• होम
  • समाचार
    • खास खबर
    • TAZA KHABR
    • केंद्रीय राजनीती
      • राजनीति
      • राष्ट्रपति भवन
      • विपक्ष
      • सांसद
      • कैबिनेट
      • विज्ञान
      • स्वास्थ
      • सेना
      • शिक्षा
      • कानून
    • विशेष
      • शिक्षा
      • स्वास्थ
    • टेक्नोलॉजी
      • अंतरिक्ष
      • परिवहन
      • विज्ञान
      • पर्यावरण
  • पॉलिटिक्स बिहार
    • भाजपा
    • जदयू
    • कांग्रेस
    • राजद
    • हम
    • लोजपा
    • विआईपपी
    • मुख्यमंत्री
    • कम्युनिस्ट
    • विधानमंडल
    • राजभवन
    • अन्य विपक्ष
    • बिहार विधानसभा चुनाव 2025
  • खेल
    • क्रिकेट
    • फूटबाल
    • टेनिस
  • कारोबार
    • कृषि
    • पेट्रोलियम
    • धातु
    • नीति
    • शेयर बाज़ार
    • ऑटोमोबाइल
  • मनोरंजन
    • हॉलीवुड
    • बॉलीवुड
    • कला
    • रंगमंच
    • अवार्ड
    • फिल्म समीक्षा
    • नया लांच
    • भोजपुरी
    • कलाकार विशेष
  • जिलावार
    • उत्तर बिहार
      • मुजफ्फरपुर
      • सारण
      • सिवान
      • दरभंगा
      • पश्चिम चंपारण
      • पूर्वी चंपारण
      • समस्तीपुर
      • सीतामढ़ी
      • शिवहर
      • वैशाली
      • मधुबनी
    • मध्य बिहार
      • पटना
      • अरवल
      • गया
      • जमुई
      • जहानाबाद
      • नवादा
      • बेगुसराय
      • शेखपुरा
      • लखीसराय
      • नालंदा
    • पूर्वी बिहार
      • अररिया
      • कटिहार
      • किशनगंज
      • खगड़िया
      • पूर्णिया
      • बांका
      • भागलपुर
      • मुंगेर
      • सहरसा
      • सुपौल
      • मधेपुरा
    • पश्चिमी बिहार
      • औरंगाबाद
      • कैमूर
      • बक्सर
      • भोजपुर
      • रोहतास
  • प्रदेश
    • झारखण्ड
    • दक्षिण भारत
    • दिल्ली
    • पश्चिम बंगाल
    • पूर्वी भारत
    • मध्यप्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • महिला युग
    • उप सम्पादक की कलम से
    • रोग उपचार
    • लेख
    • विशेष रिपोर्ट
    • समाज
    • मीडिया
    • Lokshbha2024
  • ब्लॉग
  • संपादकीय
  • होम
  • समाचार
    • खास खबर
    • TAZA KHABR
    • केंद्रीय राजनीती
      • राजनीति
      • राष्ट्रपति भवन
      • विपक्ष
      • सांसद
      • कैबिनेट
      • विज्ञान
      • स्वास्थ
      • सेना
      • शिक्षा
      • कानून
    • विशेष
      • शिक्षा
      • स्वास्थ
    • टेक्नोलॉजी
      • अंतरिक्ष
      • परिवहन
      • विज्ञान
      • पर्यावरण
  • पॉलिटिक्स बिहार
    • भाजपा
    • जदयू
    • कांग्रेस
    • राजद
    • हम
    • लोजपा
    • विआईपपी
    • मुख्यमंत्री
    • कम्युनिस्ट
    • विधानमंडल
    • राजभवन
    • अन्य विपक्ष
    • बिहार विधानसभा चुनाव 2025
  • खेल
    • क्रिकेट
    • फूटबाल
    • टेनिस
  • कारोबार
    • कृषि
    • पेट्रोलियम
    • धातु
    • नीति
    • शेयर बाज़ार
    • ऑटोमोबाइल
  • मनोरंजन
    • हॉलीवुड
    • बॉलीवुड
    • कला
    • रंगमंच
    • अवार्ड
    • फिल्म समीक्षा
    • नया लांच
    • भोजपुरी
    • कलाकार विशेष
  • जिलावार
    • उत्तर बिहार
      • मुजफ्फरपुर
      • सारण
      • सिवान
      • दरभंगा
      • पश्चिम चंपारण
      • पूर्वी चंपारण
      • समस्तीपुर
      • सीतामढ़ी
      • शिवहर
      • वैशाली
      • मधुबनी
    • मध्य बिहार
      • पटना
      • अरवल
      • गया
      • जमुई
      • जहानाबाद
      • नवादा
      • बेगुसराय
      • शेखपुरा
      • लखीसराय
      • नालंदा
    • पूर्वी बिहार
      • अररिया
      • कटिहार
      • किशनगंज
      • खगड़िया
      • पूर्णिया
      • बांका
      • भागलपुर
      • मुंगेर
      • सहरसा
      • सुपौल
      • मधेपुरा
    • पश्चिमी बिहार
      • औरंगाबाद
      • कैमूर
      • बक्सर
      • भोजपुर
      • रोहतास
  • प्रदेश
    • झारखण्ड
    • दक्षिण भारत
    • दिल्ली
    • पश्चिम बंगाल
    • पूर्वी भारत
    • मध्यप्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • महिला युग
    • उप सम्पादक की कलम से
    • रोग उपचार
    • लेख
    • विशेष रिपोर्ट
    • समाज
    • मीडिया
    • Lokshbha2024
  • ब्लॉग
  • संपादकीय

