निशांत कुमार की सियासी पारी शुरू होने के साथ ही उन्हें दायित्व सौंपने पर पॉलिटिकल सर्किल से लेकर चौक-चौराहों तक पर चर्चा है। निशांत ने 8 मार्च को जदयू की सदस्यता ली। इसके बाद से वे काफी सक्रिय हैं। बीते दिनों निशांत अपने पिता नीतीश की तरह अचानक जदयू दफ्तर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से मिले। इससे पहले गुरुद्वार जाकर मत्था टेका, मजार में टोपी पहनकर चादर चढ़ाई और इबादत की, महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की।
निशांत के सियासी स्टेप को इन 6 पॉइंट में समझिए
1. यात्रा पर निकलना, आम लोगों से मिलना
पॉलिटिकल करियर शुरू करने के साथ ही निशांत कुमार यात्रा की तैयारी में जुट गए हैं। पूरे बिहार में भ्रमण करेंगे। जदयू ने इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कई दौर की बैठकें हुई हैं। यात्रा की रूपरेख तैयार की जा रही है। निशांत की यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण से हो सकती है। निशांत की यात्रा का नाम क्या रखा जाए, इस पर विचार चल रहा है।
नीतीश क्या करते थेः इससे पहले नीतीश कुमार अपनी हर यात्रा की शुरुआत इसी जिले से करते रहे हैं। यह जिला महात्मा गांधी की कर्मभूमि थी। नीतीश कुमार की छवि यात्राओं पर निकलने और इस दौरान आम लोगों से मिलकर उनकी परेशानी जानने वाले नेता की रही है। 2005 में वह पहली बार ‘न्याय यात्रा’ पर निकले थे। तब विपक्ष में थे।
- नीतीश पूरे बिहार में घूमे और लालू राज के खिलाफ माहौल बनाया। नीतीश ने बिहार में जंगलराज का मुद्दा उठाया। राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को जनादेश का अपमान बताया। राज्य में सुशासन, सामाजिक न्याय और कानून का राज स्थापित करने का संकल्प लिया। नतीजा रहा कि जनता ने उन्हें सत्ता सौंप दी।
- मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतीश कुमार यात्रा पर निकलते रहे। 2005 से लेकर अब तक सीएम नीतीश कुमार ने कुल 16 यात्राएं की हैं।
2. पैतृक गांव कल्याण बिगहा से लगाव
जदयू में शामिल होने के बाद निशांत 12 मार्च को कल्याण बीघा पहुंचे। यहां के इंडोर शूटिंग रेंज में निशानेबाजी की। यहां मौजूद राष्ट्रीय स्तर के युवा निशानेबाजों से मुलाकात की, उनका हौलसा बढ़ाया। उन्हें बिहार का नाम देश-दुनिया में रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
निशांत ने कहा कि खिलाड़ियों के जुनून, अनुशासन और समर्पण को देखकर विश्वास और भी मजबूत हुआ है कि हमारे युवा आने वाले समय में खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे।

नीतीश क्या करते थेः निशांत के पिता नीतीश कुमार का जन्म पटना के बख्तियारपुर के कल्याण बिगहा गांव में हुआ था। उनका भावनात्मक जुड़ाव अपने पैतृक गांव से रहा है। नीतीश कुमार अक्सर अपनी यात्राओं के दौरान या विशेष अवसरों पर कल्याण बिगहा जाते रहे हैं।


2005 की न्याय यात्रा के दौरान वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में गए थे। लोगों से मिले थे, बातचीत की थी।
2005 में नीतीश मुख्यमंत्री बने। इसके बाद इस गांव का कायाकल्प शुरू हुआ। पक्की सड़कें, सौर ऊर्जा और बेहतर बिजली आपूर्ति जैसी सुविधाएं यहां के लोगों को मिलीं।
निशांत कुमार अचानक पार्टी दफ्तर पहुंचे। JDU ऑफिस में CM के बेटे की आरती उतारी गई।
3. अचानक पार्टी ऑफिस पहुंचना, कार्यकर्ताओं से मिलना
जदयू जॉइन करने के बाद 11 मार्च को निशांत अचानक पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने कार्यालय पहुंचकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान संगठन मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं का उत्साह और सक्रियता बढ़ाने को लेकर बात की।
इस दौरान आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई थी। निशांत ने कार्यकर्ताओं को विश्वास दिलाया था कि हम सब मिलकर बिहार के विकास और संगठन की मजबूती के संकल्प को और आगे बढ़ाएंगे।

