केरल, असम और पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का शोर मंगलवार शाम छह बजे थम गया। अंतिम दिन शीर्ष दलों के नेताओं ने जमकर चुनाव प्रचार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत डीएमके नेता व तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रचार की कमान संभाली। तीनों राज्यों में बृहस्पतिवार को सुबह 7 बजे से मतदान होगा। असम में 126 सीट, केरल में 140 और पुडुचेरी में कुल 30 सीटें हैं। असम में 2.50 करोड़ मतदाता व 722 उम्मीदवार हैं। केरल में 890 उम्मीदवार व 2.71 करोड़ मतदाता हैं। वहीं, पुदुचेरी में कुल 294 उम्मीदवार हैं। यहां 9.44 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) रतन यू केलकर ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा चुनावों के लिए नौ अप्रैल को होने वाले मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिसमें 883 उम्मीदवार राज्य के 2.71 करोड़ मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे.
केलकर ने बताया कि राज्य में 30,495 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं. उन्होंने बताया कि इनमें 24 सहायक मतदान केंद्र भी शामिल हैं, जिनकी आवश्यकता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनीक्षण (SIR) के बाद पड़ी. केलकर के मुताबिक, केरल के कासरगोड, कन्नूर, पलक्कड़, मलप्पुरम और एर्नाकुलम जिलों में नये मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि इन मतदान केंद्रों में से 352 का संचालन महिलाएं और 37 का संचालन दिव्यांग व्यक्ति करेंगे. केलकर के अनुसार, 140 वितरण और संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा मतपत्रों की गिनती 140 ‘स्ट्रांग रूम’ में की जाएगी.
उन्होंने कहा, ‘चुनाव प्रक्रिया के प्रबंधन के तहत, हमने 1.46 लाख प्रशिक्षित चुनाव अधिकारियों को तैनात किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए 76,000 पुलिस कर्मियों और केंद्रीय बलों के कर्मियों को तैनात किया गया है.’
केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है. कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. पोल मंत्रा इंटेलिजेंस रिपोर्ट के ताजा सर्वे के मुताबिक, 140 सदस्यीय विधानसभा में UDF को 88-92 सीटें मिल सकती हैं, यानी 70 के बहुमत आंकड़े को आराम से पार करने की स्थिति.
यह सिर्फ जीत का अनुमान नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन का साफ संकेत है
पोल मंत्रा इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को 42-46 सीटों पर सिमटने का अनुमान है. रिपोर्ट कहती है कि यह गिरावट उसके पारंपरिक गढ़ों में भी दिखाई दे रही है. वहीं NDA की स्थिति और कमजोर दिख रही है, जिसे सिर्फ 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है.
सर्वे में दावा किया गया है कि, यह “एकतरफा चुनावी नतीजा” हो सकता है, जो बिखरे वोटों का खेल नहीं बल्कि “वोटर शिफ्ट” का परिणाम है. साफ है कि इस बार चुनावी हवा बदल चुकी है और इसकी सबसे बड़ी वजह एंटी-इंकम्बेंसी बताई जा रही है.
10 साल की लेफ्ट सरकार का गिर जाएगी !
पोल मंत्रा इंटेलिजेंस रिपोर्ट के सर्वे के अनुसार अगर मतदाताओं के मूड को समझें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. “परिवर्तन की इच्छा” 22.8% के साथ सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है. इसके बाद कल्याण योजनाएं (17.6%), विचारधारा (16.2%) और नेतृत्व (14.6%) आते हैं. यानी जनता अब सिर्फ योजनाओं से नहीं, बल्कि बदलाव और बेहतर नेतृत्व की तलाश में है.
मत प्रतिशत के आंकड़े भी इसी कहानी को मजबूत करते हैं. UDF को 41.5% वोट शेयर के साथ 8% से ज्यादा की बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि LDF 33.4% पर है. NDA को 17.2% और अन्य को 2.3% वोट मिलने का अनुमान है. सिर्फ 5.6% मतदाता ही अभी अनिर्णीत हैं—जो एक स्थिर और स्पष्ट जनमत की ओर इशारा करता है.
