इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने एक और छलांग लगाई है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बाहुबली मिशन लॉन्च कर एक नया इतिहास रच दिया है. इसरो ने आज यानी बुधवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M6 रॉकेट द्वारा अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह 6100 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट LVM3 के इतिहास में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सबसे भारी पेलोड है. इसरो ने इसका वीडियो भी जारी किया है. इसमें देखा जा सकता है कि कैसे इसरो आसमान में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. आप भी देखिए इसरो के बाहुबली ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट लॉन्च का लाइव पल.<br>ISRO Bluebird launched: इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने एक और छलांग लगाई है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बाहुबली मिशन लॉन्च कर एक नया इतिहास रच दिया है. इसरो ने आज यानी बुधवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M6 रॉकेट द्वारा अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह 6100 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट LVM3 के इतिहास में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सबसे भारी पेलोड है. इसरो ने इसका वीडियो भी जारी किया है. इसमें देखा जा सकता है कि कैसे इसरो आसमान में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.
16 मिनट में 6100 किलो वजनी संचार उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया
यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे हुई। इसरो के मुताबिक, करीब 16 मिनट की उड़ान के बाद संचार उपग्रह रॉकेट से अलग होकर लगभग 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की AST स्पेसमोबाइल (AST and Science, LLC) के बीच हुए कॉमर्शियल समझौते का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर जताई खुशी
इसरो की सफल लॉन्चिंग पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया। जिसमें पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत के युवाओं की ताकत से, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम ज्यादा आधुनिक और असरदार बन रहा है। LVM3 ने भरोसेमंद हैवी-लिफ्ट प्रदर्शन दिखाया है, जिससे हम गगनयान जैसे भविष्य के मिशन के लिए नींव मजबूत कर रहे हैं, कमर्शियल लॉन्च सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं और वैश्विक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। यह बढ़ी हुई क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बढ़िया है।’
क्यों खास है इसरो का ये मिशन?
इस सफल लॉन्चिंग की अहमियत ये है कि इससे कमर्शियल स्पेस सेक्टर में भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो की पकड़ काफी मजबूत होगी। ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होने वाला भारत की धरती से लॉन्च होने वाला सबसे बड़ा और सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह भी है। भारत अपने एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के जरिए चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट मुहैया कराने वाली- वन वेब के सैटेलाइट लॉन्चिंग मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। वन वेब मिशन में इसरो ने एलवीएम से दो बार में कुल 72 सैटेलाइट्स पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित की थीं।
लॉन्च की गई सैटेलाइट क्यों है खास
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एक अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जेन) की प्रणाली का हिस्सा है। अगर यह उपग्रह सही कक्षा में स्थापित हो जाता है और कंपनी के परीक्षण सफल होते हैं तो इसके जरिए 4जी और 5जी स्मार्टफोन पर सीधे सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी। उपभोक्ता को किसी अतिरिक्त एंटीना या कस्टमाइज्ड हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल सेलफोन को 4जी या 5जी नेटवर्क हासिल करने के लिए मोबाइल टावर की जरूरत होती है, लेकिन इस उपग्रह के सफल होने के बाद टावर का काम खत्म हो सकता है।
इस सैटेलाइट की मदद से दूरस्थ स्थानों जैसे पहाड़ी इलाकों, महासागरों और रेगिस्तानों तक मोबाइल सेवा पहुंच सकेगी और इन क्षेत्रों में 4जी-5जी नेटवर्क सुविधा पहुंचाना आसान हो जाएगा। इतना ही नहीं आपदा की स्थिति में जब टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर तूफान, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं में तबाह हो जाते हैं, तब भी सैटेलाइट नेटवर्क बेहतर रहता है।







