अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि भारत के साथ संबंध हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन के नजरिए का आधार बना हुआ है. उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देश रिश्तों के विकास और मजबूती को लेकर कुछ रोमांचक और नई घोषणाएं करेंगे. नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के सपोर्ट एनेक्स भवन के उद्घाटन से पहले सभा को संबोधित करते हुए मार्को रुबियो ने इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, ‘यह भारत और अमेरिका के बीच इस महत्वपूर्ण रिश्ते के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. दोनों देशों के बीच संबंध इंडो-पैसिफिक को लेकर हमारी रणनीति की आधारशिला हैं.’ रविवार 24 मई 2026 को मार्को रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच अहम बैठक होने वाली है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई फैसले लिए जा सकते हैं.
रुबियो ने याद किया कि जनवरी 2025 में अमेरिकी विदेश सचिव पद की शपथ लेने के बाद उनकी पहली बड़ी बैठक वॉशिंगटन डीसी में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जिसमें भारत भी शामिल था. क्वाड बैठक के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर और रुबियो की मुलाकात भी हुई थी. यह न केवल रुबियो, बल्कि दूसरे कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन की भी पहली प्रमुख विदेश नीति बैठक थी. रुबियो ने कहा, ‘बहुत से लोग यह नहीं जानते कि शपथ लेने के तुरंत बाद मैं विदेश विभाग पहुंचा और मेरी पहली आधिकारिक बैठक क्वाड की थी. हमने इसे दोबारा जारी रखने का फैसला किया और इस बार इसे यहां आयोजित किया. हम ऐसा सिर्फ क्वाड ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता के कारण नहीं कर रहे, बल्कि इसलिए भी कि यह अमेरिका की इंडो-पैसिफिक नीति में भारत की अहम भूमिका का ठोस संकेत है.’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध भी भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत कर रहे हैं.
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप में गहरा जुड़ाव
मार्को रुबियो ने कहा पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच संबंध पहले कार्यकाल से ही मजबूत रहे हैं, जब राष्ट्रपति ट्रंप को भारत आने का अवसर मिला था. यह रिश्ता अब दूसरे कार्यकाल में भी जारी है और दोनों नेताओं के बीच गहरा जुड़ाव साफ दिखाई देता है. ये दोनों गंभीर नेता हैं, जो केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी कई ऐसे क्षेत्रों में गहरी हुई है, जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आते, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण और स्थायी हैं. रुबियो ने बताया कि व्यापारिक संबंधों का विस्तार हुआ है और भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यासों के जरिए सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत हुई है. इसके अलावा एक व्यवस्थित और सुरक्षित कांसुलर व्यवस्था इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए जरूरी है. इसी उद्देश्य से हम ‘अमेरिका फर्स्ट’ वीजा शेड्यूलिंग टूल शुरू कर रहे हैं, जो व्यापारिक पेशेवरों को प्राथमिकता देगा. अपने संबोधन के अंत में रुबियो ने भारत-अमेरिका साझेदारी को बेहद अहम बताया. उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से है.
विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच आज की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है -:
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा.
रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा.
व्यापार और निवेश समझौते.
ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिकी ऊर्जा आपूर्ति.
क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन सहयोग.
QUAD सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा.
पश्चिम एशिया और वैश्विक हालात.
टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी और शिक्षा सहयोग.
वीजा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के मुद्दे.