कौन बनेगा मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री चेहरे की बात करें तो वीडी सतीशन 21.3% के साथ आगे हैं, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 18.5% पर हैं. रमेश चेन्निथला (17.2%) और केसी वेणुगोपाल (15.1%) भी दौड़ में बने हुए हैं. इस चुनाव में असली मुद्दे भी साफ हैं. महंगाई और जीवनयापन की लागत 24.5% के साथ सबसे बड़ा मुद्दा है. रोजगार और युवाओं का पलायन 20.2% पर है. यानी करीब 45% वोटर सीधे आर्थिक दबाव से प्रभावित हैं. भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाएं और कानून-व्यवस्था भी अहम मुद्दे बने हुए हैं.
अगर रीजनल तौर पर देखें, तो UDF हर इलाके में बढ़त बनाए हुए है. मलाबार की 60 सीटों में UDF को 41-43 सीटें मिल सकती हैं, जबकि LDF 15-17 पर सिमट सकता है. मध्य केरल की 41 सीटों में UDF को 25-26 और LDF को 12-13 सीटें मिलने का अनुमान है. त्रावणकोर में मुकाबला थोड़ा कड़ा जरूर है, लेकिन यहां भी UDF 22-23 सीटों के साथ आगे दिख रहा है.
असम चुनाव
असम विधानसभा चुनाव 2026 का प्रचार मंगलवार 7 अप्रैल 2026 की शाम को थम गया. जानकारी के मुताबिक राज्य की सभी 126 विधानसभा सीटों पर वोटिंग गुरुवार 9 अप्रैल को होगी. इस सिलसिले में चुनाव आयोग (Election Commission) स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है. बता दें, मतगणना सोमवार 4 मई 2026 को होगी.
असम के विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, और कुल 2,50,54,463 वोटर अपनी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इसमें 1,25,31,552 पुरुष वोटर, 1,25,22,593 महिला वोटर और ट्रांसजेंडर कैटेगरी के 318 वोटर्स शामिल हैं. इसके अलावा 63,423 सर्विस वोटर भी हैं. मतदाताओं में से 6,42,314 वोटर्स 18-19 साल के हैं, 2,50,006 वोटर्स 80 साल से ज्यादा उम्र के हैं, और 2,05,085 दिव्यांग हैं.
इसके अलावा, रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 के सेक्शन 60(c) के अनुसार, इलेक्शन कमीशन ने 85 साल से ज्यादा उम्र के सीनियर सिटिजंस और पहचाने गए दिव्यांग लोगों के लिए पोस्टल बैलेट के जरिए घर से वोटिंग की सुविधा दी गई है. इसके अनुसार, आज तक कुल 26,032 सीनियर सिटिज़न्स (85+) और 8,373 दिव्यांग लोगों ने घर से पोस्टल बैलेट के जरिए अपने वोटिंग अधिकार का इस्तेमाल किया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक, असम के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर अनुराग गोयल के नेतृत्व में सभी कर्मचारी चुनावी मैदान में डटे हैं. वहीं, कानून-व्यवस्था और चुनाव के खर्च समेत सभी पहलुओं पर कड़ी नजर रखने के लिए, आयोग ने पहले ही केंद्रीय पर्यवेश्रकों को तैनात कर दिया है. इसके अलावा, सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SVEEP) प्रोग्राम के तहत, पूरे राज्य में वोटरों की ज्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं.
तीन हिस्सों में बंटा राज्य, निचले असम में सबसे ज्यादा 50 सीटें असम में 2016 से BJP की सरकार है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने तब CM रहे सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। BJP को 60 और सहयोगी पार्टियों को 15 सीटें मिली थीं। कांग्रेस गठबंधन 50 सीटों पर सिमट गया था। चुनाव के बाद BJP ने हिमंता को CM बनाया। पार्टी उनके नेतृत्व में पहली बार चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने पूर्व CM तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को कमान सौंपी है। मई 2025 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
असम तीन हिस्सों ऊपरी असम, निचला असम और बराक घाटी में बंटा है। ऊपरी असम में 46 सीटें हैं। यहां चाय बागान और असमिया पहचान सबसे बड़ा मुद्दा हैं। निचले असम में 50 सीटें हैं। बांग्लादेश बॉर्डर वाले इस इलाके में मियां मुसलमानों की आबादी ज्यादा है। बराक घाटी और आसपास के इलाके में 30 सीटें हैं। ये इलाका भाषाई और जनजातीय पहचान के लिए जाना जाता है।
असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Election Matrize Opinion Poll 2026) को लेकर फाइनल ओपिनियन पोल से बीजेपी के लिए गुड न्यूज है. दरअसल Matrize के मुताबिक असम में BJP+ को इस विधानसभा चुनाव में 92-102 सीटें मिल सकती हैं.