भारत विरोधी भावना के नाम पर भड़काई जा रही हिंसा पर अगर भारत ने ले लिया एक्शन तो…

UB India News by UB India News
December 25, 2025
in अन्तर्राष्ट्रीय, संपादकीय
0
भारत विरोधी भावना के नाम पर भड़काई जा रही हिंसा पर अगर भारत ने ले लिया एक्शन तो…
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण, छात्र नेता शरीफ उस्तान हादी की मौत और हिंदुओं पर लगातार हो रहे अत्याचारों को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में खटास आ गई है. मुहम्मद युनूस की सरकार में बांग्लादेश में इस वक्त राजनीतिक संकट और घरेलू अशांति चरम पर है. इस बीच, बांग्लादेश में भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं, भारत से पूर्वोत्तर राज्यों ‘सेवेन सिस्टर्स’ को अलग करने की धमकी दी जा रही है.

हालांकि, इस दौरान दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंधों को नकारा नहीं जा सकता. दोनों ही देश एक-दूसरे से सामानों का लेनदेन करते हैं. खासतौर पर, बांग्लादेश की भारतीय सामानों पर निर्भरता कहीं ज्यादा है. आइए देखते हैं कि बांग्लादेश में भारत के खिलाफ नारेबाजी करने वाले लोग किन-किन भारतीय सामानों पर निर्भर हैं?

RELATED POSTS

ईरान-अमेरिका के बीच हर दिन के साथ बढ़ रहा तनाव ……………

मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स को देख जला अमेरिका का खून………….

‘इंडिया लॉक्ड’ मुल्क है बांग्लादेश

सबसे पहले तो बांग्लादेश की जो भौगोलिक स्थिति है, उसे देखते हुए भारत के साथ उसका रिश्ता काफी अहम बन जाता है. बांग्लादेश चारों तरफ से भारत से घिरा हुआ है इसलिए इसे ‘इंडिया लॉक्ड’ मुल्क कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच 4367 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है और यह बांग्लादेश के इंटरनेशनल बॉर्डर का 94 परसेंट है. यानी कि बांग्लादेश की 94 परसेंट सीमा भारत से लगती है. ऐसे में भारत के साथ इसका कारोबार काफी आसान बन जाता है. ऊपर से बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर लोग भारत के विभिन्न शहरों में काम के सिलसिले में, बेहतर इलाज के लिए भारत आते रहते हैं. इसके अलावा, बांग्लादेश रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों के लिए भी भारत पर काफी ज्यादा निर्भर है. आइए देखते हैं बांग्लादेश, भारत से क्या-क्या मंगवाता है:-

चावल

बांग्लादेश भारत से बड़े पैमाने पर चावल खरीदता है. चावल भारत से एक्सपोर्ट की जाने वाली तीसरी सबसे बड़ी चीज है. बांग्लादेश बासमती के अलावा भारत से कई और अलग-अलक किस्म के चावल खरीदता है. इस बीच, बांग्लादेश के भारत और पाकिस्तान से टोटल 100,000 टन चावल खरीदने की भी बात सामने आई है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश का खाद्य मंत्रालय भारत की M/S पट्टाभि एग्रो फूड्स प्राइवेट लिमिटेड से 355.77 डॉलर प्रति टन की दर से 50,000 टन नॉन-बासमती चावल खरीदने जा रहा है.

