रिशु श्री टेंडर माफिया के साथ बिहार के कई अधिकारी और इंजीनियरों के कनेक्शन ने जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है। एसवीयू ने बुधवार को तीनों अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया। पूछताछ के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि इस मामले में आईएएस संजीव हंस की भी तलाश की जा रही है।
एसवीयू की ओर से गिरफ्तार अफसरों में मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह शामिल है। मुमुक्षु चौधरी अभी वित्त विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित है। जबकि तारिणी दास, चीफ इंजीनियर (बर्खास्त हुए और फिर कांट्रैक्ट पर बहाल भी) है। वहीं उमेश कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग में कार्यपालक अभियंता के पद कर कार्यरत हैं।
तीनों के ठिकाने पर 2024 में हुई थी छापेमारी
इन तीनों के ठिकानों पर ईडी ने पिछले साल छापेमारी की थी जिसमें 11.50 करोड़ से अधिक की राशि बरामद हुई थी। इसके पहले एसवीयू इसी मामले में टेंडर घोटाले के किंगपिन रिशुश्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार कर चुकी है। रिशुश्री से कनेक्शन जुड़ने पर दो आईएएस अधिकारियों को सरकार पहले ही सस्पेंड कर चुकी है। जबकि कई अधिकारियों पर निलंबन की तलवार चल चुकी है।
तारिणी, मुमुक्षु और उमेश के विरुद्ध दर्ज है प्राथमिकी
इस छापेमारी के बाद विशेष निगरानी इकाईॉ ने तारिणी प्रसाद, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह के विरुद्ध पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए मुमुक्षु ने रिशुश्री की कंपनियों को रिश्वत के बदले करोड़ रुपये के ठेके आवंटित किए थे। तारिणी दास पर भी पैसे लेकर नकद कमिशन लेने का आरोप लगा जिसके बाद उनकी विस्तारित सेवा भी खत्म कर दी गई। वहीं उमेश कुमार सिंह पर ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ मिलकर संगठित भ्रष्टाचार तंत्र खड़ा करने का आरोप लगा। रिशु श्री की कंपनी समेत अन्य एजेंसियों के बिलों के भुगतान में से एक निश्चित हिस्सा उमेश कुमार सिंह तक पहुंचता था।







