दिल्ली आज एक अहम कूटनीतिक हलचल का गवाह बन रहा है. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की मुलाकात हुई है. यह मुलाकात दिल्ली के हैदाराबाद हाउस में हुई है. इस औपचारिक बैठक को रणनीतिक ताकत के नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है. वैश्विक तनाव, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच यह मुलाकात कई मायनों में खास है. भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों का फोकस अब हाई-टेक सेक्टर, रक्षा सहयोग और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है. ऐसे में यह बैठक सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में एशिया की ताकत का संतुलन तय करने में भी भूमिका निभा सकती है.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग अपनी पहली भारत यात्रा पर तीन दिवसीय दौरे पर रविवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. उनके साथ दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम हेया क्युंग भी हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है.
- दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक साझेदारी को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई.
- दिल्ली में ली जे म्युंग और उनकी पत्नी किम हे क्यंग ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि दी. इस दौरान दोनों ने राष्ट्रपिता को नमन करते हुए भारत की ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त किया.
- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने भारत को दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसे कई अवसर हैं, जिनसे बिना किसी दबाव के पारस्परिक लाभ हो सकता है. उन्होंने शांति और लोकतंत्र को पसंद करने वाले भारत के साथ मिलकर उज्ज्वल भविष्य बनाने की बात कही और भरोसा दिलाया कि वे सभी पहलुओं का ध्यान रखते हुए संबंधों को और मजबूत बनाकर लौटेंगे.
किन-किन मुद्दों पर होगी बात?
- भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह बैठक कई स्तरों पर अहम मानी जा रही है. सोमवार सुबह राष्ट्रपति ली का औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति भवन में किया गया, इसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी विस्तृत बातचीत हुई. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई. खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग पर जोर दिया गया.







