अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्र संबोधन में पूर्व समकक्ष बराक ओबामा पर कटाक्ष किया। अमेरिकी राष्ट्रपति कहा, “उन्होंने ईरान के मामले में गलती की।” ओबामा प्रशासन के दौरान हुए ईरान परमाणु समझौते का जिक्र किए बिना ट्रंप ने कहा कि यह एक गलती थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान इसे सुधारने का उन्हें सम्मान मिला। इधर ट्रंप ईरान पर बड़े हमले का दावा कर रहे थे, उधर इजरायल पर ईरान ने मिसाइलों की बारिश कर दी. कुल 40 मिनट में ईरान ने इजरायल पर 11 हमले किए.
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
निर्णायक जीत का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुका है।
ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट: उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग खत्म कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना समाप्त हो चुकी है, वायुसेना कमजोर पड़ गई है और मिसाइल भंडार को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन: ट्रंप ने कहा कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हो चुका है। पुराना नेतृत्व काफी हद तक हट चुका है, जिसकी जगह एक कम कट्टरपंथी समूह ने ले ली है।
परमाणु बम नहीं बनाएगा ईरान: उन्होंने दोहराया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना था और यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब परमाणु बम नहीं बनाएगा।
खाड़ी देशों और इस्राइल के साथ खड़ा रहेगा अमेरिका: व्हाइट हाउस से अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, ”मैं मध्य पूर्व में हमारे सहयोगी देशों इस्राइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन को धन्यवाद देना चाहता हूं। वे बहुत अच्छे रहे हैं और हम उन्हें किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचने देंगे या असफल नहीं होने देंगे।”
पाषाण युग में भेजने की धमकी: उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन हफ्तों तक अमेरिका ईरान पर और सख्त हमले जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हमलों से ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह पंगु बना सकता है। उन्होंने कहा कि हम ईरान को पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां वे असल में होने चाहिए।
अमेरिकी सेना की तारीफ: ट्रंप ने अमेरिकी सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान की प्रॉक्सी ताकतों को समर्थन देने की क्षमता को कुचल दिया है।
समझौता न हुआ तो भीषण हमले: उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों जैसे ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने किसी भी चल रही बातचीत, संभावित समझौते या युद्धविराम का कोई सीधा जिक्र नहीं किया।
47 साल के संघर्ष का जवाब: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को पिछले 47 वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का जवाब बताते हुए इसे एक अंतिम हिसाब करार दिया।
होर्मुज मामले से झाड़ा पल्ला: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने को चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों की जिम्मेदारी बताया। ट्रंप ने सहयोगी नाटो देशों पर भी गुस्सा जताते हुए उन्हें कागजी शेर कहा।
बगदाद में रक्षा अलर्ट, अमेरिकी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने की सलाह
इराक की राजधानी बगदाद में 24 से 48 घंटों के भीतर हमले का खतरा बताया गया है. अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी दी है कि ईरान समर्थित आतंकी मिलिशिया अमेरिकी नागरिकों और उनसे जुड़े ठिकानों को निशाना बना सकते हैं. इन संभावित हमलों में होटल, एयरपोर्ट, दूतावास, कंपनियां, यूनिवर्सिटी और ऊर्जा से जुड़े ठिकाने शामिल हो सकते हैं. साथ ही अपहरण का भी खतरा बताया गया है. अमेरिकी प्रशासन ने साफ कहा है कि इराक में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिक तुरंत देश छोड़ दें और किसी भी हालत में यात्रा न करें. सुरक्षा हालात इतने खराब हैं कि अमेरिकी दूतावास और एरबिल स्थित कॉन्सुलेट के पास जाने से भी मना किया गया है, क्योंकि वहां रॉकेट, ड्रोन और मोर्टार हमलों का खतरा बना हुआ है. इराक सरकार भी इन हमलों को रोक पाने में पूरी तरह सक्षम नहीं दिख रही है, इसलिए खतरा और बढ़ गया है.
इजरायल के हाइफा पोर्ट पर दगीं ईरानी मिसाइलें
ईरानी टीवी ने दावा किया है कि उसकी मिसाइलें इजराइल के हाइफा पोर्ट तक पहुंच गई हैं. यह दावा उस समय आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान को पूरी तरह कमजोर कर दिया है. इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को और तेज कर दिया है.
ईरान ने इजरायल पर 40 मिनट में किए 11 अटैक
ईरान-अमेरिका के युद्ध में आगे क्या होगा, ये कहा ही नहीं जा सकता. इधर ट्रंप ईरान पर बड़े हमले का दावा कर रहे थे, उधर इजरायल पर ईरान ने मिसाइलों की बारिश कर दी. कुल 40 मिनट में ईरान ने इजरायल पर 11 हमले किए.
इजरायल के हमले में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री घायल, पत्नी की मौत
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खाराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान में उनके घर पर अमेरिका-इजराइल हमले में उन्हें चोट लगी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस हमले में उनकी पत्नी की मौत हो गई. खाराजी 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे थे और बाद में अली खामेनेई के सलाहकार के रूप में काम किया. अली खामेनेई की मौत के बाद भी वे नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के साथ विदेश नीति सलाहकार के तौर पर जुड़े हुए थे.