मैट्रिज (Matrize) और चाणक्य (Chanakya) के सर्वे के अनुसार असम में आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी-नेतृत्व वाला गठबंधन (BJP+) मजबूत स्थिति में है और उसके दोबारा सत्ता में आने या सत्ता बनाए रखने की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है. दोनों सर्वे बताते हैं कि वोट शेयर और सीटों दोनों में बीजेपी गठबंधन आगे है. कांग्रेस गठबंधन पीछे है, जबकि छोटे दलों का असर बहुत कम रहने की उम्मीद है.
वोट शेयर में बढ़त (Matrize)
BJP+: 46%
कांग्रेस+: 36%
अन्य: 18%
मैट्रिज सर्वे के अनुसार बीजेपी गठबंधन को ज्यादा लोगों का समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस गठबंधन भी मुकाबले में है, लेकिन वह पीछे है. बाकी छोटे दलों का वोट कम है.
सीटों का अनुमान (Matrize)
BJP+: 92-102 सीटें
कांग्रेस+: 22-32 सीटें
अन्य: 4-7 सीटें
सीटों के अनुमान में बीजेपी गठबंधन को साफ बढ़त मिलती दिख रही है. यह बहुमत के आंकड़े के पास या उससे ऊपर जा सकता है. कांग्रेस गठबंधन विपक्ष की भूमिका में रहेगा. अन्य दल बहुत कम सीटें जीत सकते हैं.
चाणक्य सर्वे का सीट अनुमान
BJP+: 83-90 सीटें
कांग्रेस+: 30-36 सीटें
अन्य: 3-6 सीटें
चाणक्य के सर्वे में भी बीजेपी गठबंधन आगे दिख रहा है. कांग्रेस गठबंधन कुछ सीटें जरूर जीत सकता है, लेकिन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. हालांकि चुनाव के नतीजे आखिरी समय के बदलावों और स्थानीय मुद्दों पर बदल भी सकते हैं, लेकिन फिलहाल के सर्वे बताते हैं कि मुकाबला बीजेपी के पक्ष में झुका हुआ है.
एक एक्सपर्ट की राय अलग पॉलिटिकल एक्सपर्ट उत्पल बोरा अलग दावा करते हैं। वे कहते हैं कि लोग मौजूदा सरकार से संतुष्ट नहीं हैं। पार्टी के पुराने नेता हिमंता से खफा हैं। वे कह रहे हैं कि जिन कांग्रेसियों पर घोटालों के आरोप थे, वही अब BJP चला रहे हैं।
- गौरव गोगोई को कांग्रेस की कमान देना फायदे का सौदा है। उनकी छवि साफ-सुथरी है। वे अहोम समुदाय से आते हैं।
- हिमंता ने गोगोई की पत्नी पर पाकिस्तानी लिंक होने के आरोप लगाए, लेकिन साबित नहीं कर पाए। इससे BJP की किरकिरी हुई।
- घुसपैठियों को बाहर निकालने और मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने जैसे वादों में सरकार फेल रही।
पार्टियां क्या कह रहीं… BJP के राज्य महासचिव और असम पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रितुपर्णा बरुआ कहते हैं कि पार्टी जीत के लिए 100% आश्वस्त है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल शर्मा कहते हैं कि इस बार कांग्रेस सहयोगी पार्टियों के साथ सरकार बनाएगी
पुदुचेरी चुनाव
पुदुचेरी शायद देश का इकलौता इलाका है, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए सबसे अहम चुनावी मुद्दा एक है-स्टेटहुड यानी राज्य का दर्जा। एनडीए और डीएमके-कांग्रेस दोनों ही गठबंधन चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। सीएम रंगास्वामी कहते हैं कि स्टेटहुड मिलने तक पुदुचेरी का विकास सिर्फ केंद्र के साथ सरकार में रहकर है। वहीं, राज्य से इकलौते सासंद व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वैतिलिंगम के मुताबिक, लोगों की जरूरत और सरकार के काम में तालमेल जरूरी है, जो सिर्फ राज्य बनने से मुमकिन है। पुदुचेरी वह इलाका है, जिसे भाजपा और कांग्रेस केंद्र में अपनी सीट जुगाड़ने के यंत्र की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। 30 सीटों और हर सीट पर 25 से 45 हजार तक वोटर वाले इस केंद्रशासित प्रदेश में धर्म, जाति की राजनीति से ज्यादा चुनावी रेवड़ियां असर करती हैं।