चीनी

बांग्लादेश भारत से सिर्फ चावल ही नहीं चीनी भी खरीदता है. भारत के साथ-साथ बांग्लादेश ब्राजील, थाइलैंड और यहां तक कि पाकिस्तान से भी चीनी मंगाता है क्योंकि मांग के हिसाब से यहां इसकी उत्पादन क्षमता सीमित है. बांग्लादेश में मेघना ग्रुप, सिटी ग्रुप और वसुंधरा ग्रुप जैसे घरेलू रिफाइनर भारत से कच्ची चीनी का आयात कर उसे रिफाइन करने का काम करते हैं और इसके बाद माल बाजारों में जाता है.

आलू-प्याज

भारत बांग्लादेश के लिए आलू-प्याज का भी बहुत बड़ा सप्लायर है. कारोबारी साल 2023-24 में भारत ने बांग्लादेश को करीब 7.24 लाख टन प्याज भेजे. वहीं, 2022-23 में 3.5 लाख टन आलू का निर्यात किया. ऐसे में भारत या भारतीय सामानों को बॉयकॉट करने की बांग्लादेश की फिजूल की बातें उसी पर भारी पड़ सकती है.

मसाले

बांग्लादेश दूसरे अनाज और मसालों का भी एक बड़ा इंपोर्टर है. मिर्च, हल्दी, जीरा, अदरक जैसे कई मसाले भारत से बांग्लादेश भेजे जाते हैं. इसके अलावा, बांग्लादेश की खाद्य सुरक्षा में भी भारत की अहम भूमिका है क्योंकि प्याज, आलू, अदरक, लहसून से लेकर कई और तरह की सब्जियों और ताजे फलों के लिए बांग्लादेश भारत पर निर्भर है.

दवाइयां

भारत से तरह-तरह की बीमारियों के इलाज के लिए दवाइयां भी भारत से जाती हैं. एंटी-डायबिटिक से लेकर पैरासिटामोल, विटामिन-सी की गोलियां, ओमेप्राजोल जैसी कई जेनेरिक दवाइयां भी भारत से बांग्लादेश में भेजी जाती है. इसके अलावा, भारत लाइफ सेविंग्स ड्रग्स और API की भी बांग्लादेश में सप्लाई करता है.

टेक्सटाइल

बांग्लादेश रेडीमेड गार्मेंट्स का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है. इसे चलाने के लिए इसे धागों की जरूरत पड़ती है, जो भारत से आयात किया जाता है. यही धागा बांग्लादेश की रेडीमेड गार्मेंट्स इंडस्ट्री की रीढ़ की हड्डी है, जिसके भरोसे कई लोगों की रोजी-रोटी चलती है. इतना ही नहीं, बांग्लादेशी कपड़ों के लिए भारत भी एक बहुत बड़ा बाजार है. ऐसे में अगर दोनों देशों के तल्ख रिश्ते का असर बांग्लादेश के इस उद्योग पर पड़ा, तो इससे वहां की इकोनॉमी को बड़ा झटका लगेगा, जो पहले से ही दबाव में है.

तेल

बांग्लादेश भारत से तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भी आयात करता है. भारत से ही तेल, ईंधन मंगाकर बांग्लादेश ऊर्जा की अपनी जरूरतों को पूरा करता है. असम के नुमालीगढ़ से बांग्लादेश के पार्वतीपुर तक बिछी 131 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछी है, जिसके जरिए सालाना 1 मिलियन मीट्रिक टन हाई-स्पीड डीजल की सप्लाई की जाती है. इसके अलावा, भारत का बांग्लादेश के नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से रिफाइंड क्रूड ऑयल को लेकर भी कॉन्ट्रैक्ट है. बांग्लादेश भारत से कई तरह के केमिकल्स भी खरीदता है.

भारत विरोधी भावना के नाम पर हिंसा भड़काई जा रही है?

