लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 50 से ज्यादा सांसदों ने पक्ष में वोट किया। इसके बाद पीठासीन ने प्रस्ताव पेश करने की परमिशन दे दी। अब इस प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा चलेगी।
विपक्ष ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। इस दौरान कांग्रेस ने स्पीकर की गैर-मौजूदगी में डिप्टी स्पीकर के नियुक्त ना करने पर सवाल उठाए। कहा कि चेयर पर बैठे पीठासीन जगदंबिका पाल कैसे इस दौरान कार्यवाही चला सकते हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश का नेतृत्व कमकोर और बुजदिल है।
डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परम्परा रही है। 16वीं लोकसभा में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को यह पद दिया गया था, जबकि, 17वीं और 18वीं लोकसभा में किसी को भी डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया गया।
- सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया और कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और जो व्यक्ति चेयर पर बैठे हैं, वे भी स्पीकर की मंजूरी से ही आए हैं, इसलिए वे इस प्रस्ताव पर कार्यवाही नहीं चला सकते। उन्होंने मांग की कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा।
- निशिकांत दुबे ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी व्यक्ति स्पीकर जैसी शक्तियां रखता है और वह कार्यवाही की अध्यक्षता कर सकता है। किरेन रिजिजू ने भी इस बात का समर्थन किया।
- केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर डिप्टी स्पीकर नियुक्त न करने को लेकर हमला बोला और कहा कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति ली जानी चाहिए। इसके बाद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि चेयर पर बैठे व्यक्ति को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है।
आखिर में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही चलाने का अधिकार है। कई सदस्यों ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में मौका दिया जाएगा।
अपडेट्स
अविश्वास प्रस्ताव के बीच गर्माया डिप्टी स्पीकर नियुक्त न करने का मुद्दा
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान एक बार फिर डिप्टी स्पीकर नियुक्त न किए जाने का मुद्दा गर्मा गया।
दो साल पहले भी यह मामला उठा था, जब ओम बिरला को लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष चुना गया था।
सरकार डिप्टी स्पीकर चुनाव क्यों नहीं करा रही इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि 17वीं लोकसभा (2019-2024) में केंद्र की भाजपा सरकार के पास 303 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत था, जिसके कारण सरकार को विपक्ष के साथ समझौता करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। विपक्षी नेताओं के मुताबिक सरकार ने जानबूझकर यह पद खाली रखा। क्योंकि इसे विपक्ष को देना पड़ता, विशेष रूप से कांग्रेस को जो सरकार की प्राथमिकता नहीं थी।
18वीं लोकसभा (2024-वर्तमान) में भी यही स्थिति बनी। भाजपा के पास 240 सीटें हैं। NDA गठबंधन के पास 293 सीटें हैं, जो बहुमत से अधिक हैं। इसके बावजूद सरकार ने विपक्ष की मांग को नहीं स्वीकारा।
लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। क्योंकि विपक्ष ने स्पीकर के लिए NDA उम्मीदवार को समर्थन देने की शर्त में डिप्टी स्पीकर का पद मांगा था।
जगदंबिका पाल ने गोगोई से कहा- प्रस्ताव कुछ और आरोप कुछ ओर लगा रहे
जगदंबिका पाल ने बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई को टोका। कहा कि देश ये भी देख रहा है कि प्रस्ताव कुछ और है। आरोप कुछ और हैं, जो विषय उससे नहीं जुड़ा है आप लगातार उस पर बोल रहे हैं। हमारे पीएम एक बिजनेसमैन के खिलाफ एक केस चल रहा है उसे लेकर दवाब में थे, या फिर एपस्टीन फाइल में आए नामों को लेकर दवाब में थे।
जगदंबिका पाल: देश ये भी देख रहा है कि प्रस्ताव कुछ और है। आरोप कुछ और हैं, जो विषय उससे नहीं जुड़ा है आप लगातार उस पर बोल रहे हैं।
गौरव गोगोई: ऐसा तब भी हुआ जब राहुल गांधी बोल रहे थे। स्पीकर ने आधिकारिक दस्तावेज मांगे। वे मान गए। जैसे ही वो आगे आए ट्रेजरी बेंच से सारे मंत्री खड़े हो गए। उन्हें लगातार टोका गया। क्या वो नहीं चाहते कि वो सेना के बारे में जो कहें वो रिकॉर्ड में जाए।
एक पूर्व आर्मी चीफ की बात को रख रहे हैं तो गंभीरता से रख रहे होंगे। क्या उनकी किताब पब्लिश नहीं हुई तो उनकी आवाज झूठी है। गलत है।
जगदंबिका पाल: आप आज क्या कह रहे हैं। जो सदन का सदस्य नहीं उसका रिफरेंस दे रहे हैं। स्पीकर पर आरोप लगाए हैं उस पर क्यों नहीं बोलते।
गौरव गोगोई: जब राहुल गांधी यह बात उठा रहे थे। सत्ता पक्ष से विरोध हो रहा था। उस वक्त संचालन स्पीकर कर रहे थे। इसलिए यह मोशन जब हम ला रहे हैं कि नेता विपक्ष को मौका नहीं मिलता, उसी बात को हम उठा रहे हैं।
जगदंबिका पाल: आप खुद कह रहे हैं किताब पब्लिश नहीं है। यानी वह पब्लिक डोमेन में नहीं है। इसके बाद पीठासीन पाल ने लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित कर दी।
