बिहार में अब विधायकों, विधान पार्षदों, सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। बजट सत्र में विधानसभा में बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप के सवाल के जवाब के दौरान सरकार ने इसका ऐलान किया है। 8 मिनट में सरकार ने ये फैसला लिया। इससे प्रदेश के 10 लाख कर्मचारियों और उनके आश्रितों को फायदा मिलेगा।
पहले सवाल-जवाब के दौरान सम्राट चौधरी ने कैशलेस इलाज पर बैठक की बात कही। स्पीकर ने भी बीजेपी विधायकों को कहा, कि 7 दिन में बैठक बुला रहे हैं। इसके बाद बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप अड़ गए।
वहीं जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा भी मांग पर अड़ गए और कहा, सरकार यहीं है तो बैठक की क्या बात है। विधायक राघवेंद्र प्रताप ने कहा, सरकार यहीं है। मुख्यमंत्री भी बैठे हैं फिर बैठक की जरूरत क्या है। इसके बाद डिप्टी सीएम ने कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दिए जाने का ऐलान किया।
बिहार में अब पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनेंगे। सदन में सम्राट चौधरी ने इसका ऐलान करते हुए कहा, ‘जल्द इसे लेकर सरकार पॉलिसी लाएगी।’
इस दौरान गृह मंत्री ने ये भी कहा कि सरकारी डॉक्टरों को सुविधा देने के बाद भी अस्पताल नहीं आते हैं। ऐसे में सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस से रोकने के लिए भी पॉलिसी बनाई जा रही है।
BJP MLA के ही सवाल पर ही उलझे मंत्री, सम्राट चौधरी ने संभाला मोर्चा
बीजेपी विधायक नीतीश मिश्रा ने सवाल पूछा- एक CHC का पैमाना क्या है, कितने डॉक्टर, नर्स और स्टाफ हैं।
इस पर प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने जवाब दिया अगले वित्तीय वर्ष में इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस जवाब पर पूरा सदन ठहाका लगाने लगा। सम्राट चौधरी बार-बार उन्हें समझा रहे हैं लेकिन चंद्रवंशी किरकिरी करा रहे हैं।
नीतीश मिश्रा ने पूरक सवाल में पूछा कि जब 20 बेड पहले से है, वहां मैन पावर नहीं हैं तो फिर इन्फ़्रस्ट्रक्चर क्यों बनाया। क्या जर्जर करने के लिए।
नीतीश मिश्रा के सवाल से प्रभारी मंत्री घिर गए। इसके बाद एक बार फिर से सम्राट चौधरी ने मोर्चा संभाला। जवाब दिया कि 2025 में पोस्ट स्वीकृत हुआ है, जल्द नियुक्ति होगी, जिसके बाद नीतीश मिश्रा शांत हुए।







