बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान राज्य के प्रवासी मजदूरों को हो रही कठिनाइयों को लेकर चिंतित और दुखी हैं। उन्होंने कहा कि यह देखकर उन्हें बहुत दुख होता है कि बिहार के लोग रोजगार के लि हजारों किलोमीटर दूर जाने के लिए मजबूर हैं। और अपने घर से इतनी दूरी पर जाने के बावजूद वे सिर्फ करीब 10 हजार रुपये प्रति माह की तनख्वाह पाते हैं।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने यह बात गुजरात के सूरत शहर में शुक्रवार को ‘एनर्जी पॉवर इलेक्ट्रिकल एक्सपो 2026’ के उद्घाटन समारोह में कही। यह एक्सपो दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
किसी को अच्छे रोजगार के लिए घर न छोड़ना पड़े
आरिफ मोहम्मद खान ने स्पष्ट किया कि वे अन्य राज्यों में रोजगार के लिए लोगों के जाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह आवश्यक है कि बिहार में इतना विकास हो कि लोगों को अच्छे रोजगार के लिए घर न छोड़ना पड़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि मजदूरों को सिर्फ जीवन यापन के लिए घर छोड़ने पर मजबूर नहीं होना चाहिए।
घर से दूर, फिर भी सिर्फ 10 हजार वेतन
राज्यपाल ने कहा कि, “मेरा दिल तब दुखता है जब एक मजदूर लद्दाख तक सड़क बनाने के लिए जाता है और उसे वहां सिर्फ 10 हजार ही मिलता है। लोग भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूम कर सीख सकते हैं और देश को समझ सकते हैं, लेकिन हमारे राज्य में इतना विकास होना चाहिए कि लोग अपने घर के पास ही कमाई कर सकें।”
बिहार में निवेश करने की अपील
राज्यपाल ने सूरत में बिहार के प्रवासियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की ओर इशारा करते हुए कहा कि करीब सात लाख कामगार बिहार से सूरत में आकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, “हमारे लोगों में बुद्धिमानी या मेहनत की कमी नहीं है। इसलिए मैं उद्योग और व्यापार जगत के लीडरों से अनुरोध करता हूं कि वे बिहार पर ध्यान दें। हमारे पास सब कुछ है, बस हमें एक मार्गदर्शक शक्ति की जरूरत है।”
बिहार में औद्योगिक विकास को लेकर राज्यपाल खान ने कहा, “नुकसान की भरपाई और विकास की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने में समय लगता है। लेकिन राज्य में अब उत्साह है, जो भी बिहार आएगा उसे पूरा समर्थन मिलेगा।” उन्होंने उद्योगपतियों से अपील की कि वे बिहार में निवेश करें। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास कार्यों को फिर से गति देने में समय लगता है।






