उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों ने बागी तेवर अपना रखा है। इस बीच खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा अपनी बहू को माधव आनंद के विधायक बनने से खाली हुई जगह पर एडजस्ट करना चाहते हैं। वो अपनी बहू साक्षी मिश्रा को राज्य नागरिक परिषद को उपाध्यक्ष बनाने की जुगत में है। उन्होंने इसकी तैयारी कर ली है और बहू साक्षी मिश्रा नाम का प्रस्ताव भी भेज दिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य नागरिक परिषद का गठन किया गया था। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली इस परिषद में दो उपाध्यक्ष बनाए गए थे। इस पर्षद में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद को उपाध्यक्ष बनाया गया था।
माधव आनंद विधायक बन गए हैं। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने माधव आनंद को मधुबनी से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में इनकी जीत हो गई। ऐसी स्थिति में नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष का पद खाली हो गया है।
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के बागी विधायक की माने तो कुशवाहा ने अपनी बहू साक्षी मिश्रा के नाम का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी को भेज भी दिया है।
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक ने पत्नी साक्षी मिश्रा (35) से लव मैरिज की है। साक्षी ब्राह्मण परिवार से हैं और दीपक कुशवाहा समाज से आते हैं। शादी के बाद साक्षी अपना नाम साक्षी मिश्रा कुशवाहा लिखती हैं।
अब जानिए कौन हैं साक्षी मिश्रा
यूपी के रिटायर्ड IAS एसएन मिश्रा की बेटी साक्षी सोशल वर्कर हैं। साक्षी दो बहने और एक भाई हैं। उनकी मां का देहांत हो चुका है। अपनी खूबसूरती को लेकर चर्चा में रहती हैं। उनके दोस्तों के मुताबिक, सरल और मृदु भाषी दीपक प्रकाश की सादगी से प्रभावित होकर साक्षी ने उनको लाइफ पार्टनर बनाने का फैसला लिया था। शादी के बाद से साक्षी अपने ससुराल पटना में रहती हैं। साथ ही सोशल वर्क पर फोकस करती हैं।
पार्टी के विधायक नाराज हैं
RLM विधायक रामेश्वर महतो ने कहा है कि पार्टी के 3 विधायक नाराज हैं। बेटे को मंत्री बनाना से हम लोग नाराज हैं। ये फैसला पार्टी और कार्यकर्ताओं के हित में नहीं था। ये आत्मघाती फैसला है।
कुशवाहा की पार्टी में बगावत की वजह समझिए
दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव बाद आखिरी समय में मास्टर स्ट्रोक चला था। उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिला दी। जबकि दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।
उपेंद्र कुशवाहा पहले से राज्यसभा के सांसद हैं। राजनीति से दूर रहने वाली पत्नी को इस बार सासाराम से विधायक बनवा दिया। यही कारण है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
बगावत रोकने के लिए पार्टी की हर इकाई को भंग किया था
इससे पहले पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे बगावत को काबू करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने 30 नवंबर को रालोमो की प्रदेश इकाई, सभी जिला इकाइयों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था।
कोर कमेटी की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया था। पार्टी को चलाने के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन भी किया गया है।
बेटे को मंत्री बनाकर कुशवाहा ने चला MLC सीट वाला दांव
कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट दीपक प्रकाश फिलहाल किसी सदन (विधानसभा/विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं। अब मंत्री बने हैं तो उन्हें 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य बनना होगा, वरना मंत्री पद छोड़ना होगा।
सीनियर जर्नलिस्ट कुमार प्रबोध बताते हैं कि, ‘सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय विधायक बन गए हैं। पहले वह विधान परिषद के सदस्य थे। अब भाजपा कोटे से उनकी सीट खाली होगी। NDA की 243 में से 202 सीटों पर जीत से कुशवाहा को डर होगा कि कहीं भाजपा MLC पद से मुकर ना जाए। इसलिए उन्होंने बेटे को मंत्री बनाकर दांव चल दिया।’
5 पॉइंट में समझिए कुशवाहा BJP के लिए क्यों जरूरी
- उपेंद्र कुशवाहा कोइरी समाज से आते हैं। बिहार में कोइरी समाज की आबादी 4.2% है। इनका मगध, शाहाबाद, सीवान, भागलपुर-बांका, पूर्णिया और बेतिया-मोतिहारी इलाके की 40 से 45 सीटों पर प्रभाव है।
- 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM 6 सीटों पर चुनाव लड़ी, 4 सीटें जीती। उनके NDA में आने से भाजपा-JDU को फायदा हुआ है।
- 2020 में जिस मगध की 47 में से सिर्फ 18 सीटें NDA को मिली थी। 2025 में आंकड़ा 40 सीट तक पहुंच गया। मतलब 22 ज्यादा।
- 2020 में शाहाबाद में सिर्फ 2 सीट जीतने वाला NDA 2025 में 19 सीट पर पहुंच गया है। मतलब 17 ज्यादा।
- कुशवाहा का असर सीवान और समस्तीपुर जिले की सीटों पर भी दिख रहा है। सीवान में 8 में से 7 सीटें और समस्तीपुर की 10 में से 7 सीटों पर NDA को जीत मिली। 2020 में दोनों जिलों में गठबंधन को 7 सीटें मिली थीं।







