बिहार की राजनीति में सरकारी खर्च और सुविधाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट जारी कर एनडीए सरकार पर निशाना साधा है. आरजेडी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश का खजाना खाली होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सरकार के मंत्री और अधिकारियों के लिए महंगी गाड़ियों की खरीद की जा रही है.
आरजेडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि बीजेपी सरकार के मंत्री अब 37 लाख रुपये तक की गाड़ी खरीद सकते हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि इसी तरह अन्य पदाधिकारियों के लिए भी वाहन खरीद की सीमा बढ़ाई गई है. आरजेडी ने इसे जनता के पैसों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार पर हमला बोला है.
RJD ने साधा NDA सरकार पर निशाना
आरजेडी ने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि एनडीए के मंत्रियों को ऐशो-आराम की जरूरत है, चाहे प्रदेश के लोगों को पेंशन और वेतन मिले या नहीं. पार्टी ने दावा किया कि सरकार एक तरफ आर्थिक स्थिति खराब होने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी सुविधाओं पर खर्च बढ़ाया जा रहा है. आरजेडी की ओर से शेयर किए गए पोस्ट में अलग-अलग पदों के लिए वाहन खरीद की राशि का विवरण भी दिया गया है. हालांकि, इन दावों को लेकर सरकार या बीजेपी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
आरजेडी के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं. कई यूजर्स ने सरकार पर सवाल उठाते हुए खर्चों को लेकर नाराजगी जताई. कुछ लोगों ने बिहार में जमीन विवाद और कथित कब्जे जैसे मुद्दों को भी उठाया. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि बिहार में जमीन से जुड़े मामले सबसे बड़ा मुद्दा हैं और चंपारण-मोतिहारी क्षेत्र इससे प्रभावित है. वहीं कुछ लोगों ने राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए.।
सरकारी खर्च को लेकर आमने-सामने सियासी दल
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों और खर्चों को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष विकास और प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देता रहा है. वाहनों की खरीद को लेकर उठे इस मुद्दे ने एक बार फिर सरकारी खर्च बनाम जनकल्याण की बहस को हवा दे दी है.







