ईरान के खिलाफ इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स के मिलिट्री हमले ने वहां पढ़ रहे हजारों भारतीय स्टूडेंट्स की सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. ईरान पर बढ़ते टेंशन के बीच आइए जानते हैं कि आखिर भारतीय स्टूडेंट्स ईरान में क्या पढ़ने जाते हैं और अभी वहां पर कितने छात्र मौजूद हैं.
अभी ईरान में कितने भारतीय स्टूडेंट्स हैं?
पिछले 10 सालों में ईरान भारतीय स्टूडेंट्स के लिए एक पसंदीदा जगह बन चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी ईरान में लगभग 1500 से 2000 भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं. यह संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है. 2019 में देश में लगभग 737 भारतीय स्टूडेंट्स थे. 2024 तक यह संख्या लगभग तीन गुना बढ़कर 2000 के करीब पहुंच गई. ऐसा कहा जा रहा है कि इनमें से एक बड़ा हिस्सा जम्मू और कश्मीर से है. जम्मू और कश्मीर से लगभग 1200 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं.
ईरान क्या पढ़ने जाते हैं भारतीय स्टूडेंट्स?
भारतीय स्टूडेंट ईरान को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वहां पर मेडिकल की पढ़ाई होती है. कई ईरानी यूनिवर्सिटी डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री देती हैं, जिसे भारत में MBBS के बराबर माना जाता है. ईरान में 6 साल की मेडिकल पढ़ाई का कुल खर्च ₹15 लाख से ₹30 लाख तक होता है. इसी के साथ सालाना फीस लगभग ₹6 लाख तक होती है. इसकी तुलना में भारत में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ₹35 लाख से ₹1.25 करोड़ के बीच चार्ज करते हैं. इससे ईरान मिडिल क्लास परिवारों के लिए ज्यादा सस्ता ऑप्शन बन जाता है.
एडमिशन प्रक्रिया आसान
भारत में MBBS सीट पाने के लिए काफी ज्यादा कंपटीशन की वजह से NEET-UG एक्जाम में काफी ज्यादा स्कोर की जरूरत होती है. सरकारी कॉलेज की सीटें लिमिटेड हैं, जबकि प्राइवेट कॉलेज काफी महंगे हैं. ईरान में एलिजिबिलिटी के लिए आमतौर पर NEET पास करना ही काफी होता है. कुछ यूनिवर्सिटी अपने एंट्रेंस एग्जाम खुद करवाती हैं. लेकिन कोई डोनेशन या फिर कैपिटेशन फीस नहीं होती.
मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी
ईरान की कई मेडिकल यूनिवर्सिटी 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं. ईरान की कई यूनिवर्सिटी को भारत के नेशनल मेडिकल कमीशन और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से मान्यता मिली हुई है. इस मान्यता से भारतीय ग्रेजुएट घर लौटकर लाइसेंसिंग एग्जाम दे सकते हैं.
धार्मिक पढ़ाई भी एक बड़ी वजह
मेडिकल पढ़ाई के अलावा कई भारतीय स्टूडेंट्स खासकर शिया समुदाय से ईरान धार्मिक पढ़ाई के लिए जाते हैं. कॉम और मशहद जैसे शहर शिया इस्लामिक पढ़ाई के बड़े सेंटर हैं. कॉम को अपने मदरसों और धार्मिक संस्थानों के लिए जाना जाता है.
इसके अलावा एक और बड़ा फायदा पढ़ाई का मीडियम है. ईरान में मेडिकल कोर्स पहले एक या दो साल इंग्लिश में पढ़ाए जाते हैं. बाद में स्टूडेंट्स को क्लीनिकल बातचीत के लिए बेसिक फारसी सीखनी पड़ती है. यहां पर रहने का खर्च भी काफी सस्ता है. हॉस्टल और खाने को मिलाकर महीने का खर्च ₹10,000 से ₹12,000 के बीच है.