 बांग्लादेश की राजनीति में भारत-विरोध के मुद्दे का समय-समय पर इस्तेमाल किया जाता रहा है. हाल में मीडिया संस्थानों, सांस्कृतिक संगठन छायानट और धानमंडी-32 के आवास पर नए सिरे से तोड़फोड़ के दौरान भारत विरोधी नारे लगे थे. इन हमलों के दौरान जमात के अलावा छात्र संगठनों के नेता भी इन संस्थानों के खिलाफ बयान देते नज़र आए थे.

बीते बृहस्पतिवार को उस्मान हादी की मौत की ख़बर फैलने के बाद स्वतस्फूर्त विरोध प्रदर्शन हुए. उसके बाद आयोजित सभा में राजशाही विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष मोस्ताकुर रहमान ने कहा था, हम आज के इस कार्यक्रम से एलान करते हैं कि प्रथम आलो औऱ द डेली स्टार जैसे अख़बारों को बंद करवा देंगे.

उसी दिन इस्लामी छात्र शिविर के जहांगीरनगर विश्वविद्यालय शाखा के सचिव मुस्तफिजुर रहमान ने कहा था, “राजनीतिक लड़ाई के ज़रिए बांग्लादेश की असली आज़ादी हासिल करना संभव नहीं है. हमारी लड़ाई शहीद उस्मान हादी के इंकलाब मंच की सांस्कृतिक लड़ाई से शुरू होगी. कल बाम, शाहबागी, छायानट और उदिची का विध्वंस कर देना होगा. उसके बाद ही बांग्लादेश को असली आज़ादी मिलेगी.”

वामपंथियों को संक्षेप में बाम कहा जाता है जबकि शाहबागी शब्द 2013 में शाहबाग में हुए विरोध प्रदर्शन से निकला है. इसी तरह छायानट एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान है और उदिची देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन.

मिडिया की ओर से संपर्क करने पर उन लोगों ने अपनी टिप्पणियों से इनकार तो नहीं किया. लेकिन उन्होंने अलग-अलग तरीकों से इसकी व्याख्या की है. उनका दावा है कि इस बयान के माध्यम से वो सांस्कृतिक संस्थानों की ओर से अवामी लीग को दी गई वैधता को ख़त्म करने और दोनों मीडिया संस्थानों के पक्षपातपूर्ण रवैए पर अंकुश लगाने की बात कर रहे थे.

दूसरी ओर, इस्लामी छात्र शिविर ने दावा किया है कि नेताओं की ज़ुबान फिसलने के कारण की गई टिप्पणियों के कारण हमले का दोष संगठन के माथे मढ़ने की साज़िश रची जा रही है. संगठन ने ऐसी कोशिशों का कड़ा विरोध किया है.

लेकिन सचिव परिषद के अध्यक्ष नुरूल कबीर कहते हैं, “धर्म आधारित राजनीति को मजबूत करने के इच्छुक गुटों के लिए भारत विरोधी नारे लगाना सुविधाजनक है. जुलाई आंदोलन के दौरान और उसके बाद भारत की ओर से जताई गई प्रतिक्रिया ने उसके ख़िलाफ़ नाराज़गी और बढ़ा दी है. अब हादी की मौत के बाद अपनी धर्म आधारित राजनीति को मजबूत करने के इच्छुक लोग या संगठन इस भावना को और नए सिरे से और ज़्यादा प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं.”

वह कहते हैं, “जब इसी देश के लोगों का एक वर्ग लोकतांत्रिक संस्थानों को बर्बाद करने का प्रयास करता है तो भारत-विरोधी नारों की आड़ लेना उसके लिए सुविधाजनक है.”

हिंसा में सरकार की मिलीभगत का आरोप

प्रथम आलो और दे डेली स्टार ने आरोप लगाया है कि हमलावरों के मौके पर पहुंचने से पहले सरकार के शीर्ष स्तर पर मदद की गुहार लगाने के बावजूद उनको किसी तरह की सहायता नहीं मिली.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सुरक्षा बलों के मौके पर पहुंचने के बावजूद उन्होंने भीड़ पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. यही वजह है कि इस हिंसा और आगजनी के पीछे सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

प्रोफ़ेसर काज़ी मारफूल इस्लाम कहते हैं, “दरअसल यह पूरी तरह अंतरिम सरकार की विफलता है. अब तक किसी भी संस्थान पर सरकार के नियंत्रण के सबूत नहीं मिले हैं. काफ़ी हद तक ऐसा लगता है कि यह अंतरिम सरकार संभवतः इस तमाम उकसावे और हिंसा को बढ़ावा दे रही है.”

