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ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद सेंसेक्स 2700+ और निफ्टी 815 अंक उछला; रुपया 50 पैसे मजबूत ,सोना 2.3% चढ़ा……..

UB India News by UB India News
April 9, 2026
in कारोबार
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अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से बाजार गुलजार,सेंसेक्स में 400 और निफ्टी में 100 से ज्यादा अंक की तेजी…………
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अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के समझौते की खबर ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ दलाल स्ट्रीट में भी भारी उत्साह भर दिया है। इस सकारात्मक खबर का असर सुबह बाजार खुलते ही दिखा और भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा खरीदारी देखी गई। हफ्तों से दबाव में चल रहा बाजार अचानक रफ्तार पकड़ता नजर आया, जहां सेंसेक्स करीब 2600 अंकों की जबरदस्त छलांग के साथ खुला, वहीं निफ्टी भी 700 से ज्यादा प्वाइंट उछल गया। वैश्विक तनाव में कमी के संकेत मिलते ही निवेशकों का भरोसा लौटा और बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे दलाल स्ट्रीट का माहौल एकदम बदल गया।

बुधवार की सुबह जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों में खरीदारी की होड़ मच गई। सेंसेक्स 2,696 अंकों की भारी बढ़त के साथ 77,312 के लेवल पर पहुंच गया। वहीं, NSE निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और 767 अंकों की तेजी दिखाते हुए 23,890 के पार निकल गया। बाजार खुलते ही करीब 2,534 शेयरों में तेजी देखी गई, जबकि केवल 166 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

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इन शेयरों ने मारी बाजी

आज की इस हरियाली में सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को हुआ है जिनका सीधा संबंध तेल या बुनियादी ढांचे से है। तेल सस्ता होने की खबर से इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। इसके अलावा, L&T, श्रीराम फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स और अदाणी एंटरप्राइजेज जैसे शेयर निफ्टी के टॉप गेनर्स में शामिल रहे।दूसरी ओर, तेल की कीमतें गिरने से ONGC और कोल इंडिया जैसे शेयरों पर दबाव दिखा और वे लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

क्यों आई बाजार में यह तूफानी तेजी?

इस महा-बढ़त के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक राहत है। ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद कच्चे तेल के दाम 20% तक गिर गए हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है। इससे महंगाई कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद जगी है, जिससे निवेशकों का भरोसा अचानक लौट आया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्धविराम की यह स्थिति स्थिर बनी रहती है और ईरान के साथ होने वाली वार्ता सफल रहती है, तो भारतीय बाजार जल्द ही अपने पुराने लाइफ-टाइम हाई रिकॉर्ड्स को भी तोड़ सकता है। फिलहाल, बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल है और बैंकिंग से लेकर आईटी सेक्टर तक के शेयर हरे निशान में चमक रहे हैं।

सेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में सबसे अधिक लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा भी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। टेक महिंद्रा इस दौड़ में एकमात्र पिछड़ने वाली कंपनी के रूप में उभरी।

एशियाई बाजारों में दिखी तेजी

एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार स्थिर रुख के साथ बंद हुए।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि इसका मुख्य कारण अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में दो सप्ताह के विराम की घोषणा और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करने की सहमति है। इससे ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से संबंधित तात्कालिक चिंताओं में काफी कमी आई है, जो वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई थी।

उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो मुद्रास्फीति और मुद्रा दोनों दृष्टिकोणों से भारत के लिए विशेष रूप से सकारात्मक है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम ने निकट भविष्य के बाजार परिदृश्य को नाटकीय रूप से बदल दिया है। युद्धविराम के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में आई भारी गिरावट (95 अमेरिकी डॉलर तक) से बाजार में फिर से तेजी आएगी। यह युद्धविराम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति, उचित बाजार मूल्यों के समर्थन से बाजार को फिर से तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 13.24 प्रतिशत गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 8,692.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,979.50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। मंगलवार को सेंसेक्स 509.73 अंक या 0.69 प्रतिशत बढ़कर 74,616.58 पर बंद हुआ। निफ्टी 155.40 अंक या 0.68 प्रतिशत चढ़कर 23,123.65 पर समाप्त हुआ।

सोना 2.3% चढ़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही स्पॉट गोल्ड 2.3% की छलांग लगाकर $4,811.66 प्रति औंस के लेवल पर पहुंच गया। आपको बता दें कि मंगलवार को सोने में 1.2% की बढ़त देखी गई थी, लेकिन ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट ने आग में घी का काम किया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अगले दो हफ्तों तक ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा और उन्हें ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार हो सकता है। इस खबर के बाद निवेशकों ने सुरक्षा के लिहाज से सोने में निवेश बढ़ा दिया है।

क्या सोना छुएगा $5000 का जादुई आंकड़ा?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने के लिए अगला बड़ा पड़ाव $4,930 है। अगर तेजी जारी रहती है, तो जल्द ही सोना $5,000 के ऐतिहासिक स्तर को चुनौती दे सकता है।

युद्ध के दौरान अब तक का सफर

दिलचस्प बात यह है कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में अब तक 8% से अधिक की गिरावट देखी गई थी। लेकिन अब युद्धविराम की खबरों और ऊर्जा संकट के कारण पैदा हुई अनिश्चितता ने इसे फिर से निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।

अन्य धातुओं का हाल

  • प्लेटिनम: 2.4% बढ़कर $2,004.95 पर पहुंचा।
  • पैलेडियम: 2.1% की बढ़त के साथ $1,500 के स्तर पर आया।

क्रूड ऑयल की कीतमें भी गिरीं

सीजफायर के ऐलान के बाद कुछ ही घंटों के भीतर कच्चे तेल की कीमत $117.63 से गिरकर $91.05 पर आ गई। कीमतों में 20% की यह गिरावट कोरोना संकट के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। बाजार के जानकारों का कहना है कि युद्ध के डर से तेल की कीमतों में जो एक्स्ट्रा बढ़ोतरी हुई थी, वह समझौते की खबर मिलते ही खत्म हो गया।

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