आपने ग्रीन इकॉनमी और डिजिटल इकॉनमी के बारे में तो बहुत सुना होगा, लेकिन क्या कभी ‘ऑरेंज इकॉनमी’ का नाम सुना है? यह कोई फल या रंग से जुड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि एक नई तरह की अर्थव्यवस्था है जो पूरी तरह कला, संस्कृति, क्रिएटिविटी और कंटेंट पर टिकी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में इसका जिक्र किया और बताया कि भारत में यह तेजी से बढ़ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऑरेंज इकॉनमी की तीन मुख्य धारा हैं. इसमें कंटेंट, क्रिएटिविटी और कल्चर शामिल है. यही ऑरेंज इकॉनमी का मूल है.
पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत का संगीत और क्रिएटिव कंटेंट दुनिया में अपनी पहचान बनाएगा. इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले कोलंबिया के पूर्व राष्ट्रपति इवान ड्यूक मारक्वेज़ और पूर्व संस्कृति मंत्री फेलिप बुइत्रागो ने किया था. उनका मानना था कि “ऑरेंज रंग” संस्कृति और क्रिएटिविटी का प्रतीक है. फेलिप बुइत्रागो के अनुसार, जब आप फिल्मों, म्यूजिक, गेम्स, फैशन, थिएटर, डिज़ाइन और क्राफ्ट जैसी चीज़ों की बात करते हैं, तो आप हमारी पहचान और सांस्कृतिक शक्ति की बात कर रहे होते हैं. यही है ऑरेंज इकॉनमी एक ऐसी दुनिया जहां सपने देखने वाले, बनाने वाले और बदलाव लाने वाले लोग एक साथ काम करते हैं.
‘ऑरेंज इकॉनमी’ तेजी से भारत में आगे बढ़ रही
विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग कार्यक्रम दिल्ली के भारत मंडपम में 9 से 12 जनवरी 2026 तक चला. इसमें देश भर के लाखों युवाओं ने हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने कार्यक्रम के आखिरी दिन यानी 12 जनवरी को युवाओं को संबोधित किया. इस दिन स्वामी विवेकानंद की जयंती भी था, जिसके नाम पर नेशनल यूथ डे मनाया जाता है. पीएम ने कहा कि युवाओं की क्रिएटिविटी और एनर्जी से ही देश मजबूत बनेगा. पीएम मोदी ने बताया कि डिजिटल इंडिया ने देश में क्रिएटर्स की एक नई पीढ़ी तैयार की है. इसी वजह से भारत में ‘ऑरेंज इकॉनमी’ बहुत तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि ऑरेंज इकॉनमी यानी संस्कृति, कंटेंट और क्रिएटिविटी पर आधारित अर्थव्यवस्था है. यह तेजी से आगे बढ़ रही है. भारत अब मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूजिक, डिजिटल कंटेंट और वीआर-एक्सआर जैसे सेक्टर्स में ग्लोबल हब बन रहा है. पीएम ने कहा कि डिजिटल इंडिया की वजह से क्रिएटिविटी और कल्चर से जुड़े कामों में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं. युवा इन क्षेत्रों में इनोवेशन कर रहे हैं, जिससे घर में रोजगार बढ़ रहे हैं और भारत दुनिया में लीडर बन रहा है.
पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि रामायण और महाभारत जैसी हमारी पुरानी कहानियां बहुत बड़ी हैं. सवाल यह है कि क्या हम इन्हें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते हैं. इससे हमारी संस्कृति दुनिया भर में फैलेगी और अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी. उन्होंने युवाओं को रिस्क लेने से न डरने की सलाह दी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार उनके साथ है. पिछले दस सालों में सुधारों की रफ्तार बढ़ी है और इसका दिल युवा शक्ति है. 2047 तक जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब युवाओं की मेहनत से देश विकसित बनेगा. यह कार्यक्रम विकसित भारत के विजन से जुड़ा था. इसमें 50 लाख से ज्यादा युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया. 30 लाख से ज्यादा ने विकसित भारत चैलेंज में आइडिया शेयर किए. तीन चरणों में युवाओं को चुना गया जिसमें डिजिटल क्विज, निबंध और राज्य स्तर पर विजन प्रेजेंटेशन था.
