बिहार पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ी सफलता मिली. मुंगेर में आज दो इनामी नक्सलियों ने बिहार डीजीपी के सामने सरेंडर किया. नारायण कौडा और बहादुर कौडा पर 3-3 लाख का इनाम था. उनके साथ ही एक अन्य नक्सली विनोद कौडा ने भी आत्म समर्पण किया. उन पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे.
बिहार में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है. लंबे समय से सक्रिय और हार्डकोर नक्सली माने जाने वाले नारायण कौड़ा और बहादुर कौड़ा ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. दोनों नक्सलियों पर बिहार सरकार की ओर से तीन-तीन लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनके साथ एक अन्य नक्सली विनोद कौड़ा ने भी सरेंडर किया है. यह आत्मसमर्पण खड़गपुर स्थित आरएसके कॉलेज मैदान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान हुआ. कार्यक्रम में बिहार पुलिस के कई वरीय अधिकारी, नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अफसर और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे.
हथियार, कारतूस भी किए पुलिस के हवाले
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री भी पुलिस के हवाले कर दी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नारायण कौड़ा और बहादुर कौड़ा नक्सली संगठन में लंबे समय से सक्रिय थे और कई गंभीर नक्सली वारदातों में उनकी संलिप्तता बताई जाती है. इनके खिलाफ कई थानों में हत्या, लूट, विस्फोट और पुलिस पर हमले जैसे संगीन मामले दर्ज हैं. बिहार पुलिस लगातार इनके खिलाफ अभियान चला रही थी, जिससे दबाव में आकर इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने अपने पास मौजूद हथियार, कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री भी पुलिस के हवाले कर दी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नारायण कौड़ा और बहादुर कौड़ा नक्सली संगठन में लंबे समय से सक्रिय थे और कई गंभीर नक्सली वारदातों में उनकी संलिप्तता बताई जाती है. इनके खिलाफ कई थानों में हत्या, लूट, विस्फोट और पुलिस पर हमले जैसे संगीन मामले दर्ज हैं. बिहार पुलिस लगातार इनके खिलाफ अभियान चला रही थी, जिससे दबाव में आकर इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
नक्सलियों के हिंसा छोड़ने में परिवार ने किया सहयोग
आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान बिहार DGP ने नक्सलियों से बातचीत की और सरकार की पुनर्वास नीति की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहता है, सरकार उसे हर संभव सहायता देगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार सरकारी लाभ, पुनर्वास पैकेज और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी. कार्यक्रम में एक मानवीय पहल भी देखने को मिली, जहां आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पत्नियों को सम्मानित किया गया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि परिवार का सहयोग नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है और समाज में सकारात्मक संदेश देता है.
आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान बिहार DGP ने नक्सलियों से बातचीत की और सरकार की पुनर्वास नीति की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जो भी नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहता है, सरकार उसे हर संभव सहायता देगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार सरकारी लाभ, पुनर्वास पैकेज और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी. कार्यक्रम में एक मानवीय पहल भी देखने को मिली, जहां आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पत्नियों को सम्मानित किया गया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि परिवार का सहयोग नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित करता है और समाज में सकारात्मक संदेश देता है.







