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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को लगाई फटकार , ‘चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा न लें’-CJI सूर्यकांत ने पटना लौटाया

UB India News by UB India News
February 7, 2026
in पटना, बिहार
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को लगाई फटकार , ‘चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा न लें’-CJI सूर्यकांत ने पटना लौटाया
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सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि चुनाव हारने के बाद किसी को अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए। बिहार चुनाव 2025 में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि महिला रोजगार योजना के पैसे मतदान से ठीक पहले महिलाओं के खाते में आए। इस वजह से चुनाव प्रभावित हुआ। हालांकि, चुनाव आयोग ने याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस  जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि जब जनता आपको नकार दे तो आदालत का इस्तेमाल लोकप्रियता पाने के लिए नहीं करना चाहिए।

जन सुराज पार्टी की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस याचिका में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा हम नोटिस जारी नही कर सकते। सीजेआई ने कहा कि चुनाव याचिका में एक चुनाव को मुद्दा बनाया जाता है। आप एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद्द करने की बात कर रहे हैं। इसकी योग्यता नहीं है।

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सीजेआई ने क्या कहा?

जन सुराज पार्टी का पक्ष रख रहे वकील ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। अदालत को इसमें हस्तक्षेप कर जवाब तलब करना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,”चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा न लें।” मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सवाल किया कि आपकी राजनीतिक पार्टी को कितने वोट मिले? अदालत ने कहा कि जब जनता चुनाव में नकार देती है, तो फिर अदालत के मंच का इस्तेमाल लोकप्रियता पाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। सीजेआई ने साफ कहा कि कोई चाहे तो योजना को चुनौती दे सकता है, लेकिन यहां मुख्य मांग चुनाव को रद्द करने की है। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित राज्य में हाईकोर्ट मौजूद है, और याचिकाकर्ता को पहले वहीं जाना चाहिए।

वहीं, याचिकाकर्ता ने दलील कि जब राज्य में आचार संहिता लागू था, उस दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किया गया. इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि  यह महिलाओं की सहायता के लिए जारी राशि का हिस्सा था. सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत किशोर की पार्टी के तरफ वकील चंद्र उदय सिंह ने दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि यह तय समय पर सोच समझकर किया गया और यह सभी महिलाओं के लिए हो गया जिनके पति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं हैं.

जनसुराज की क्या दलील?
प्रशांत किशोर की पार्टी के तरफ से पेश वकील ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है. अदालत को इसमें हस्तक्षेप कर जवाब तलब करना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ कर दिया कि हम नोटिस जारी नहीं कर सकते हैं.
क्या थी याचिका में डिमांड? दरअसल, जनसुराज की ओर से दायर याचिका में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई थी. जनसुराज की याचिका में 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए राज्य की एक कल्याणकारी योजना के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था.
चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
  • सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव हारने के बाद राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करने की कोशिश करने पर जनसुराज को फटकार लगाई. प्रशांत किशोर की पार्टी ने 2025 के चुनावों में 243 विधानसभा सीटों में से 242 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आपको कितने वोट मिले? जब लोग आपको नकार देते हैं, तो आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं! किसी को तो उस समय ही योजना को चुनौती देनी चाहिए थी. यह हमारे सामने प्रार्थना नहीं है. आप बस चुनाव को रद्द घोषित करवाना चाहते हैं.’
  • खास बात यह है कि कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर फैसला करने के लिए हाईकोर्ट सही मंच है. सीजेआई ने कहा, ‘चूंकि यह सिर्फ एक राज्य से जुड़ा मामला है, इसलिए कृपया उस हाई कोर्ट में जाएं.कुछ मामलों में  मुफ्त योजनाओं का गंभीर मुद्दा है जिसकी हम गंभीरता से जांच करेंगे.’
  • जनसुराज की दलील: जन सुराज पार्टी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि जिस योजना के तहत मतदाताओं को भुगतान किया गया था, उसे चुनावों से ठीक पहले घोषित किया गया था और भुगतान तब किया गया जब आचार संहिता लागू थी.
  • सीयू सिंह ने तर्क दिया, ‘लेकिन जब किसी राज्य में गंभीर वित्तीय घाटा हो और यह एक तरह की खैरात हो कि 10,000 रुपये तुरंत दिए जाएंगे और आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद 35 लाख से ज़्यादा लोग इस योजना में नामांकित हो गए.’
  • CJI ने जवाब दिया कि डायरेक्ट ट्रांसफर योजना अलग है. यह महिला स्वयं सहायता समूहों के बारे में है.
  • कोर्ट ने कहा कि हालांकि वह मुफ्त योजनाओं के मुद्दे की जांच करेगा, लेकिन उसे याचिकाकर्ता की नेकनीयती भी देखनी होगी.
  • जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘हम मुफ्त योजनाओं के मुद्दे पर विचार करेंगे. लेकिन हमें नेकनीयती भी देखनी होगी… हम किसी ऐसी पार्टी के कहने पर ऐसा नहीं कर सकते जो अभी-अभी चुनाव हारी है. जब आप सत्ता में आएंगे, तो आप भी ठीक वैसा ही करेंगे.’
  • इसके बाद जनसुराज ने याचिका वापस ले ली. याचिका के अनुसार, इस योजना के लिए पात्रता महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप के नेटवर्क, जीविका की सदस्यता से जुड़ी थी. राज्य सरकार ने घोषणा की कि जो महिलाएं पहले से जीविका का हिस्सा नहीं हैं, वे भी लाभ पाने के लिए एनरोल कर सकती हैं.
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