‘तीन दिन हम डीजीपी को फोन किए। न फोन उठाए और न कॉल बैक आया है। अब पता नहीं क्या कर रहे हैं।’ उपरोक्त बयान किसी आम आदमी ने नहीं, बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री ने दिया है। इस बयान के आईने में आप बिहार के अंदर चल रही व्यवस्था में किसी मंत्री के पावर का अंदाजा लगा सकते हैं। एक मंत्री बिहार पुलिस के डीजीपी को फोन करता है। एक दिन नहीं, दो दिन नहीं लगातार तीन दिन। वो उधर से जवाब नहीं देते। उसके बाद उधर से कॉल बैक नहीं करते। ये मंत्री मदन सहनी है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता भी हैं। इन्होंने एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान यहां तक कह दिया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी कैसे लागू होगी। यानी इनका मानना ये है कि बिहार में अभी शराबबंदी कानून है ही नहीं।
मंत्री ने क्या कहा?
मंत्री मदन सहनी ने रविवार को एक निजी चैनल से बातचीत में हाल में एक गांजा तस्कर की गाड़ी को पुलिस की गाड़ी द्वारा एस्कॉर्ट करने की घटना पर कहा कि ये बात जो आप हमसे जानना चाह रहे हैं। ये तो बिहार के एक-एक लोग बोल रहे हैं। जो भी शराबबंदी में विफलता मिला है। या इसमें कहीं न कहीं जो लोग बाहर से विदेशी शराब लेकर चले आते हैं। यहां लोकल स्तर पर बना लेते हैं। उसमें पुलिस की संलिप्तता सामने आती ही रहती है। ये कोई पहली घटना नहीं है। लेकिन उसके बावजूद भी हम लोग प्रयास कर रहे हैं
उत्पाद विभाग की बैठक
मंत्री मदन सहनी ने आगे कहा कि उन्होंने कहा कि हम लोगों ने 11 जून को विभाग के साथ मिलकर बैठक भी की है। उसमें रेलवे और एयरपोर्ट और एसएसबी के सभी पदाधिकारी आए थे। हम चाह रहे थे कि उसमें डीजीपी भी शामिल हों। लेकिन हम लोग एक समीक्षा बैठक में निर्णय लिए हैं कि डीजीपी अपने स्तर से। पुलिस के बड़े पदाधिकारी के साथ समीक्षा करते हैं, विधि व्यवस्था पर। उसमें इसको भी शामिल करें, जो मद्य निषेध, कैसे बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होगा। और इसमें पुलिस कितने तत्परता से इसमें सहयोग करेगा। इस पर भी उनको समीक्षा करना चाहिए। अभी तक ऐसा हमको नहीं लगता है कि होता होगा। ये तो डीजीपी जानें करते हैं कि नहीं करते हैं।
बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल?
मंत्री मदन सहनी ने बिहार पुलिस पर बहुत गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर डीजीपी बैठक करते, तो इतनी पुलिस बदनाम नहीं होती। और इतने बड़े स्तर पर विदेशी और देसी शराब यहां नहीं मिलता। कहीं न कहीं पुलिस की संलिप्तता है और इसको देखना पड़ेगा। इसमें सुधार करना है कि नहीं करना है। ये डीजीपी को देखना पड़ेगा। उनका मंशा है कि नहीं, ये तो वही जानें। पुलिस की मिलीभगत शराब माफिया से एक- एक आम लोग बोल रहे हैं न। जब महिलाओं के कहने पर हमारे पूर्व सीएम नीतीश कुमार जी ने इसको लागू किया। वो महिलाएं बोल रही हैं कि पुलिस की मिलीभगत के कारण ये विफल हो रहा है। अभी तक जितने पुलिस वाले पकड़ाए हैं। जो लोग और पुलिसवाले गांजा की गाड़ी को एस्कॉर्ट कर रहे हैं। ये तो बड़ा गंभीर आरोप है ही न।
डीजीपी फोन नहीं उठाते- मंत्री
बातचीत के अंत में उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिसे सुनकर कोई भी चौंक जाएगा। मंत्री का फोन पुलिस के वरीय पदाधिकारी नहीं उठाते हैं। वह भी तीन बार करने के बाद। उन्होंने कहा कि गलती करने वाले पुलिस पर कितनी कार्रवाई होती है, ये पुलिस के अधिकारी जानें। इसमें दो स्तर है। एक तो मद्य निषेध का अपना एक्साइज सुपरिटेंडेंट हैं। इंस्पेक्टर है। दारोगा है। आंकड़ा देखिए तो हमारे पास सिमित संसाधन है। सिमित लोग हैं। उसके बाद भी जो हम लोग पकड़ रहे हैं। हमारे पास पुलिस का भी आंकड़ा है और मद्य निषेध विभाग का भी आंकड़ा है। इनसे ज्यादा हम लोगों के विभाग के लोग पकड़ रहे हैं। इसी से स्पष्ट हो रहा है कि पुलिस कितना सहयोग कर रही है। तीन दिन हम डीजीपी को फोन किए। न फोन उठाए और न कॉल बैक आया है। अब पता नहीं क्या कर रहे हैं।