कैसे भारत के लिए कमाल करेगी ऑरेंज इकॉनमी?
युवाओं ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और डेमोक्रेसी में युवा भागीदारी जैसे टॉपिक पर अच्छे आइडिया दिए. पीएम ने इनकी तारीफ की और कहा कि जेन जेड क्रिएटिविटी से भरपूर है. वे नए आइडिया, एनर्जी और पर्पस से देश बना रहे हैं. हमारे देश के लिए ऑरेंज इकॉनमी युवाओं के लिए बड़ा मौका है. फिल्म, गेमिंग, म्यूजिक, डिजिटल कंटेंट जैसे फील्ड में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार भी सपोर्ट कर रही है. अगर युवा मेहनत करेंगे तो भारत मजबूत बनेगा. हालांकि संयुक्त राष्ट्र के 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स यानी एसडीजी में कला या संस्कृति का नाम सीधे नहीं लिया गया है, लेकिन ऑरेंज इकॉनमी हर लक्ष्य में कहीं न कहीं बहुत मदद करती है.
मधुबनी पेंटिंग से लेकर वारली आर्ट तक में छिपी पुरानी कहानियां
भारत में ऑरेंज इकॉनमी का स्कोप बहुत बड़ा है क्योंकि हमारी संस्कृति और क्रिएटिविटी दुनिया में सबसे समृद्ध है. बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्में जैसे तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी सिनेमा हर साल हजारों फिल्में बनाती हैं और दुनिया भर में लाखों लोगों तक पहुंचती हैं. ये फिल्में न सिर्फ मनोरंजन करती हैं बल्कि भारतीय मूल्यों, कहानियों और सॉफ्ट पावर को फैलाती हैं. लोक कला और कलाकार जैसे राजस्थान की लोक नृत्य, मधुबनी पेंटिंग, वारली आर्ट, बंगाल की टेराकोटा और कई राज्यों की हस्तशिल्प आज भी जीवित हैं. ये कला ग्रामीण इलाकों में रोजगार देती हैं और पर्यटन को बढ़ावा देती हैं. यूट्यूब, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स का दौर अब तेजी से बढ़ रहा है. छोटे शहरों और गांवों के युवा घर बैठे वीडियो बनाते हैं, गेम डेवलप करते हैं और लाखों-करोड़ों कमाते हैं. पिछले कुछ सालों में यूट्यूब ने भारतीय क्रिएटर्स को हजारों करोड़ रुपये दिए हैं. गेमिंग इंडस्ट्री भी तेजी से बढ़ रही है और रामायण-महाभारत जैसी पुरानी कहानियों को गेम में बदलने की बात पीएम मोदी ने भी कही है.
सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स का है हिस्सा
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रिएटिविटी, संस्कृति और कला एसडीजी को हासिल करने का एक मजबूत तरीका और लक्ष्य दोनों हैं. उदाहरण के लिए शिक्षा में थिएटर, म्यूजिक और आर्ट के जरिए बच्चे रचनात्मक तरीके से सीखते हैं, जो बेहतर शिक्षा को बढ़ावा देता है. रोजगार के मामले में युवा कलाकार, डिजाइनर, गेम डेवेलपर्स और डिजिटल क्रिएटर्स को नई-नई नौकरियां मिलती हैं, जिससे आर्थिक विकास और अच्छी नौकरियां बढ़ती हैं. शहरी टिकाऊ विकास में संस्कृति आधारित पर्यटन और स्मार्ट सिटी मॉडल काम करते हैं, जहां लोकल कल्चर से शहर आकर्षक बनते हैं. सामाजिक समावेशन में अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद बढ़ता है, विविधता का सम्मान होता है और लोग एक-दूसरे को समझते हैं.
ऑरेंज इकॉनमी सिर्फ कला या मनोरंजन नहीं है, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था है. यह लोगों को जोड़ती है, रोजगार पैदा करती है और शांति का संदेश फैलाती है. यह साबित करती है कि कला सिर्फ दिखावे की चीज नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक ताकत है.







