मोदी अपने-आप में ब्रांड हैं। सियासी पिच पर बिहार के चुनावी अखाड़े में गमछा से गर्दा उड़ाने की शैली हो या अगोसा (अंगोछा) से असमिया अस्मिता से जुड़ने का अंदाज या फिर बंगाल में झालमुड़ी की तीखी मिर्ची का विरोधियों को स्वाद चखाना हो या अब चॉकलेटी मेलोडी से मेलनी को मेलोडी उपहार भेंट कर कुछ मीठा हो जाने की मिठास, दुनिया में छा जाने की मोदी की यह अनोखी शैली है। दुनिया इसकी दीवानी है।
सियासी पिच हो या सोशल मीडिया, मोदी अपने आप में ब्रांड हैं और यही कारण है कि उनका जादू देश-दुनिया में सर आंखों चढ़कर बोल रहा है। पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव में मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी टॉफी उपहार में दी तो एकाएक तीन घंटे के भीतर ही सोशल मीडिया पर यह मोदी मैजिक (वीडियो) 6 करोड़ से ज्यादा बार छा गया। इसी की चर्चा होती रही। और तो और मेलोडी टॉफी बनाने वाली पारले जी प्रोडक्ट इंडस्ट्री का शेयर (स्टॉक) 5 फीसदी तक उछलकर शेयर सर्किट (5.25 रुपये) हो गया। दरअसल, यह चॉकलेटी मेलोडी का नहीं बल्कि मोदी का जादू है। विरोधी भले इसे मोदी की नौटंकी बताते हों लेकिन हकीकत जुदा है और दुनिया दीवानी।
सियासी पिच से सामाजिक सरोकार तक
मोदी सियासी पिच पर आक्रामक हेलिकॉप्टर शॉट से न केवल विरोधियों को चुनावी मैच में हराते रहे हैं बल्कि गूगली गेंदों से गिल्ली भी उड़ाने के माहिर हैं। बिहार में गमछा लहराकर गर्दा उड़ाने की घटना हो या असम में अंगोछा से असमिया अस्मिता से जोड़ने का अंदाज, सब वाकिफ हैं। हाल के बंगाल के चुनाव में झालमुड़ी खाकर विरोधियों को तीखी मिर्ची का अहसास कराया। अब इटली की पीएम मेलनी के साथ मोदी की यह मैत्री वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक तौर पर देश में मिठास घोलने जा रही है। मोदी-मेलनी मिलन के दरम्यान भारत में 2029 तक 29 बिलियन यूरो तक की अर्थव्यवस्था का खाका खींचा गया।
पश्चिम एशिया संकट की इस घड़ी में मोदी पहले ही देशवासियों से तेल की कम खपत, सोने की खरीद न करने, ईंधन बचत, घर से काम और विदेश यात्रा में कटौती की अपील कर चुके हैं। इस अपील का असर दिखने लगा है। कुछ दिखावे का कदम है तो कुछ स्वत:स्फूर्त भी। आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ ईंधन संकट को लेकर यूएई से लेकर पांच देशों की इस यात्रा में मोदी का अर्थव्यवस्था को पंख देने, रक्षा और रणनीतिक समझौते पर ज्यादा जोर रहा।
मोदी मैजिक पहले भी
2020 में कोरोना संकट के दौरान जब मोदी ने ताली-थाली बजाने या दीए-बाती जलाने की अपील की तो सारा देश एक अपील पर उनके साथ खड़ा हो गया था। तब भी विरोधियों ने ताली-थाली पीटने का मजाक उड़ाया। तभी मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा देकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया। खादी कारोबार को 11 वर्षों में 447 फीसदी की वृद्धि दिलाकर 170.51 करोड़ के कारोबार तक ला दिया। बुनकरों की स्थिति बदली। फैशन और ब्रांडिंग के जमाने में हस्तकरघा की ओर लोगों का ध्यान खींचा। दिवाली पर चाइनीज झालर की जगह कुंभकारों के बनाए दीए-बाती से लाखों परिवारों के घर रोशन होने लगे।
स्टार्टअप और मेक इन इंडिया जैसी अपील से रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा। करीब-करीब 65 फीसदी रक्षा उपकरण देश में बनने लगे। आकाश और ब्रह्मोस का निर्यात होने लगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले ब्रह्मोस अब उत्तर प्रदेश में बनने लगे हैं। रक्षा मंत्रालय 67 फीसदी घरेलू खरीद को बढ़ावा दे रहा है। स्टार्टअप की वैश्विक रैंकिंग में भारत तीसरे नंबर पर आ गया है और यूनिकॉर्न 1 अरब डॉलर से ज्यादा हैं। तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर जोर है।
सोशल मीडिया पर भी जादू
मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ा है। लोकप्रियता के मामले में दुनिया भर के नेताओं को मोदी ने पछाड़ दिया है। इंस्टा हो या यूट्यूब, मोदी के फॉलोअर्स सर्वाधिक हैं। यही कारण है कि जब वह बंगाल के चुनाव में झालमुड़ी खाते हैं तो एकाएक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झालमुड़ी की बाढ़ आ जाती है। अब मेलोडी टॉफी छा गई है। मोदी अपने प्रशंसकों के बूते ही सियासी पिच से लेकर दुनिया भर में छाए रहते हैं। देश में सत्ता के शिखर पर हैं। अपनी मेहनत के बूते राज्यों में भी कमल और सहयोगियों (एनडीए) का विस्तार कर रहे हैं।
देश की सत्ता के गलियारे से वामपंथ का पांव पूरी तरह से उखड़ चुका है। सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से अस्तित्व के लिए जूझ रही है। क्षत्रिय क्षत्रप छंटते जा रहे हैं। मोदी देश ही नहीं दुनिया में जहां जाते हैं, वहां का सर्वोच्च सम्मान मिलता है। मोदी विदेश यात्रा से लौटकर कैबिनेट की बैठक के अलावा ताजा वैश्विक संकट की समीक्षा करने वाले हैं। उनकी यही कार्यशैली उन्हें औरों से जुदा करती है। इसलिए मोदी शैली के विरोध में चाहे जो स्वर उठें लेकिन सच तो यही है कि यह मोदी का जादू है मितवा…।
5 देशों की यात्रा से क्या-क्या हासिल हुआ?
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है.
पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है.
किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है.
इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला.
UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया?
संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर, एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं.
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत?
करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है.
क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है.
पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला?
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है?
सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं.
क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है.