकी लोगों की तरह हम भी भाग जाते। लेकिन हम तो सिर्फ परीक्षा देने आए छात्र हैं। बेवजह हमें पकड़ लिया गया। अब हमारी परीक्षा भी छूट गई और हम यहां फंसे हुए हैं।
बिहार के 500 सेंटर्स पर एग्जाम, पुलिस के इंतजाम जीरो
सिपाही भर्ती के लिए 4 हजार पदों के लिए 16 लाख कैंडिडेट्स एग्जाम दे रहे हैं। ये परीक्षा 17 जून तक चलेगी। पुलिस को पहले से पता था कि स्टेशन पर इस तरह के हालात बन सकते हैं, लेकिन किसी तरह का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था। नतीजा पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर दिखाई दिया।
रातभर सीमांचल एक्सप्रेस और मधुबनी एक्सप्रेस स्टूडेंट्स के बवाल के बीच पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर खड़ी रही यात्री डरे सहमे रहे। अगर यहां कोई बड़ा बवाल हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता?
पुलिस को जरूरत थी कि इस तरह की एग्जाम से पहले अपने इंतजाम को ठीक से टटोल ले, ताकि इस तरह के हालात ना बन पाएं। कैंडिडेट्स को भी आखिरी समय पर एग्जाम के लिए निकलने की जगह एक दिन पहले या समय से निकला चाहिए।
इन्वेस्टिगेशन का पहला आधार
इन्वेस्टिगेशन टीम ने सबसे पहले ऐसे लोगों से बात की जिन्हें घटना की सूचना सबसे पहले दी गई। स्टेशन पर मचे बवाल की शुरुआत से ही यह मामले को हैंडल कर रहे थे। इसमें कॉन्स्टेबल से लेकर थाना प्रभारी तक शामिल हैं। ऐसे रेल स्टाफ से भी बात की गई जो घटना के चश्मदीद रहे हैं।
पुलिस का इनपुट- बवाल प्लांड था
मामले में कई तरह के सवाल हैं। कहीं न कहीं से मामला प्लांड भी हो सकता है। क्योंकि वीडियो में पत्थर चलाते ऐसे लोग भी दिख रहे हैं जो स्टूडेंट्स नहीं लग रहे हैं। स्टूडेंट्स मुंह पर कपड़ा बांधकर पत्थर क्यों फेकेंगे।
प्लानिंग में ऐसा भी लगता है कि पहले छात्रों ने कहा कि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए ट्रेन दी जाए। प्रशासन ने उनकी बात मानी और ट्रेन की व्यवस्था भी कर दी गई, लेकिन थोड़ी ही देर में माहौल बदल गया।
अचानक परीक्षा रद्द कराने की मांग उठने लगी और देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि पत्थरबाजी शुरू हो गई।
रेलवे ट्रैक से लेकर स्टेशन तक जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान स्टूडेंट्स भी दो गुट में बंट गए। एक गुट बोल रहा था- एग्जाम कैंसल हो और दूसरा गुट उसका विरोध कर रहा था। ऐसे में शक है कि इस बवाल के पीछे भी किसी की साजिश हो सकती है।
इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। कोचिंग के कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वीडियाे फुटेज से अन्य स्टूडेंट्स की पहचान की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक जांच में कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं जो हाफ पैंट में थे और उनके पास न बैग था, न पैरों में चप्पल, न ही परीक्षा से जुड़ा कोई सामान। ऐसे में पुलिस को शक है कि इस हंगामे में कुछ बाहरी लोग भी शामिल हो सकते हैं।