गौरव गोगोई ने कहा, हमने देखा जब LOP खड़े हुए बोलने के लिए तब 20 बार उन्हें टोका गया। गृह मंत्री, संसदीय मंत्री, रक्षा मंत्री बार बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने से रोका गया। वे केवल यह कहना चाहते थे कि जब सेना को देश के नेता की जरूरत थी तब उन्होंने कहा था कि जो करना है कर लो। उन्होंने कहा कि जो हम कह रहे हैं कि स्पीकर ने नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया। उन्हें बार बार टोका गया। वे कहते रहे कि जब देश की सीमा पर खतरा था, जब सेना को रक्षामंत्री और पीएम की जरूरत थी। तब उन्होंने तत्परता नहीं दिखाई। उन्हें घंटों रुकना पड़ा। हमारी सेना अनुशासित है, वह राजनैतिक लीडरशिप को देखती है। टैंक आ रहे थे। सेना गुहार लगा रही थी कि हमें बताएं क्या करना है। लीडरशिप कहती है जो करना है कर लो। मैं कहूंगा कि देश का नेतृत्व कमजोर है। बुजदिल है। जगदंबिका पाल ने कहा- यह मोशन स्पीकर के खिलाफ है आप वहीं तक सीमित रहेंगे। किरेन रिजिजू- मेरा अनुरोध है कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। लेकिन आप उससे ऊपर नेतृत्व तक चले गए हैं। इसलिए जब हम बोलेंगे तो आपको सुनना पड़ेगा। गौरव ने कहा-जब भविष्य में यह देखा जाएगा कि संसद में सबसे ज्यादा व्यवधान किरेन रिजिजू ने ही किया।
गौरव गोगोई ने पाल से कहा- आप चेयर पर बैठेंगे यह किसने तय किया
गौरव गोगोई ने कहा ने कहा, रेबिया केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो स्पीकर और उसकी चेयर पर बैठने वाला पक्षपात नहीं करेगा। चर्चा की शुरुआत में आर्टिकल 96 से हुई। इसमें लिखा है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान स्पीकर चेयर पर नहीं बैठ सकता। मैं पूछना चाहता हूं कि स्पीकर ने एक पैनल बनाया उसमें से कौन कौन चेयर पर बैठेगा, यह कैसे तय होगा। इसमें आपका नाम भी है कि आप स्पीकर की गैरमौजूदगी में स्पीकर की चेयर पर बैठेंगे यह किसने तय किया।
जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर के ऑफिस को यह पावर है कि वे तय कर सकते हैं कि चेयरपर्सन पैनल में कौन होगा।
अमित शाह ने बीच में टोका और कहा- सदन जब चुनाव में जाता है तब भी स्पीकर का ऑफिस चालू रहता है। यह पद खाली नहीं रहता है। गोगोई जो गलत मतलब निकाल रहे हैं मैं उसका खंडन करने के लिए खड़ा हुआ हूं।
जगदंबिका पाल ने कहा कि अगर हाउस डिसॉल्व भी हो जाता है तब भी स्पीकर का ऑफिस चालू रहता है। गौरव ने कहा- सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता।
संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।
पीएम खुद कहते हैं कि यह लोकतंत्र का मंदिर है। इसका दरवाजा हर तबके के सदस्य के लिए खुला है। यहां बाबा साहेब ने लोकसभा स्पीकर के दायरे के बारे में कहा है कि संवैधानिक नैतिकता की मांग है कि पक्षपात रहित होना चाहिए।
लोकसभा के चेयर पर मौजूद जगदंबिका पाल ने बताया कि 10 घंटे बहस के लिए तय किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री रिजिजू का कहना है कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाया जाए, तो चेयरपर्सन के पैनल के सदस्य जगदंबिका पाल लोकसभा की अध्यक्षता कर सकते हैं।
यह बहस आर्टिकल 94 के तहत होगी, जिसमें स्पीकर को पद से हटाने की मांग की गई है। बहस के समय खास नियम हैं कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में हो, तब स्पीकर खुद सदन की अध्यक्षता नहीं करते। उस समय डिप्टी स्पीकर या कोई अन्य सदस्य सदन की कार्यवाही चलाता है।
कांग्रेस MP केसी वेणुगोपाल का कहना है कि सरकार ने पिछले कई सालों से डिप्टी स्पीकर को नियुक्त नहीं किया है, जिससे संवैधानिक वैक्यूम बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि सदन को एक ऐसे व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए जो प्रस्ताव पर बहस के दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता करेगा। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष की आपत्तियां बेबुनियाद हैं।
बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। मोहम्मद जावेद की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद सदन की कार्यवाही कौन संभालेगा। सौगत राय, असदुद्दीन ओवैसी और वेणुगोपाल राय ने इस पर रूल्स ऑफ प्रोजिसर के नियम बताए।
भाजपा सांसद मनोज तिग्गा ने कहा- मुझे लगता है कि ममता बनर्जी को भारत के संविधान और डेमोक्रेटिक सिस्टम पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री को पता होना चाहिए कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया एक संवैधानिक संस्था है जिसके तहत यह काम हो रहा है। यह सिर्फ पश्चिम बंगाल में नहीं हो रहा है, यह 12 राज्यों में हो रहा है।
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के साथ हमारे रिश्ते खराब कर दिए हैं। महंगाई की नई लहर दी है। वह जल्द ही लोगों से कहेंगे कि वे अपनी छत पर ‘सूरज की किरणों’ का इस्तेमाल करके ‘खिचड़ी’ पकाएं, क्योंकि देश में LPG की कमी होने लगी है।