छायानट ने हमले की घटना में तीन सौ से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की है. प्रथम आलो और द डेली स्टार पर हुए हमले के मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

हालांकि घटना वाले दिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो में से एक में एक सेना अधिकारी को हमलावरों का विरोध करने के बजाय उनसे बातचीत करते हुए देखा गया था. उस अधिकारी को इमारत में फंसे पत्रकारों को बचाने के लिए हमलावरों से बीस मिनट का समय मांगते हुए भी देखा गया था.

नुरुल कबीर का कहना है कि सरकार के एक गुट के समर्थन के कारण ही हिंसा की ऐसी घटनाएं हो रही हैं.

वह कहते हैं, “सत्ता में रहने वाली सरकार ने द डेली स्टार और प्रथम आलो के दफ्तरों में आगजनी के बाद इस मामले में हस्तक्षेप के लिए जो देरी की, वह पूरी तरह उसकी विफलता है. मैं तो कहूंगा कि सरकार, प्रशासन और मोहम्मद यूनुस सरकार के मंत्रिमंडल में निश्चित तौर पर ऐसे लोग हैं जो इन घटनाओं को होने देना चाहते थे.”

नेशनल सिटीज़न पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने भी यही आरोप लगाया है. इस पार्टी की कमान संभालने से पहले नाहिद करीब साढ़े सात महीने तक अंतरिम सरकार के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं.

अख़बार के संपादकों के संगठन संपादक परिषद और मालिकों के संगठन न्यूज़पेपर ओनर्स एसोसिएशन की पहल पर सोमवार को आयोजित संयुक्त विरोध सभा में नाहिद इस्लाम का कहना था, “उन लोगों ने हमारे नारे का इस्तेमाल कर हमले किए और उसके पक्ष में आम सहमति बनाई. इस घटना के बाद हमारा कहना है कि इन हमलों में सरकार में शामिल एक गुट की भी मिलीभगत है.

हादी की मौत के बहाने भारत-विरोध की राजनीति?

बांग्लादेश में लंबे समय से विभिन्न वजहों से पनपने वाली भारत विरोधी भावना में बीते साल जुलाई के आंदोलन के बाद एक नया आयाम जुड़ गया. उस आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत अवामी लीग के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के भारत में शरण लेने के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में तनाव पैदा हुआ. ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर काज़ी मारफूल इस्लाम कहते हैं, “लंबे समय से चले आ रहे आधिपत्य के खिलाफ एक सक्रिय प्रतिरोध तो हमेशा रहा है. इसके अलावा उसने (भारत सरकार ने) सत्ता गंवाने वाली सरकार का समर्थन भी किया है.”

विश्लेषकों का कहना है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध के बावजूद उनको वापस नहीं भेजने और उस्मान हादी की हत्या के बाद अभियुक्तों के भाग कर भारत जाने के सोशल मीडिया प्रचार ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में तनाव और बढ़ा दिया है.

हालांकि सरकार और प्रशासन ने कहा है कि अभियुक्तों के देश छोड़ कर जाने के बारे में कोई निश्चित सबूत नहीं मिले हैं. बांग्लादेश पुलिस के अतिरिक्त आईजी खांडेकर रफ़ीकुल इस्लाम ने रविवार को कहा, “हम अब तक इस बात की पुष्टि नहीं कर सके हैं कि अभियुक्तों ने सीमा पार की है या नहीं.” उसके अगले दिन सोमवार को गृह मंत्रालय के सलाहकार ने एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा, “अगर अभियुक्तों के ठिकाने के बारे में पक्की जानकारी होती तो उनको गिरफ़्तार कर लिया गया होता.”