नीतीश क्या करते थेः सीएम नीतीश कुमार, पार्टी कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री चैंबर तक बैठते रहे हैं। वह अचानक पार्टी कार्यालय चले जाते हैं। ऐसा नजारा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण मतदान के दौरान भी देखा गया था। मतदान के बीच मुख्यमंत्री जदयू कार्यालय पहुंचे थे।
नीतीश कुमार के साथ बिहार सरकार में मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद थे। सीएम ने इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की। चुनाव में कठिन परिश्रम के लिए कार्यकर्ताओं का आभार जताया।

4. सीनियर नेताओं से मुलाकात, मार्गदर्शन लेना
10 मार्च को निशांत जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह (दादा) से मिलने उनके घर गए। उनका आशीर्वाद लिया। उनकी सेहत को लेकर जानकारी ली। निशांत का मानना है कि दादा ने वर्षों तक पिताजी के साथ मिलकर संगठन और बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।

नीतीश क्या करते थेः नीतीश कुमार सीनियर नेताओं से बात-विचार करते रहे हैं। उन्होंने 2005 में सीएम बनने के पहले एनडीए के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ कई दौर की बैठकें की थी।
इन मुलाकातों के बाद बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जदयू और भाजपा ने सीटों के तालमेल और साझा रणनीति को अंतिम रूप दिया था।
चुनाव से पहले और बाद में भी मुलाकात का दौरा जारी रहा था। नीतीश अपनी पार्टी के सीनियर नेताओं शरद यादव और जॉर्ज फर्नांडीस के साथ बैठकें की। दोनों उस समय पार्टी (समता पार्टी) के प्रमुख चेहरे थे।
5. मंजू सिन्हा स्मृति पार्क पहुंचे, मां को नमन किया
जदयू में शामिल होने के बाद निशांत अपनी मां को श्रद्धांजलि देने । निशांत ने मां की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनसे आशीर्वाद लिया था। इसके बाद उन्होंने पटना साहिब गुरुद्वारा जाकर मत्था टेका। फिर महावीर मंदिर में पूजा अर्चना की।
सभी धर्मों के प्रति सम्मान और हर वर्ग को साथ लेकर चलने की अपने पिताजी की समावेशी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हाईकोर्ट मजार जाकर चादरपोशी की।
निशांत का कहना है कि पिताजी से यही सीख मिली है कि समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान ही सबसे बड़ी ताकत है।
नीतीश क्या करते थेः इससे पहले सीएम नीतीश कुमार ने अपने राजकाज के दौरान पत्नी स्व. मंजू सिन्हा की याद में कंकड़बाग पार्क का नामाकरण किया था। बिहार सरकार ने वहां मंजू सिन्हा की प्रतिमा स्थापित की। मंजू सिन्हा की याद में नीतीश यहां कई मौके पर पहुंचते रहे हैं। नीतीश कुमार भी अपनी मां की पुण्यतिथि पर गांव जरूर जाते रहे हैं।

नीतीश हर साल अपनी पत्नी की जयंती (24 फरवरी) और पुण्यतिथि (14 मई) पर इस पार्क में आकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मंजू सिन्हा एक शिक्षिका और समाजसेवी थीं, जिनका निधन 2007 में हुआ था।
6. निशांत की इफ्तार पॉलिटिक्स
जदयू की सदस्यता लेने के बाद निशांत काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं। अभी रमजान का महीना चल रहा है, जिसमें निशांत कभी चिराग पासवान के इफ्तार पार्टी में जा रहे हैं, तो कभी जीतन राम मांझी के इफ्तारी में शिरकत कर रहे।
इन इफ्तार पार्टियों में निशांत टोपी-गमछा पहनकर रोजेदारों से हाथ भी मिलाते दिखाई दे रहे हैं। सीएम आवास पर आयोजित इफ्तार पार्टी में तो निशांत कुमार टोपी-गमछा पहनकर रोजेदारों के साथ सबसे आगे तो नीतीश कुमार पीछे कुर्सी पर बैठकर दोनों हाथ जोड़ हुए देखे गए थे।

नीतीश क्या करते थेः सीएम नीतीश कुमार काफी सालों से इफ्तार पार्टी का आयोजन करते रहे हैं। वह सहयोगी नेताओं की इफ्तार पार्टी में भी शामिल होते रहे हैं।








