उच्चतम न्यायालय पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करेगा, जिसमें अपना पक्ष खुद रखेंगी ममता बनर्जी। सूत्रों के मुताबिक, कानून की डिग्री (LLB) रखने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर अपनी बात रख सकती हैं। बार एंड बेंच के मुताबिक ममता बनर्जी ने कलकत्ता के जोगेश चंद्र चौधरी विधि महाविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की है और उनके वकील के रूप में काम करने की आखिरी रिपोर्ट 2003 की है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति अब सियासी मंच से निकलकर सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है. राज्य में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मामला सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं है. यह लोकतंत्र, अधिकार और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की बहस में बदलता दिख रहा है. सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख सकती हैं.
ममता बनर्जी होंगी पहली मुख्यमंत्री
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को जब मतदाता सूची के भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर सुनवाई के लिए आएंगी, तो अनुमति मिलने पर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वयं अपना मामला पेश करने वाली पहली मौजूदा मुख्यमंत्री बन सकती हैं।ममता बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी को दायर की थी।
अहम है आज की सुनवाई
बता दें कि आज की सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई बंगाल की भावी राजनीति और आगामी चुनावों की निष्पक्षता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ममता बनर्जी एसआईआर के मामले में दायर अन्य याचिकाओं पर बुधवार को होने वाली अहम सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में मौजूद रह सकती हैं। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम.पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
इस मामले में ममता बनर्जी निर्वाचन आयोग (ईसी) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था। बनर्जी ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को पत्र लिखकर चुनाव से पहले राज्य में जारी “मनमाने और खामियों से भरे” एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था। उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को विभिन्न निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी. इसमें जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं. बेंच जल्द ही बैठने वाली है और कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ है. इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोर्ट नंबर-1 में मौजूद हैं, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान उनके पक्ष में पैरवी करेंगे. वहीं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी कोर्ट नंबर-1 पहुंच चुके हैं. इससे सुनवाई को लेकर हलचल और तेज हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट में अभी मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) की बेंच नहीं बैठी है. इसके चलते कार्यवाही शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है. संबंधित मामले की सुनवाई बेंच के बैठने के बाद शुरू होगी और इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुप्रीम कोर्ट के लिए रवाना हो गई हैं. वह तय समय पर कोर्ट पहुंचकर निर्धारित सुनवाई और कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी, जहां उनके पहुंचने को लेकर सियासी हलकों में भी हलचल बनी हुई है.
न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार इस मामले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं के वोट देने का अधिकार छीनने की कोशिश हो रही है. उन्होंने आयोग पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप भी लगाया है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करने जा रही है. इस सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं. यह फैसला सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि देश की चुनावी प्रक्रियाओं पर भी बड़ा असर डाल सकता है.
SIR विवाद आखिर है क्या?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वोटर लिस्ट की जांच और संशोधन की प्रक्रिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि इसका मकसद वोटर लिस्ट को साफ और सटीक बनाना है. लेकिन ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए असली मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं. खासकर समाज के कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है. इसी वजह से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.
क्या ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में जिरह कर सकती हैं?
भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अपने केस में खुद पक्ष रख सकता है. अगर ममता बनर्जी ऐसा करती हैं तो यह बेहद असाधारण और ऐतिहासिक घटना होगी. हालांकि आमतौर पर संवैधानिक मामलों में वरिष्ठ वकील पक्ष रखते हैं. लेकिन राजनीतिक संदेश और जनसंपर्क के नजरिए से ममता बनर्जी का खुद अदालत में खड़ा होना बड़ा कदम माना जा सकता है. इससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.
इस मामले का चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद बंगाल विधानसभा चुनाव की दिशा तय कर सकता है. अगर सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो चुनाव आयोग को प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है. वहीं अगर आयोग का पक्ष मजबूत रहता है तो TMC इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जा सकती है. दोनों ही स्थिति में यह मामला चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर सकता है.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सियासी टकराव
सुप्रीम कोर्ट की बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं. यही बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. इससे पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन भी इसी मुद्दे पर कोर्ट का रुख कर चुके हैं. ममता बनर्जी ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष ऑब्जर्वर और माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं, जो राजनीतिक मंशा को दर्शाता है.
आगे क्या हो सकता है?
- सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया पर रोक या संशोधन के निर्देश दे सकता है.
- चुनाव आयोग को अपनी प्रक्रिया का विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है.
- यह विवाद बंगाल चुनाव का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.
- ममता बनर्जी का कानूनी और राजनीतिक दांव राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है.