ADVERTISEMENT
Saturday, July 4, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व संकट से जूझ रही हो, तब मुद्राओं में गिरावट अस्वाभाविक नहीं……………….

UB India News by UB India News
April 3, 2026
in कारोबार
0
गिरावट के कई कारण हैं जिम्मेदार ……………..
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

ऐसे वक्त में, जब पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के दौर में धकेल रहा है, तब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का सर्वकालिक निचले स्तर तक पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी बहुआयामी चुनौतियों का ही संकेत है। वैश्विक संकट के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षया मजबूत स्थिति में ही है, जो डॉलर की ताकत को दर्शाता है। चूंकि, अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न अधिक मिलता है, इसलिए अनिश्चितता की स्थितियों में निवेशक डॉलर को सुरक्षित विकल्प मानते हैं और उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं।

जाहिर है कि इसका सीधा असर भारत जैसे देशों की मुद्राओं पर पड़ता है। इसके अलावा, ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। भारत विश्व की उन अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो आयातित ऊर्जा पर सर्वाधिक निर्भर है। वह अपने कच्चे तेल की जरूरतों का 85 फीसदी और प्राकृतिक गैस का 40 फीसदी से अधिक आयात करता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे चालू खाता घाटे को बढ़ाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है।

RELATED POSTS

पनामा नहर पर किसका है नियंत्रण?

क्या बिहार के शराबबंदी कानून की समीक्षा एक बार जरूरी है!………………..

उल्लेखनीय है कि इससे पहले रुपये में ऐसी गिरावट करीब एक दशक पहले 2013 में भी देखी गई थी, पर उस वक्त घरेलू अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार, दोनों आज की तुलना में कमजोर स्थिति में थे। लेकिन यह देखते हुए कि रुपये में पिछले एक वर्ष में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है और यह इस वर्ष एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक है, संकट की गंभीरता समझी जा सकती है। यही नहीं, अगर ईरान के साथ अमेरिका-इस्राइल का युद्ध जारी रहा, तो जैसा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट भी बताती है, रुपया और कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल के महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये की तेज गिरावट को थामने की कोशिश बेशक की है, पर इस उपाय की भी सीमाएं हैं, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार का असीमित प्रयोग संभव नहीं है। हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि देश की विकास दर अब भी ऊंची बनी हुई है। युवा आबादी, डिजिटल बुनियादी तंत्र और स्टार्टअप इकोसिस्टम हमारे मजबूत पक्ष हैं।

जरूरत है इस संकट को अवसर में बदलने की, जिसके लिए संरचनात्मक सुधारों की तरफ ध्यान देना होगा। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना होगा। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश व घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने से आयात बिल कम किया जा सकता है। रुपये का गिरते जाना गंभीर है, पर अगर अल्पकालिक उपायों के साथ दीर्घकालीन रणनीतियों पर भी ध्यान दिया जाए, तो एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ा जा सकता है।

आरबीआई के कड़े कदमों से रुपये ने पकड़ी रफ्तार

भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से ‘ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट’ में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण मुद्रा बाजार पर अब भी दबाव बना हुआ है।

सोमवार को 95 का चिंताजनक स्तर पार कर गया था रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 के स्तर पर खुला और जल्द ही 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की तेज बढ़त के साथ 93.19 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था।

रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई को सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च, 2026 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से बैंकों के लिए भारतीय रुपये पर ‘नेट ओपन पोजिशन’ की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी है और बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

क्रूड में उबाल और शेयर बाजार धड़ाम
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां बरकरार हैं:

  • ग्लोबल मार्केट: डॉलर इंडेक्स 0.32 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा है, जो दुनिया की अन्य मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।
  • कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ वायदा बाजार में 4.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
  • शेयर बाजार: गुरुवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजारों में हाहाकार मचा। सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.80%) लुढ़ककर 71,821.41 पर और निफ्टी 410.45 अंक (1.81%) गिरकर 22,383.40 पर आ गया।
  • विदेशी निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस की आशंका और लगातार FPI बिकवाली एक साथ मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं”।  28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।

जीएसटी कलेक्शन में तेजी
विदेशी मोर्चे पर चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़ा है। टैक्स कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी मासिक वसूली है।

अब आगे क्या?
रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों से गिरता रुपया फिलहाल थम गया है। लेकिन रिकॉर्ड महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें जो 106 डॉलर का स्तर पार कर चुका है, से भारत का आयात बिल बढ़ना तय है। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की स्थिरता बहुत हद तक पश्चिम एशिया के तनाव और विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की वापसी पर निर्भर करेगी।

ऐसे वक्त में, जब पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के दौर में धकेल रहा है, तब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का सर्वकालिक निचले स्तर तक पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी बहुआयामी चुनौतियों का ही संकेत है। वैश्विक संकट के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षया मजबूत स्थिति में ही है, जो डॉलर की ताकत को दर्शाता है। चूंकि, अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न अधिक मिलता है, इसलिए अनिश्चितता की स्थितियों में निवेशक डॉलर को सुरक्षित विकल्प मानते हैं और उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं।

जाहिर है कि इसका सीधा असर भारत जैसे देशों की मुद्राओं पर पड़ता है। इसके अलावा, ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। भारत विश्व की उन अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो आयातित ऊर्जा पर सर्वाधिक निर्भर है। वह अपने कच्चे तेल की जरूरतों का 85 फीसदी और प्राकृतिक गैस का 40 फीसदी से अधिक आयात करता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे चालू खाता घाटे को बढ़ाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले रुपये में ऐसी गिरावट करीब एक दशक पहले 2013 में भी देखी गई थी, पर उस वक्त घरेलू अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार, दोनों आज की तुलना में कमजोर स्थिति में थे। लेकिन यह देखते हुए कि रुपये में पिछले एक वर्ष में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है और यह इस वर्ष एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक है, संकट की गंभीरता समझी जा सकती है। यही नहीं, अगर ईरान के साथ अमेरिका-इस्राइल का युद्ध जारी रहा, तो जैसा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट भी बताती है, रुपया और कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल के महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये की तेज गिरावट को थामने की कोशिश बेशक की है, पर इस उपाय की भी सीमाएं हैं, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार का असीमित प्रयोग संभव नहीं है। हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि देश की विकास दर अब भी ऊंची बनी हुई है। युवा आबादी, डिजिटल बुनियादी तंत्र और स्टार्टअप इकोसिस्टम हमारे मजबूत पक्ष हैं।

जरूरत है इस संकट को अवसर में बदलने की, जिसके लिए संरचनात्मक सुधारों की तरफ ध्यान देना होगा। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना होगा। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश व घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने से आयात बिल कम किया जा सकता है। रुपये का गिरते जाना गंभीर है, पर अगर अल्पकालिक उपायों के साथ दीर्घकालीन रणनीतियों पर भी ध्यान दिया जाए, तो एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ा जा सकता है।

आरबीआई के कड़े कदमों से रुपये ने पकड़ी रफ्तार

भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से ‘ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट’ में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण मुद्रा बाजार पर अब भी दबाव बना हुआ है।

सोमवार को 95 का चिंताजनक स्तर पार कर गया था रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 के स्तर पर खुला और जल्द ही 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की तेज बढ़त के साथ 93.19 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था।

रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई को सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च, 2026 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से बैंकों के लिए भारतीय रुपये पर ‘नेट ओपन पोजिशन’ की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी है और बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

क्रूड में उबाल और शेयर बाजार धड़ाम
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां बरकरार हैं:

  • ग्लोबल मार्केट: डॉलर इंडेक्स 0.32 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा है, जो दुनिया की अन्य मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।
  • कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ वायदा बाजार में 4.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
  • शेयर बाजार: गुरुवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजारों में हाहाकार मचा। सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.80%) लुढ़ककर 71,821.41 पर और निफ्टी 410.45 अंक (1.81%) गिरकर 22,383.40 पर आ गया।
  • विदेशी निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस की आशंका और लगातार FPI बिकवाली एक साथ मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं”।  28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।

जीएसटी कलेक्शन में तेजी
विदेशी मोर्चे पर चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़ा है। टैक्स कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी मासिक वसूली है।

अब आगे क्या?
रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों से गिरता रुपया फिलहाल थम गया है। लेकिन रिकॉर्ड महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें जो 106 डॉलर का स्तर पार कर चुका है, से भारत का आयात बिल बढ़ना तय है। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की स्थिरता बहुत हद तक पश्चिम एशिया के तनाव और विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की वापसी पर निर्भर करेगी।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

पनामा नहर पर किसका है नियंत्रण?

पनामा नहर पर किसका है नियंत्रण?

by UB India News
July 3, 2026
0

पनामा नहर के आसपास चीन की बढ़ती गतिविधियों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चिंतित हैं. उनका आरोप है कि चीन...

क्या बिहार के शराबबंदी कानून की समीक्षा एक बार जरूरी है!………………..

क्या बिहार के शराबबंदी कानून की समीक्षा एक बार जरूरी है!………………..

by UB India News
July 3, 2026
0

साल 2016 में नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में शराब बंदी का फैसला लिया था. महिलाओं ने इसका खूब...

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी …………………

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी …………………

by UB India News
July 3, 2026
0

यकीनन अल नीनो और कमजोर मानसून की चुनौतियों के बीच अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से कच्चे तेल...

पेट्रोल में इथेनॉल: हर तरफ़ हंगामा, लेकिन असली सवालों के जवाब कौन देगा?

पेट्रोल में इथेनॉल: हर तरफ़ हंगामा, लेकिन असली सवालों के जवाब कौन देगा?

by UB India News
July 3, 2026
0

श में इन दिनों पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। यह बहस केवल सोशल...

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारी तनाव, अमेरिका की नाकेबंदी के बाद गुजर रहा भारतीय जहाज

होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को देना पड़ेगा टैक्स?

by UB India News
June 27, 2026
0

ओमान ने यूरोपीय अधिकारियों से कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब पहले की तरह बिना किसी बदलाव के नहीं चल सकता....

Next Post
ट्रंप राष्ट्र के नाम संबोधन में शांति वार्ता से लेकर धमकी तक देते रहे इधर इरान ने इजरायल पर 40 मिनट में 11 हमले कर डाले …..

ट्रंप राष्ट्र के नाम संबोधन में शांति वार्ता से लेकर धमकी तक देते रहे इधर इरान ने इजरायल पर 40 मिनट में 11 हमले कर डाले .....

नागरिक देवो भव:  , 21वीं सदी में दुनिया तेजी से बदल रही भारत भी उसी गति से आगे बढ़ रहा है…………………

नागरिक देवो भव: , 21वीं सदी में दुनिया तेजी से बदल रही भारत भी उसी गति से आगे बढ़ रहा है.....................

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend