नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भारत के दौरे पर हैं। यहां उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की। हालांकि, इन मुलाकातों के बीच खनाल ने ऐसी बात कह दी, जो भारत की विदेश नीति के लिहाज से ठीक नहीं है। जब उनसे कैलाश मानसरोवर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने भारत की जमीन (कालापानी और लिपुलेख) को नेपाल का बता दिया।
कालापानी-लिपुलेख को अपना बताया
शिशिर खनाल ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा कई अलग-अलग बॉर्डर पॉइंट्स से होती है। बहुत से लोग नेपाल के रास्ते यात्रा करते हैं। हमारी चिंता कालापानी और लिपुलेख इलाके से जुड़ी भारत और चीन के बीच समझौते को लेकर है। हम लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि यह जमीन हमारी है और नेपाल की सहमति के बिना दोनों देश अकेले ये समझौते नहीं कर सकते। हमने दोनों देशों को डिप्लोमैटिक नोट समेत अपनी बातचीत के जरिए यह बात बहुत साफ तौर पर बता दिया है।
कोई भी सीमा जटिल नहीं होती
नेपाल के विदेश मंत्री ने आगे कहा कि जब हम खुले दिल, समझदारी और आपसी सम्मान के साथ बैठते हैं, तो कोई भी समस्या बहुत बड़ी नहीं होती और कोई भी सीमा बहुत जटिल नहीं होती। आइए, हम ऐसी साझेदारी बनाएं जो अतीत की चिंताओं से बंधी न हो, बल्कि हमारे साझा भविष्य की बड़ी उम्मीदों और बेहतर संभावनाओं से प्रेरित हो।
कॉकरोच आंदोलन पर क्या बोले
शिशिर खनाल ने नेपाल के GenZ आंदोलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सितंबर में एक आंदोलन हुआ। उस राजनीतिक बदलाव की वजह से ही हम सत्ता में आए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत में जो हो रहा है, उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मैं नेपाल और नेपाल-भारत संबंधों के बारे में बात करना ज्यादा पसंद करूंगा।
टेबल पर बैठकर बात करेंगे- खनाल
अग्निवीर योजना पर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि भर्ती त्रिपक्षीय समझौते के जरिए की जाती थी। हालिया बातचीत में हम उन चर्चाओं में नहीं गए हैं, जब भारत सरकार को लगता है कि यह जरूरी है, तो किसी भी अन्य मुद्दे की तरह, हम टेबल पर बैठकर इस मुद्दे को भी उठाने में खुश हैं।