चुनाव रद्द कराने के लिए तुमने उसे मारा’, उस्मान हादी के भाई का मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप

बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और इंकिलाब मंचो के संयोजक शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। मृतक के भाई ओमर हादी ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके भाई की हत्या आगामी राष्ट्रीय चुनावों को पटरी से उतारने के लिए कराई गई। ओमर हादी का दावा है कि सत्ता में बैठे लोगों के एक गुट ने जानबूझकर इस हत्या को अंजाम दिया, ताकि चुनावी माहौल को अस्थिर किया जा सके और राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।

‘आपने उसे मरवाया’, सरकार पर सीधा हमला
ढाका के शाहबाग इलाके में राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित शहीदी शपथ कार्यक्रम में बोलते हुए ओमर हादी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, उन्होंने कहा यह आप ही हैं जिन्होंने उस्मान हादी को मरवाया और अब उसी मुद्दे को लेकर चुनाव बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर मौजूद एक खास गुट ने साजिश रचकर इस हत्या को अंजाम दिया। बता दें कि उस्मान हादी आगामी 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार थे। ओमर हादी का यह भी आरोप है कि उनके भाई की हत्या इसलिए की गई, क्योंकि उन्होंने किसी भी एजेंसी या विदेशी आकाओं के आगे झुकने से इनकार कर दिया था।
यूनुस सरकार को चेतावनी
ओमर हादी ने अंतरिम सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके भाई के हत्यारों को जल्द सजा नहीं दी गई, तो यूनुस सरकार का अंजाम भी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जैसा हो सकता है। उन्होंने कहा हत्यारों पर जल्द मुकदमा चलाएं, ताकि चुनावी माहौल खराब न हो। सरकार अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखा पाई है। अगर उस्मान हादी को न्याय नहीं मिला, तो आपको भी एक दिन बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा।

मस्जिद से निकलते समय मारी गई गोली
गौरतलब है कि 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी पर ढाका में एक मस्जिद से बाहर निकलते समय गोली चलाई गई थी। गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 19 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया और राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई।

2024 के आंदोलन का अहम चेहरा थे उस्मान हादी
उस्मान हादी उन प्रमुख छात्र नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने 2024 में हुए जन आंदोलन का नेतृत्व किया था। इसी आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अगस्त 2024 में पद छोड़कर भारत भागना पड़ा था, जहां वे फिलहाल निर्वासन में हैं।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

अमेरिका का ईरान पर हमला पड़ सकता है भारी ………………..

ईरान-अमेरिका के बीच हर दिन के साथ बढ़ रहा तनाव ……………

by UB India News
January 28, 2026
0

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन...

नहीं माने ट्रंप, भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का नोटिफिकेशन जारी, कुछ घंटों बाद हो जाएगा लागू

मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स को देख जला अमेरिका का खून………….

by UB India News
January 28, 2026
0

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा...

UGC के नए नियम पर क्यों मचा है बवाल?

क्या यूजीसी के नाम पर सवर्णों को क्या डर?

by UB India News
January 28, 2026
0

1990 का साल था. देश में राम लहर चल रही थी. इस राम लहर के बीच केंद्र की वीपी सिंह...

जंग, तबाही और शांति, कैसे बना 27 देशों वाला यूरोपियन यूनियन? जिससे भारत ने की डील

जंग, तबाही और शांति, कैसे बना 27 देशों वाला यूरोपियन यूनियन? जिससे भारत ने की डील

by UB India News
January 28, 2026
0

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप खंडहर में बदल चुका था. लाखों लोग मारे गए, अर्थव्यवस्थाएं टूट चुकी थीं. देशों...

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन को क्यों कहा जाता है आयरन लेडी…………

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि उर्सुला वॉन डेर लेयेन को क्यों कहा जाता है आयरन लेडी…………

by UB India News
January 28, 2026
0

भारत के लिए 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास साबित होने वाला है। दरअसल, इस मौके पर भारत और यूरोपीय संघ...

Next Post
सरकार क्यों चाहती है बैन अकाउंट्स की जानकारी ?

सरकार क्यों चाहती है बैन अकाउंट्स की जानकारी ?

इसरो ने रचा इतिहास, बाहुबली ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में किया स्थापित ………..

इसरो ने रचा इतिहास, बाहुबली ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में किया स्थापित ...........

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2025 ubindianews.com All Rights Reserved

MADE WITH ❤ BY AMBITSOLUTIONS.CO.IN

No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend