बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? यह एक ऐसा यक्ष प्रश्न बन चुका है, जिसका जवाब बिहार में जारी कयासों के बीच तलाशा जा रहा है। बिहार में अगले मुख्यमंत्री को लेकर जिस तरह से कयास लगाए जा रहे हैं उसे देखकर बचपन का एक पसंदीदा खेल याद आ रहा है। यह खेल है ‘आंख मिचौली’ जिसमें एक व्यक्ति की आंख पर कपड़े की पट्टी बाद दी जाती है और वह खेल में शामिल बाकी खिलाड़ियों में से किसी एक को पकड़ने की कोशिश करता है। वह जिसे छू लेता है, उसे हार मानकर आंख पर पट्टी बांधकर यही क्रम दोहराना पड़ता है।
कंधे पर सिंहासन की विरासत!
आज के बच्चे ‘आंख मिचौली’ खेलते हुए नजर नहीं आते, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यही गेम खेलते हुए दिख रहे हैं। वे जनसभाओं में नेताओं के ‘कंधे पर हाथ’ रख रहे हैं। वे जिसका कंधा चुनते हैं, उसे उनकी मुख्यमंत्री पद की विरासत संभालने वाला मान लिया जा रहा है।
बिहार में अगले मुख्यमंत्री का नाम जब एक कठिन गुत्थी बना हुआ है, तब नीतीश कुमार अपने आसपास रहने वाले बीजेपी के नेताओं के ‘कंधे पर हाथ’ रख रहे हैं। नीतीश के किसी के ‘कंधे पर हाथ’ रखते ही वह अगला मुख्यमंत्री बताया जा रहा है। नीतीश कुमार ने उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर कई दफा हाथ रखा, साथ में यह भी कह दिया कि ‘आगे इन्हीं को देखना है।’ तो देखने सुनने वालों ने सम्राट को बिहार के अगले ‘सम्राट का बैच’ दे दिया।
किसके कंधे पर कितना दबाव?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के चौथे और अंतिम चरण का शुक्रवार को समापन दिवस है। यह चरण चार दिन चला और इस दौरान अलग-अलग जिलों में जनसंवाद कार्यक्रम में ‘कंधे पर हाथ’ रखने का सिलसिला भी चलता रहा। उन्होंने अपनी ‘आंख मिचौली’ में सिर्फ सम्राट चौधरी को ही नहीं, विजय कुमार चौधरी और यहां तक कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के ‘कंधे पर भी हाथ’ रखा। कंधे बदलने के साथ आने वाले कल के मुख्यमंत्री के नाम भी बदलते गए। ‘आंख मिचौली’ खेल के सर्किल में खड़े नेता अब अपना-अपना कंधा टटोलकर यह जानने की कोशिश कर रहे होंगे कि नीतीश के हाथ का दबाव कितना था?
कहा जाता है कि नीतीश कुमार राजनीति में जो कहते हैं, या जताते हैं, वे वैसा करते नहीं हैं। यानी उनकी कथनी और करनी में अंतर होता है। वे पहले ‘आंख मिचौली’ सुशील मोदी, तेजस्वी यादव के भी ‘कंधे पर हाथ’ रखकर और यह कहकर कि ‘आगे इन्हें ही करना है’, खेल चुके हैं। इस इतिहास को देखते हुए नेट फ्लिक्स की वेब सीरीज ‘लॉस्ट किंगडम’ याद आ रही है जिसमें एक बच्ची आंख पर पट्टी बांधकर जिसका हाथ थाम लेती है, उसकी बलि दे दी जाती है। एक अन्य वेब सीरीज ‘स्क्विड गेम’ भी कुछ ऐसी ही है।
नीतीश कुमार 20 साल तक बिहार की सत्ता संभालने के बाद अगले माह मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा में चले जाएंगे। आशा की जानी चाहिए कि उनके दिल्ली रवाना होने से आंख मिचौली का खेल खत्म हो जाए और बिहार की जिज्ञासा समाप्त हो।






